Spring Season (Photo/PTI)
Spring Season (Photo/PTI)
ना पूरी सर्दी… ना पूरी गर्मी… भारत में कभी बसंत एक ऐसा मौसम हुआ करता था, जो इन दोनों के बीच संतुलन बनाता था. लेकिन अब फरवरी खत्म होते-होते ही गर्मी का एहसास होने लगता है और मार्च तक तापमान तेजी से बढ़ने लगता है.
क्या बसंत सच में छोटा हो रहा है?
इस सवाल पर भारत के 2 प्रमुख मौसम संस्थानों India Meteorological Department (IMD) और SAFAR (System of Air Quality and Weather Forecasting and Research) (SAFAR) के विशेषज्ञों ने अलग-अलग, लेकिन जुड़ी हुई वजहें बताई हैं.
जेट स्ट्रीम में बदलाव-
IMD के मुताबिक इस बार मौसम में तेजी से बदलाव की एक बड़ी वजह Jet Stream में बदलाव है. जेट स्ट्रीम ऊपरी वायुमंडल में बहने वाली तेज हवाओं की धारा होती है, जो ठंड और गर्मी के संतुलन को नियंत्रित करती है.
जब ये धारा अपनी सामान्य स्थिति से हटती है या कमजोर होती है तो ठंडी हवाओं का असर कम हो जाता है, तापमान तेजी से बढ़ने लगता है और सर्दी से गर्मी के बीच का ट्रांजिशन बहुत छोटा हो जाता है. यही वजह है कि इस बार सर्दी अचानक खत्म हुई और गर्मी जल्दी महसूस होने लगी.
अल नीनो से ला नीना की ओर बदलाव-
SAFAR के विशेषज्ञ इस बदलाव को बड़े वैश्विक पैटर्न से जोड़ते हैं. उनके अनुसार इस समय दुनिया का मौसम अल नीनो से ला नीना की ओर ट्रांजिशन फेज़ में है.
El Nino के दौरान समुद्र का तापमान बढ़ जाता है, जिससे भारत में सर्दियां कमजोर होती हैं और गर्मी जल्दी आती है, जबकि La Nina इसके उलट असर डालता है. लेकिन जब ये दोनों अवस्थाओं के बीच बदलाव होता है, तो मौसम अस्थिर हो जाता है. कभी अचानक ठंड, कभी तेज गर्मी और मौसम का संतुलन बिगड़ जाता है. यही अस्थिरता बसंत जैसे 'नाजुक मौसम' को सबसे ज्यादा प्रभावित करती है.
विशेषज्ञों के मुताबिक बसंत एक 'ट्रांजिशन सीजन' है, जो पूरी तरह संतुलन पर निर्भर करता है. लेकिन अब सर्दियां जल्दी खत्म हो रही हैं, गर्मी जल्दी शुरू हो रही है और मौसम के बीच का अंतर कम होता जा रहा है. इससे बसंत का समय छोटा और कम महसूस होने लगा है.
क्या यह नया नॉर्मल है?
मौसम वैज्ञानिक मानते हैं कि यह सिर्फ एक साल का बदलाव नहीं, बल्कि एक बड़ा ट्रेंड बनता जा रहा है. बार-बार बदलते वैश्विक पैटर्न, बढ़ता तापमान और अस्थिर मौसम अब इस ओर इशारा कर रहे हैं कि भविष्य में बसंत और भी छोटा हो सकता है.
एक तरफ जेट स्ट्रीम का बदलता रुख और दूसरी तरफ अल नीनो और ला नीना के बीच का ट्रांजिशन, दोनों मिलकर भारत के मौसम के संतुलन को प्रभावित कर रहे हैं. और इसी बदलाव के बीच… वो मौसम, जिसे कभी 'ऋतुराज' कहा जाता था, वो धीरे-धीरे सिमटता जा रहा है.
ये भी पढ़ें: