Imran Masood and Akhilesh Yadav (Photo/PTI)
Imran Masood and Akhilesh Yadav (Photo/PTI)
क्या कांग्रेस और सपा में सबकुछ ठीकठाक नहीं है? आखिर क्यों कांग्रेस के बड़े मुस्लिम चेहरे इमरान मसूद बार-बार समाजवादी पार्टी को टारगेट कर रहे हैं? क्यों कांग्रेस पार्टी उन्हें बोलने से नहीं रोक रही? क्या कांग्रेस के इशारे पर इमरान मसूद ने ये मोर्चा खोला है या उनकी निजी अदावत? आज इसका ही विश्लेषण.
इमरान मसूद के निशाने पर सपा-
इमरान मसूद कभी कहते हैं कि "सपा कांग्रेस को सीटें देने वाली कौन हैं? सीटें तो टेबल पर बैठ कर तय होंगी, ये देने का नैरेटिव नहीं चलेगा, वो ये न समझें कि वो देने वाले है, वो हमारी सीटें तय कर देंगे. बात बराबरी की होगी. अब इमरान मसूद के नए बयान ने बखेड़ा खड़ा कर दिया है. इमरान ने कहा कि सपा इस मुगालते में न रहे कि उसने 2024 में बीजेपी को हराया है. अगर कांग्रेस ने साथ न दिया होता और मुसलमानों का वोट एकमुश्त न मिला होता तो सपा 2024 के लोकसभा चुनाव में 2022 की जगह ही खड़ी होती. याद है विधानसभा चुनाव में 120 ही सीटें तो मिली थी सपा गठबंधन को."
बता दें कि इमरान यूपी तक के खास पॉडकास्ट में कह चुके हैं कि हमारी A ग्रेड की 170 सीटे हैं. हम यहां से बात करेंगे.
आखिर क्यों सपा पर हमलावर हैं मसूद?
इमरान मसूद जितना भी बोलें, लेकिन हाल में अखिलेश यादव को जन्मदिन की शुभकामनाएं देते हुए राहुल गांधी ने कहा था कि वो यूपी चुनाव में अखिलेश के PDA फार्मूले को मजबूत करेंगे और साथ चुनाव लड़ेंगे. लेकिन इतना सब होने के बावजूद आखिर इमरान मसूद ने क्यों सपा के खिलाफ मोर्चा खोल रहा है? क्या ये इमरान मसूद की निजी खुंदक है या पार्टी का इशारा, जिसके बाद इमरान सपा पर हमलावर हैं.
निजी खुन्नस या रणनीति?
इमरान के करीबी बताते हैं कि कुछ निजी खुन्नस तो इमरान को तब से है, जब उन्होंने सपा का दामन थामा था और पार्टी ने वादा करके उन्हें कुछ नहीं बनाया. उल्टे सहारनपुर में उनके धुर विरोधी सपा विधायक आशु मलिक ने सहारनपुर में सपा का मजबूत मोर्चा थाम रखा है और पग पग पर इमरान मसूद को चुनौती दे रहे हैं. लेकिन कांग्रेस पार्टी को क्या हो गया है? क्या वो ऐसे बयान से खुश है? अगर नहीं तो उन्हें रोकती क्यों नहीं?
कांग्रेस की चुप्पी या कहें इमरान मसूद का मौन समर्थन. सपा के लोगों को भी चौंका रहा है.
राजनैतिक जानकारों की मानें तो कांग्रेस पार्टी को ये सूट कर रहा है कि सपा पर मुस्लिम वोटों का दबाव बनाए रखा जाए. कांग्रेस की पहली कोशिश है कि मुस्लिम वोटों को हरसंभव अपने पाले में लाया जाए. यही वजह है कि अखिलेश यादव सॉफ्ट हिंदुत्व का कार्ड खेलने के बावजूद कांग्रेस में राहुल गांधी की तरफ से राम मंदिर तक पर कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है. जबकि अखिलेश यादव हर संभव हिन्दू वोट अपने पक्ष में करने में जुटे है. यही वजह है कि शंकराचार्य से लेकर राममंदिर तक सब में वही मुखर हैं.
मसूद पर सपा का पलटवार-
काफी वक्त तक चुप रहने के बाद अब सपा ने भी जवाब देना तय कर लिया है. इमरान मसूद के बयान के बाद सांसद राजीव राय ने अब शिकायत सीधे राहुल गांधी, प्रियंका गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे से कर दी है.
देखिये ट्वीट में क्या लिखते हैं -
मसूद ही नहीं, बाकी लीडर भी मुखर-
सिर्फ इमरान मसूद ही क्यों कांग्रेस के सभी प्रदेश के नेता अब सपा से बराबरी के गठबंधन की बात करने लगे हैं. नए बनाए गए उत्तर प्रदेश प्रभारी राजेंद्र पाल गौतम ने भी गठबंधन में बराबरी की बात कर दी है.
दरअसल इमरान मसूद ये बातें कर सपा पर भी दबाव बनाए हुए है. उन्हें मालूम है, अगर अभी से सीट का दबाव नहीं बनाया तो आखिरी में कांग्रेस को कुछ हाथ नहीं लगेगा और जब सीटों की बातचीत आखिरी वक्त में शुरू होगी तो समाजवादी पार्टी फिर कांग्रेस के कमजोर पार्टी और बदहाल संगठन का हवाला देकर सीटों का झुनझुना थमा देगी.
सपा ने फिलहाल गठबंधन की बातचीत नहीं शुरू करने का फैसला कर रखा है. जबकि कांग्रेस अपनी तरफ से सीटों की सूची के साथ तैयार है. ऐसे में कांग्रेस नेताओं के बयान सीट तय करने की रणनीति का ही हिस्सा दिखाई देता है.
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