UP Farmers Benefit from e-NAM (Photo: PTI)
UP Farmers Benefit from e-NAM (Photo: PTI)
यूपी के किसानों की आर्थिक स्थिति और सुदृढ़ हो, इसके लिए प्रदेश की योगी सरकार और केंद्र की मोदी सरकार तरह-तरह की योजनाएं चला रही है. e-NAM यानी इलेक्ट्रॉनिक नेशनल एग्रीकल्चर मार्केट ने यूपी के किसानों की किस्मत बदल दी है. आपको मालूम हो कि e-NAM केंद्र सरकार का एक ऑनलाइन ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म है, जिसे 14 अप्रैल 2016 को शुरू किया गया था. यह प्लेटफॉर्म देशभर की मौजूदा कृषि मंडियों (APMC मंडियों) को आपस में डिजिटल रूप से जोड़ता है, ताकि किसान अपनी उपज को सिर्फ अपने नजदीकी मंडी तक सीमित न रखें, बल्कि पूरे देश के खरीदारों तक ऑनलाइन नीलामी के जरिए पहुंचा सकें. इससे दाम मिलने की प्रक्रिया ज्यादा पारदर्शी होती है और बिचौलियों की भूमिका कम होती है.
देशभर में e-NAM की मौजूदा स्थिति (जून 2025 तक की जानकारी के अनुसार)
इस मामले में उत्तर प्रदेश देश में सबसे आगे
किसानों की रजिस्ट्रेशन संख्या के मामले में उत्तर प्रदेश देश में सबसे आगे है. अगस्त 2025 तक उत्तर प्रदेश में 33.05 लाख किसान e-NAM पर रजिस्टर्ड थे, जो देश में सबसे ज्यादा है. उत्तर प्रदेश की मंडियों में कारोबार की मात्रा भी लगातार बढ़ रही है. 2022-23 में 7.49 लाख मीट्रिक टन से बढ़कर 2023-24 में 8.97 लाख मीट्रिक टन, और 2024-25 में 10.89 लाख मीट्रिक टन तक पहुंच गई.
मंडियों के आधुनिकीकरण और e-NAM विस्तार का नया फैसला
31 जुलाई 2026 को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में उत्तर प्रदेश राज्य कृषि उत्पादन मंडी परिषद की 172वीं बोर्ड बैठक हुई. इसमें वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए ₹3,025.49 करोड़ के बजट को मंजूरी दी गई.
बैठक में लिए गए कुछ अहम फैसले
किसानों को क्या-क्या होगा फायदा