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अगर ममता बनर्जी इस्तीफा नहीं देंगी तो क्या होगा परिणाम, जानें संविधान इसपर क्या कहता है

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में करारी हार के बावजूद मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने पद से इस्तीफा देने से इनकार कर दिया है, जिससे राज्य में राजनीतिक और संवैधानिक हलचल तेज हो गई है. जहां ममता बनर्जी ने चुनाव परिणामों पर सवाल उठाते हुए चुनाव आयोग को जिम्मेदार ठहराया है, वहीं भाजपा ने 207 सीटों के प्रचंड बहुमत के साथ सरकार बनाने का दावा पेश किया है.

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पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस की हार के बाद मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने साफ कर दिया है कि वह इस्तीफा नहीं देंगी. सीएम के इस बात को लेकर बंगाल से दिल्ली तक एक बार फिर हलचल तेज हो गई है. उनका कहना है कि उनकी नजर में यह हार नहीं है, इसलिए पद छोड़ने का सवाल ही नहीं उठता. चुनाव के बाद हुई प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने कहा कि अगर हार का ठोस सबूत होता, तभी वह इस्तीफा देतीं, लेकिन दबाव में आकर ऐसा कोई कदम नहीं उठाया जाएगा.

चुनाव परिणाम पर उठाए सवाल
ममता बनर्जी ने चुनाव नतीजों पर भी सवाल खड़े किए. उन्होंने चुनाव आयोग को इसके लिए जिम्मेदार ठहराते हुए कहा कि पूरी प्रक्रिया में गड़बड़ी हुई है. उनके मुताबिक, यह हार निष्पक्ष तरीके से नहीं हुई. उन्होंने आगे कहा कि पार्टी के नेताओं के साथ बैठकर अगली रणनीति तय की जाएगी और वह अब सड़कों पर उतरकर विरोध भी करेंगी.

बीजेपी का पलटवार
ममता के इस बयान पर बीजेपी पार्टी के प्रवक्ता का कहना है कि, इस तरह के बयान संवैधानिक बिलकुल नहीं हैं. उनका कहना है कि जो भी व्यक्ति संविधान पर भरोसा करता है, वह इस तरह की बातें नहीं करता. बीजेपी के वक्ता ने यह भी कहा डाला कि ममता बनर्जी जानबूझकर ऐसे बयान दे रही हैं. ये सब बचपना है. कुछ दिन की बात है वह फिर शांत हो जाएंगी.

हालांकि दोनों तरफ से बयानबाजी जारी है. एक तरफ जहां टीएमसी चुनावी परिणाम को बार-बार गलत ठहरा रही है, वहीं भाजपा इसपर संविधानिक तरीका अपनाने की बात कर रही है. जानें कि अगर चुनाव के बाद कोई सीएम इस्तीफा नहीं देता है, तो इसपर संविधान क्या कहता है.

संविधान क्या कहता है?
भारतीय संविधान का अनुच्छेद 164 इस मामले में मार्गदर्शन देता है. इसके अनुसार, राज्य में सरकार बनाने की प्रक्रिया राज्यपाल के जरिए होती है. चुनाव के बाद राज्यपाल यह देखते हैं कि किस पार्टी या गठबंधन के पास बहुमत है और उसी आधार पर सरकार बनाने का मौका दिया जाता है.

बहुमत का महत्व
संविधान के अनुसार मुख्यमंत्री तब तक पद पर बने रहते हैं, जब तक उनके पास विधानसभा में बहुमत का समर्थन होता है. यहां 'राज्यपाल की इच्छा' का मतलब व्यक्तिगत नहीं होता, बल्कि यह विधायकों के बहुमत से जुड़ा होता है. यानी अगर बहुमत किसी नेता के साथ है, तो वह पद पर बना रह सकता है.

इस्तीफा न देने पर क्या होगा?
अगर मुख्यमंत्री इस्तीफा नहीं देते और उनके पास बहुमत भी नहीं होता, तो राज्यपाल अपने अधिकारों का इस्तेमाल कर सकते हैं. ऐसी स्थिति में राज्यपाल मंत्रिपरिषद को बर्खास्त कर सकते हैं, जिसमें मुख्यमंत्री भी शामिल होते हैं. यानी अंतिम फैसला बहुमत और संवैधानिक प्रक्रिया पर ही निर्भर करता है.

विधानसभा का कार्यकाल
संविधान का अनुच्छेद 172 बताता है कि किसी भी राज्य की विधानसभा का कार्यकाल पांच साल का होता है, जब तक उसे पहले भंग न कर दिया जाए. पांच साल पूरे होने पर विधानसभा अपने आप खत्म हो जाती है.

हालांकि इस पूरे मामले में एक चीज तो साफ है कि केवल बयानबाजी या राजनीतिक दावे से कुछ तय नहीं होता. असली ताकत बहुमत और संविधान के नियमों में होती है. अगर बहुमत साथ है तो सरकार बनी रहती है, नहीं तो संवैधानिक प्रक्रिया के तहत बदलाव तय हो जाता है.

बीजेपी सबसे दावेदार पार्टी
भाजपा 9 मई को बंगाल में सरकार बनाने जा रही है. हालांकि हर बार की तरह अभी मुख्यमंत्री का चेहरा बीजेपी के ओर से साफ नहीं किया गया है. बंगाल में 23 और 29 तारीख को 294 सीटों के लिए विधानसभा चुनाव हुआ था, और सरकार बनाने का दावा करने के लिए किसी भी पार्टी को कम से कम 148 बहुमत की आवश्यकता है. जबकि बीजेपी 207 सीट जीतकर सरकार बनाने के लिए सबसे दावेदार पार्टी है. वहीं टीएमसी 79 सीटों पर सिमट कर रह गई. ममता बनर्जी साल 2011 से बंगाल की कमान संभालते आ रही हैं, 15 सालों के सीएम पद पर बने रहने के बावजूद बंगाल की जनता ने उन्हें नकार दिया. फिलहाल इस्तीफा न देने के बयान पर राजनीतिक चर्चा तेज है. आने वाले दिनों में ही बंगाल की राजनीति किस तरफ मुड़ेगी, ये देखने में दिलचस्प होगा.

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