Traffic Jam
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उत्तर प्रदेश पुलिस की यातायात शाखा ने शहरों में जाम कम करने और पीक आवर्स में यात्रा समय घटाने के लिए City-Reducing Traffic Congestion (C-RTC) योजना शुरू की है. यह योजना पहले चरण में प्रदेश के 20 जिलों के 172 चिन्हित मार्गों पर लागू की जा रही है.
यातायात बाधाओं को दूर करना मकसद-
इस तकनीक-आधारित कार्ययोजना का उद्देश्य शहरी क्षेत्रों में यातायात बाधाओं को दूर कर आम जनता की दैनिक आवाजाही को सरल और सुगम बनाना है. विभाग ने बताया है कि योजना का फोकस खास तौर पर उन मार्गों पर रहेगा, जहां पीक आवर्स में यात्रा समय सामान्य से काफी अधिक हो जाता है.
172 रूटों पर फोकस-
योजना के तहत आगरा, अलीगढ़, अयोध्या, बरेली, कानपुर, लखनऊ, मेरठ, प्रयागराज, वाराणसी सहित 20 जिलों में मार्ग चिह्नित किए गए हैं. इनमें कानपुर में सबसे अधिक 14, गाजियाबाद और गौतमबुद्धनगर में 12-12, जबकि लखनऊ, मेरठ, प्रयागराज, वाराणसी और कई अन्य जिलों में 10-10 मार्ग शामिल हैं.
विभाग के अनुसार, वैज्ञानिक अध्ययन में यह पाया गया कि अलग-अलग समय पर एक ही मार्ग पर यात्रा समय में बड़ा अंतर आता है. इसी आधार पर ऐसे स्थानों को प्राथमिकता दी गई है, जहां यातायात दबाव अधिक है और जाम की समस्या बार-बार बनती है.
रूट मार्शल की तैनाती-
प्रत्येक चिन्हित मार्ग के लिए एक रूट मार्शल नियुक्त किया जाएगा, जो उस मार्ग पर ट्रैफिक प्रबंधन की जिम्मेदारी संभालेगा. यह जिम्मेदारी यातायात निरीक्षक या उपनिरीक्षक स्तर के सबसे सक्षम कर्मियों को दी जाएगी, ताकि जमीनी स्तर पर यातायात प्रवाह को सुचारु रखा जा सके.
संबंधित थाना क्षेत्र के प्रभारी और फील्ड अधिकारी भी रूट मार्शल के साथ संयुक्त जिम्मेदारी निभाएंगे. योजना में यह भी कहा गया है कि विशेष परिस्थितियों में रूट मार्शल यातायात से जुड़ी अन्य ड्यूटी भी निभा सकते हैं.
5E मॉडल पर कार्रवाई-
जाम कम करने के लिए योजना को 5E मॉडल पर लागू किया जाएगा, जिसमें Education and Awareness, Enforcement, Engineering and Technological Intervention, Encroachment Removal और E-rickshaw operation शामिल हैं. विभाग का मानना है कि पीक आवर्स में ट्रैफिक को सुचारु रखने के लिए यही प्रमुख रणनीति होगी.
योजना में एआई आधारित तकनीक का भी इस्तेमाल किया जाएगा, जिससे न्यूनतम, अधिकतम और औसत यात्रा समय का विश्लेषण ग्राफ और तालिका के रूप में मिलेगा. नोडल अधिकारी अपने स्मार्टफोन से अपने क्षेत्र के चिन्हित मार्गों की रियल टाइम स्थिति और जाम के बिंदु देख सकेंगे.
एक महीने बाद समीक्षा-
यातायात निदेशालय के अनुसार, इस योजना के प्रदर्शन की नियमित समीक्षा की जाएगी. पहले चरण में जिन 20 जिलों में इसे लागू किया गया है, वहां एक महीने बाद गहन अध्ययन और समीक्षा होगी, जिसके आधार पर आगे की रणनीति तय की जाएगी.
यह पहल शहरों में जाम, ईंधन की बर्बादी, प्रदूषण और आपात सेवाओं के फंसने जैसी समस्याओं को कम करने की दिशा में एक अहम कदम मानी जा रही है.
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