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बजट 2026 का बड़ा फैसला: शेयर बायबैक टैक्स में बदलाव से छोटे निवेशकों को राहत, अब कम टैक्स में मिलेगा ज्यादा फायदा

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने शेयर बायबैक (Share Buyback) पर टैक्स लगाने के तरीके में बदलाव का ऐलान किया, जिस पर अब आयकर विभाग ने स्थिति साफ कर दी है. आयकर विभाग के अनुसार, नए नियमों से खासतौर पर छोटे और रिटेल निवेशकों को फायदा होगा. यह बदलाव अक्टूबर 2024 से लागू डिविडेंड आधारित टैक्स सिस्टम को खत्म कर दोबारा कैपिटल गेन सिस्टम की ओर लौटाता है.

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Budget 2026: केंद्रीय बजट 2026 में शेयर बाजार से जुड़े निवेशकों के लिए एक अहम बदलाव किया गया है. वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने शेयर बायबैक (Share Buyback) पर टैक्स लगाने के तरीके में बदलाव का ऐलान किया, जिस पर अब आयकर विभाग ने स्थिति साफ कर दी है. आयकर विभाग के अनुसार, नए नियमों से खासतौर पर छोटे और रिटेल निवेशकों को फायदा होगा. यह बदलाव अक्टूबर 2024 से लागू डिविडेंड आधारित टैक्स सिस्टम को खत्म कर दोबारा कैपिटल गेन सिस्टम की ओर लौटाता है.

क्या होता है शेयर बायबैक?
सेंट्रल बोर्ड ऑफ डायरेक्ट टैक्सेज (CBDT) के मुताबिक, जब कोई कंपनी अपने ही शेयर शेयरधारकों से वापस खरीदती है, तो उसे शेयर बायबैक कहा जाता है. आम भाषा में समझें तो कंपनी अपने कुछ शेयर बाजार से खरीदकर खत्म (कैंसिल) कर देती है. इससे बाजार में कुल शेयरों की संख्या घटती है, जिससे प्रति शेयर कमाई (EPS) बढ़ सकती है और प्रमोटर्स की हिस्सेदारी भी मजबूत होती है.

बजट 2026 में क्या बदला?
अब तक शेयर बायबैक से मिलने वाली रकम को डिविडेंड इनकम माना जाता था. यानी निवेशकों को इस पूरी रकम पर अपने इनकम टैक्स स्लैब के हिसाब से टैक्स देना पड़ता था, जो 30% तक हो सकता था. बजट 2026 में वित्त मंत्री ने ऐलान किया कि अब शेयर बायबैक पर टैक्स दोबारा कैपिटल गेन के तौर पर लगेगा. आयकर विभाग ने बताया कि बायबैक असल में शेयर बेचने जैसा ही है, इसलिए इसे कैपिटल गेन के रूप में टैक्स करना ज्यादा तार्किक है.

पुराना सिस्टम क्यों समस्या बन गया था?
1 अक्टूबर 2024 से लागू डिविडेंड टैक्स सिस्टम में निवेशकों को बायबैक की पूरी रकम पर टैक्स देना पड़ता था, चाहे उन्होंने शेयर कितने में खरीदा हो. सरकार ने यह सुविधा दी थी कि शेयर खरीदने की कीमत को कैपिटल लॉस के तौर पर दिखाया जा सकता है, क्योंकि बायबैक के बाद शेयर खत्म हो जाता है. लेकिन दिक्कत यह थी कि कई छोटे निवेशकों के पास कोई और कैपिटल गेन नहीं होता था, जिससे वे इस नुकसान को एडजस्ट कर सकें. नतीजा यह हुआ कि कई बार असल मुनाफा न होने के बावजूद टैक्स देना पड़ता था.

कैपिटल गेन की गणना कैसे होगी:
बायबैक कीमत – शेयर खरीदने की कीमत = कैपिटल गेन

  • उदाहरण के तौर पर, अगर किसी निवेशक ने शेयर ₹100 में खरीदा और कंपनी ने उसे बायबैक में ₹150 में खरीदा, तो ₹50 कैपिटल गेन माना जाएगा.
  • अगर शेयर 12 महीने से ज्यादा रखा गया है, तो यह लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन होगा और इस पर 12.5% टैक्स लगेगा.
  • अगर 12 महीने से कम समय के लिए रखा गया है, तो यह शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन होगा और इस पर 20% टैक्स लगेगा.
  • यह दरें डिविडेंड टैक्स की तुलना में काफी कम हैं, जिससे छोटे निवेशकों को सीधा फायदा होगा.


प्रमोटर्स के लिए क्या हैं नियम?
सरकार ने प्रमोटर्स के लिए सख्त टैक्स नियम बनाए रखे हैं ताकि बायबैक का गलत इस्तेमाल न हो.
भारतीय प्रमोटर्स पर लगभग 22% टैक्स लगेगा.
विदेशी प्रमोटर्स पर करीब 30% टैक्स लगेगा.

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