Voter List (Photo- ITG)
Voter List (Photo- ITG)
उत्तर प्रदेश में मतदाता पुनरीक्षण के बाद SIR (Special Intensive Revision) की फाइनल वोटर लिस्ट जारी हो गई है. इसमें 2.04 करोड़ लोगों के नाम कटे हैं. यूपी एसआईआर में मुस्लिम बहुल इलाकों में कम नाम कटे हैं जबकि भाजपा के गढ़ में ज्यादा नाम मतदाता सूची से बाहर हुए हैं. सियासत के लिहाज से SIR के नतीजे भाजपा की मुश्किलें बढ़ाने वाले हैं. सीएम योगी ने शुरू में ही इशारा किया था कि SIR में भाजपा के समर्थकों के वोट ज्यादा कटेंगे. अब SIR की फाइनल सूची उसी ओर इशारा कर रही है. आपको मालूम हो कि उत्तर प्रदेश में अगले साल यानी साल 2027 में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं. ऐसे में SIR का प्रभाव पड़ने की संभावना है.
बीजेपी के प्रभाव वाले क्षेत्रों में 18 से 23 फीसदी वोट कटे
लखनऊ, गाजियाबाद, प्रयागराज और कानपुर जैसे बीजेपी के प्रभाव वाले क्षेत्रों में 18 से 23 फीसदी वोट कटे हैं, वहीं बिजनौर, मुरादाबाद, सहारनपुर जैसे जिलों में 10 से 12 फीसदी के आसपास वोट कटे हैं. फाइनल आंकड़ों ने बीजेपी की पेशानी पर बल जरूर ला दिया होगा. उत्तर प्रदेश में हुए SIR में दो करोड़ चार लाख लोगों के नाम कटे हैं. यह देश में गुजरात के बाद दूसरे नंबर पर सबसे ज्यादा वोट प्रतिशत कटने वाला राज्य बन गया है.
यूपी में अब कुल 13.24% वोटर हो गए कम
यूपी में कुल 13.24% वोटर अब कम हो गए. गुजरात में सबसे ज्यादा 13.40 प्रतिशत वोट SIR के बाद कटे हैं. कोई अगर ये सोचता है कि SIR में मुसलमानों के वोट ज्यादा कटे होंगे क्योंकि मुस्लिम घुसपैठिए बड़ी तादाद में वोटर बन गए हैं तो यूपी के नए SIR के आंकड़े सामने आने के बाद उन्हें झटका लग सकता है. SIR में सबसे ज्यादा भाजपा के गढ़ में ही वोट कम हुए हैं जबकि मुस्लिम बहुल जिलों में सबसे कम वोट कटे हैं. सबसे ज्यादा वोट लखनऊ में कटे हैं, दूसरे नंबर पर प्रयागराज, तीसरे नंबर पर कानपुर, चौथे नंबर पर आगरा और पांचवे नंबर पर गाजियाबाद जैसे जिले हैं, जहां सबसे ज्यादा वोट SIR के विशेष पुनरीक्षण के बाद कम हुए हैं. उधर, बिजनौर, मुरादाबाद, सहारनपुर और मुजफ्फरनगर जैसे मुस्लिम आबादी वाले जिलों में प्रदेश के औसत से काफी कम नाम कटे हैं.
प्रतिशत के लहाज से लखनऊ में लगभग 23 फीसदी मतदाता काम हो गए हैं. गाजियाबाद में 20 फीसदी से ज्यादा, कानपुर, नोएडा और मेरठ में लगभग 18-19 परसेंट मतदाता कम हुए हैं. ये वो इलाके हैं जहां बीजेपी कई सालों से अपने प्रभाव को बरकरार रखा है और लगातार लोकसभा और विधानसभा में सीटें जीत रही है. आंकड़े बता रहे हैं कि भाजपा के प्रभाव वाले क्षेत्र में 20 फीसदी से ज्यादा वोट कटे हैं जबकि मुस्लिम बहुल या जिलों में यह आंकड़ा औसतन 10 से 12 फीसदी के आसपास पास है. हालांकि भाजपा ने सबसे ज्यादा SIR के इस विशेष गहन पुनरीक्षण को अपना समर्थन दिया था लेकिन आंकड़ों के आने के बाद भारतीय जानता पार्टी नए सिरे से अब रणनीति बनाने पर विवश होगी.
यूपी में कुल इतने हैं मतदाता
राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) नवदीप रिन्वा ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस कर बताया कि SIR प्रक्रिया को पूरी तरह से विधिक और पारदर्शी तरीके से संपन्न किया गया है. बिना निर्धारित कानूनी प्रक्रिया के किसी भी मतदाता का नाम सूची से नहीं हटाया गया है. एसआईआर की अंतिम मतदाता सूची के अनुसार यूपी में 13 करोड़ 39 लाख 84 हजार 792 मतदाता हैं. पुरुष मतदाताओं की संख्या 7 करोड़ 30 लाख 71 हजार 61 है. महिला मतदाताओं की संख्या 6 करोड़ नौ लाख नौ हजार 525 है. प्रदेश के कुल मतदाताओं में 54.54 प्रतिशत पुरुष जबकि 45.46 प्रतिशत महिला मतदाता हैं. प्रदेश में 18 से 19 आयुवर्ग के मतदाताओं की संख्या 17 लाख 63 हजार 360 है.