Wrestler Protest (file photo)
Wrestler Protest (file photo) केंद्र सरकार ने भारतीय कुश्ती संघ (डब्ल्यूएफआई) को निलंबित कर दिया है. खेल मंत्रालय ने डब्ल्यूएफआई की पूरी नवनिर्वाचित टीम को सस्पेंड कर दिया है. इतना ही नहीं, सरकार ने भारतीय कुश्ती संघ के नए अध्यक्ष के सभी फैसलों पर रोक लगा दी है. सरकार के इस फैसले के बाद अब संजय सिंह अध्यक्ष नहीं रहेंगे, क्योंकि सरकार ने उनकी मान्यता रद्द कर दी है. आइए जानते हैं बीजेपी सांसद बृजभूषण शरण सिंह के करीबी संजय सिंह की टीम पर क्या है आरोप और इस बार कैसे पहलवान जीत गए?
नियमों की अनदेखी का अरोप
डब्ल्यूएफआई के चुनाव 21 दिसंबर 2023 को हुए थे. इसमें पूर्व अध्यक्ष बृजभूषण शरण सिंह के विश्वासपात्र संजय सिंह और उनके पैनल ने बड़े अंतर से जीत दर्ज की थी. इसके बाद संजय सिंह की अगुवाई में नवनिर्वाचित संस्था ने आनन-फानन में अंडर-15 और अंडर-20 राष्ट्रीय चैंपियनशिप के आयोजन की साल खत्म होने से पहले ही उत्तर प्रदेश के गोंडा के नंदिनी नगर में करने की घोषणा कर दी. पहलवानों को इसकी तैयारी के लिए पर्याप्त समय भी नहीं दिया गया. इस तरह से डब्ल्यूएफआई के संविधान के प्रावधानों का पालन नहीं किया गया.
पहली लड़ाई में हार गए थे पहलवान
कुश्ती संघ के पूर्व अध्यक्ष बृजभूषण शरण सिंह के खिलाफ पहली बार 18 जनवरी 2023 को दिल्ली के जंतर-मंतर पर धरने पर पहलवान बैठे थे. इस दौरान पहलवानों ने बृजभूषण शरण सिंह को अध्यक्ष पद से हटाने की मांग की थी. पहलवानों का कहना था कि बृजभूषण सिंह ने महिला पहलवानों के साथ यौण शोषण किया है. इस कारण से उन्हें बर्खास्त किया जाए. इस दौरान सरकार ने आश्वासन दिया था कि मामले की जांच होगी और पहलवानों को न्याय मिलेगा, लेकिन बाद में यह मामला बंद हो गया. इस पहली लड़ाई में पहलवान हार गए थे.
धरना करना पड़ा था खत्म
दूसरी बार पहलवान फिर से उसी मांग के साथ 23 अप्रैल 2023 को धरने पर बैठे थे. इस बार पहलवानों ने ठान लिया था कि जब तब बृजभूषण सिंह को पद से हटाया नहीं जाएगा, तब तक पहलवानों का धरना जारी रहेगा. पहलवान कई दिनों तक धरने पर बैठे रहे, लेकिन सरकार ने एक नहीं सुनी. फिर पहलवान ने कहा कि वह अपने सभी मेडल को गंगा में बहा देंगे, पहलवान अपने-अपने मेडल लेकर गंगा में बहाने भी चले गए थे, लेकिन फिर भी सरकार नहीं झुकी. हालांकि पहलवानों के मेडल बहाने से पहले राकेश टिकैत ने उन्हें आकर रोक लिया था. कई कोशिशों के बाद भी सरकार नहीं झुकी थी. आखिरकार पहलवानों को ही धरना खत्म करना पड़ा था.
...तो इसलिए संजय सिंह को हटाया गया
अब सबसे बड़ा सवाल उठता है कि जब सरकार अभी तक पहलवानों के सामने नहीं झुकी थी, तो इस बार कैसे झुक गई. सोशल मीडिया पर लोग बात कर रहे हैं कि अगले साल लोकसभा चुनाव होने वाला है. इससे बीजेपी को लग रहा है कि अगर पहलवान यूं ही विरोध करते रहे, तो इसका असर बीजेपी के वोटर्स पर पड़ेगा. लोग ये भी बोल रहे हैं कि हरियाणा में होने वाला विधानसभा चुनाव भी इसका बड़ा कारण है.
यदि संजय सिंह को निलंबित नहीं किया जाता तो, इससे बीजेपी को हरियाणा विधानसभा चुनाव में भी बहुत नुकसान होता, इसी कारण से खेल मंत्रालय ने पहलवानों की मांग पर संजय सिंह को सस्पेंड कर दिया है. सरकार के इस बड़े फैसले के पीछे की वजह यह भी बताई जा रही है कि डब्ल्यूएफआई की नई बॉडी का पूरा कंट्रोल पुराने लोगों के हाथ में था, जोकि खेल संहिता की पूरी तरह अवहेलना है.
क्या बोले कुश्ती संघ के पूर्व अध्यक्ष बृजभूषण
बीजेपी सांसद और कुश्ती संघ के पूर्व अध्यक्ष बृजभूषण शरण सिंह ने रविवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस करके तमाम सवालों के जवाब दिए. गोंडा में रेसलिंग चैंपियनशिप कराने के सवाल का जवाब देते हुए उन्होंने कहा, 'हर फेडरेशन के लोगों ने हाथ खड़ा कर दिया कि हम इसे नहीं चला सकते हैं. 15-20 साल के बच्चों का भविष्य खराब न हो इसलिए इस टूर्नामेंट को नंदनीनगर में कराने का फैसला किया गया. चार दिन में टूर्नामेंट कराना था. देश के 25 के 25 फेडरेशनों ने हाथ खड़े कर दिए और 31 दिसंबर तक यह टूर्नामेंट कराना था.
मैं कुश्ती से ले चुका हूं संन्यास
मैंने 12 साल में कैसा काम किया उसका मूल्यांकन मेरा काम करेगा. मैं कुश्ती से संन्यास ले चुका हूं. अब ये चुने हुए लोग अपना फैसला लेंगे. मेरा लोकसभा का चुनाव आ रहा है, उसकी तैयारी करनी है. अब जो नई फेडरेशन आ रही है वो तय करेगी कि उसे कोर्ट जाना है या सरकार से बात करनी है. उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक तरीके से ही सुप्रीम कोर्ट की निगरानी पर सरकार के आदेश से नई बॉडी का चुनाव हुआ है.
अब क्या करना है और क्या नहीं, ये नई बॉडी करेगी तय
अब क्या करना है, क्या नहीं, ये नई बॉडी को तय करनी है. मैं नए पदाधिकारियों से चाहूंगा कि वो अपने ऑफिस का चुनाव कर लें. संजय सिंह भूमिहार हैं और मैं क्षत्रिय हैं, दोनों में दोस्ती तो हो सकती हैं. यौन शोषण के आरोपों पर बृजभूषण ने कहा कि 'वो 11 महीने से ऐसा कह रहे हैं कहने दीजिए, मामला कोर्ट में है. इसमें लगातार राजनीति हो रही है. 11 महीने से मैं ये झेल रहा हूं. साक्षी ने भी संन्यास ले लिया, हमने भी संन्यास ले लिया, बात खत्म... मेरे पास बहुत काम है. मैं अपना काम करूंगा और अपना चुनाव देखूंगा.
फ्लाइट में था..., निलंबन पर क्या बोले संजय सिंह
संजय सिंह ने कहा है कि उन्होंने अभी पूरा आदेश न हीं पढ़ा है, पहले पढ़ेंगे, उसके बाद कुछ कहेंगे. निलंबित WFI अध्यक्ष ने कहा कि मैं फ्लाइट में था. मुझे अभी तक कोई पत्र नहीं मिला है. पहले मुझे पत्र देखने दीजिए, उसके बाद ही मैं कोई टिप्पणी करूंगा.
साक्षी मलिक ने कहा- मुझे अभी तक लिखित में कुछ नहीं मिला
रविवार को इस मामले पर मीडिया से बातचीत करते हुए साक्षी मलिक ने कहा कि, मैंने अभी तक लिखित में कुछ भी नहीं देखा है. मुझे नहीं पता कि केवल संजय सिंह को निलंबित किया गया है या पूरी संस्था को निलंबित कर दिया गया है. हमारी लड़ाई सरकार से नहीं थी. हमारी लड़ाई महिला पहलवानों के लिए है. मैंने संन्यास की घोषणा कर दी है लेकिन मैं चाहती हूं कि आने वाले पहलवानों को न्याय मिले.
कुश्ती संघ का अध्यक्ष महिला को बनाए जाने की मांग
साक्षी मलिक समेत कई पहलवानों की पहले से ही मांग है कि कुश्ती संघ का अध्यक्ष किसी पुरुष को नहीं बल्कि महिला को बनाया जाए. पहलवानों का कहना है कि अगर फिर से पुरुष को ही डब्ल्यूएफआई का अध्यक्ष बनाया गया, तो लड़कियों को परेशान किया जाएगा. उनका शोषण किया जाएगा, इस कारण से पहलवान मांग कर रहे हैं कि इस बार किसी महिला को अध्यक्ष बनाया जाए, ताकि महिला पहलवानों के साथ छेड़छाड़ या फिर किसी भी प्रकार की अप्रिय घटना नहीं हो. लेकिन पहलवानों की एक नहीं सुनी गई थी और अध्यक्ष भी संजय सिंह को बना दिया गया था. इसके अलावा पूरे संघ में एक भी महिला को शामिल नहीं किया गया था. हालांकि अब सभी को सस्पेंड कर दिया गया है. ऐसे में पहलवानों की मांग है कि अब संजय सिंह को निलंबित करने के बाद किसी महिला को कुश्ती संघ का अध्यक्ष बनाया जाए.