वेदे भारत
वेदे भारत
वंदे भारत ट्रेन का एक खूबसूरत वीडियो इन दिनों सोशल मीडिया पर लोगों का ध्यान खींच रहा है. रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने यह वीडियो अपने एक्स अकाउंट पर शेयर किया है. वीडियो में वंदे भारत घने जंगलों के बीच से गुजरती दिखाई दे रही है. ऊपर से ड्रोन से लिया गया यह शॉट देखने में काफी शानदार लग रहा है. ट्रेन जब घुमावदार रास्ते से आगे बढ़ती है तो ऐसा लगता है जैसे कोई नारंगी रंग का सांप जंगल के बीच इठलाता हुआ निकल रहा हो. दरअसल ये वीडियो एक ट्रायल वीडियो है, जहां पर वंदे भारत चलाने की तैयारी की जा रही है, जिसका सफल फील्ड ट्रायल मुश्किल पहाड़ी रास्तों पर किया गया.
रेल मंत्री ने लिखा- नई पीढ़ी की ट्रेनें
अश्विनी वैष्णव ने वीडियो शेयर करते हुए लिखा, 'नई पीढ़ी की ट्रेनें! भारत में और बनाएं'. आपके ये भी बता दें कि यह पोस्ट करीब 9 घंटे पहले पोस्ट की गई है और देखते ही देखते वायरल हो गई. वीडियो में ट्रेन की रफ्तार और जंगल के बीच उसका सफर लोगों को काफी पसंद आ रहा है.
लोगों ने ऐसे किया रिएक्ट
वीडियो पर लोगों ने अलग-अलग तरह की प्रतिक्रियाएं दीं. किसी ने इसे विकसित भारत की तस्वीर बताया तो किसी ने बेहद खूबसूरत अनुभव बताया. एक यूजर ने लिखा, 'विकसित भारत पटरी पर'. वहीं दूसरे ने इसे 'खूबसूरत कल्पना' बताया. एक यूजर ने जंगल के बीच दौड़ती ट्रेन को 'खूबसूरत नारंगी सांप' तक कह दिया.
लोगों ने रेल मंत्री को सुझाव भी दिए
वीडियो पसंद करने के साथ ही लोगों ने रेलवे से जुड़े कुछ सुझाव भी दिए. इनमें प्रमुख रेलवे स्टेशनों पर मेट्रो जैसी प्रवेश व्यवस्था शुरू करने की मांग शामिल थी. इसके अलावा वंदे भारत की ज्यादा स्लीपर कोच वाली ट्रेनें चलाने और त्योहारों के दौरान ट्रेनों में कोच की संख्या बढ़ाने का सुझाव दिया गया. एक यूजर ने सफाई कर्मचारियों को बेहतर तरीके से प्रशिक्षित करने की बात भी कही, ताकि कचरा पटरियों पर न फेंका जाए.
2047 तक 4,500 ट्रेनें करने का लक्ष्य
दिसंबर 2025 तक देशभर में 164 वंदे भारत ट्रेनें चल रही थीं, जो प्रमुख रेल मार्गों पर कनेक्टिविटी बढ़ाने का काम कर रही हैं. इन ट्रेनों से अब तक 7.5 करोड़ से ज्यादा यात्री सफर कर चुके हैं. यानी कुछ ही वर्षों में वंदे भारत की पहुंच देश के अलग-अलग हिस्सों तक तेजी से बढ़ी है. वंदे भारत स्लीपर ट्रेन को जनवरी 2026 में शुरू करने की योजना बताई गई थी, ताकि लंबी दूरी की रात की यात्रा के लिए भी सुविधा बढ़ाई जा सके. रेलवे का लक्ष्य 2030 तक वंदे भारत के बेड़े को 800 और 2047 तक 4,500 तक पहुंचाने का है.
वंदे भारत एक्सप्रेस की शुरुआत 15 फरवरी 2019 को नई दिल्ली-कानपुर-प्रयागराज-वाराणसी मार्ग पर हुई थी. इसमें 16 कोच थे और पूरी ट्रेन वातानुकूलित थी. पहली ट्रेन की अधिकतम स्पीड 160 किलोमीटर प्रति घंटा थी. इसमें स्वचालित दरवाजे, जीपीएस आधारित यात्री सूचना प्रणाली और ट्रेन के अंदर मनोरंजन की सुविधा जैसी आधुनिक व्यवस्थाएं दी गई थी. पहली वार जब ट्रेन चलाई गई तो उसमें यात्रा करने वाले लोगों ने बताया कि वंदे भारत में यात्रा करना उनके लिए एक अलग अनुभव था.
मेक इन इंडिया के तहत तैयार होती है ट्रेन
वंदे भारत ट्रेनसेट का निर्माण इंटीग्रल कोच फैक्ट्री यानी IFC में किया जाता है. इनमें करीब 90 प्रतिशत स्थानीयकरण है, जो मेक इन इंडिया पहल के अनुरूप है. ट्रेन के डिजाइन और जरूरी सिस्टम को देश में ही विकसित और जोड़ा गया है. साल 2024 में वंदे भारत ट्रेनसेट के निर्माण के लिए आईसीएफ को राष्ट्रीय ऊर्जा संरक्षण पुरस्कार भी मिला था. यह पुरस्कार ट्रेन के निर्माण में ऊर्जा दक्षता और टिकाऊ उत्पादन पर दिए जा रहे जोर को दर्शाता है.
ये भी पढ़ें