Monsoon
Monsoon
What is Monsoon: भारत के लोग मॉनसून के आने का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं. मॉनसून के आने पर झमाझम बारिश होती है. मौसम एकदम सुहावना हो जाता है. भारत में सबसे पहले दक्षिण-पश्चिम मॉनसून 1 जून को केरल तट पर पहुंचता है, इसलिए केरल को मॉनसून का प्रवेश द्वार कहा जाता है. केरल में मॉनसून का स्वागत एक पर्व की तरह किया जाता है.
इस बार मॉनसून आने में देरी हुई है. भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने 4 जून 2026 को केरल में मॉनसून पहुंचने की संभावना व्यक्त की है. हम आज आपको बता रहे हैं कि आखिर मॉनसून क्या है, भारत में यह कैसे आता है और क्यों हर जगह अलग-अलग बारिश होती है. आपको मालूम हो कि हमारे देश में मॉनसून सिर्फ मौसम तक सीमित नहीं है, बल्कि यह हमारी अर्थव्यवस्था की रीढ़ भी है. हमारे देश की बड़ी आबादी खेती पर निर्भर है और अच्छी बारिश सीधे फसलों की पैदावार को प्रभावित करती है.
मॉनसून शब्द का क्या है अर्थ
आपको मालूम हो कि मॉनसून शब्द अरबी शब्द मौसिम से बना है. इसका अर्थ मौसमी हवाएं होता है. एक प्रख्यात लेखक और विद्वान अल-मसूदी ने सबसे पहले मॉनसून शब्द का इस्तेमाल अपनी किताब में किया था. उन्होंने अपनी किताब में लिखा था कि इन हवाओं का इस्तेमाल ऊर्जा के स्रोत के तौर पर भी किया जाता है. मॉनसून शब्द का प्रयोग मौसमी रूप से बदलते पैटर्न से होने वाली बारिश के चरण को समझने लिए किया जाता है.
क्या है मॉनसून
मॉनसून मौसमी हवाओं की एक प्रणाली है, जो बारिश का कारण बनती है. अरब सागर की ओर से भारत के दक्षिण-पश्चिम तट पर आने वाली हवाओं को मॉनसून कहते हैं. ये मौसमी हवाएं भारत में ही नहीं बल्कि पाकिस्तान और बांग्लादेश में भी भारी बारिश कराती हैं. ये ऐसी मौसमी हवाएं होती हैं, जो दक्षिणी एशिया क्षेत्र में जून से सितंबर तक यानी 4 महीने तक सक्रिय रहती हैं. मॉनसूनी हवाएं गर्मी के मौसम में समुद्र से जमीन की ओर आती हैं. ये हवाएं समुद्र के जल से उत्पन्न जल वाष्प को सोख लेती हैं और पृथ्वी पर आते ही ऊपर उठती हैं और बारिश करती हैं.
क्या है प्री-मॉनसून
प्री-मॉनसून बारिश को मैंगो शावर भी कहते हैं. वर्नल इक्विनॉक्स के बाद जैसे ही सूर्य कर्क रेखा की ओर बढ़ता है पूरे भारत में तापमान बढ़ने लगता है. इसी समय प्री-मॉनसून सीजन की शुरुआत होती है. भारत मौसम विज्ञान विभाग के अनुसार प्री-मॉनसून मार्च से मई तक रहता है. इस अवधि में होने वाली बारिश को प्री-मॉनसून बारिश कहते हैं.
दो शाखाओं में विभाजित हो जाती हैं मॉनसूनी हवाएं
बंगाल की खाड़ी और अरब सागर में पहुंचने के बाद मॉनसूनी हवाएं दो शाखाओं में विभाजित हो जाती हैं. एक शाखा अरब सागर की तरफ से मुंबई, गुजरात, राजस्थान होते हुए आगे बढ़ती हैं तो दूसरी शाखा बंगाल की खाड़ी से पश्चिम बंगाल, बिहार, पूर्वोत्तर भारत होते हुए हिमालय से टकराकर गंगीय क्षेत्रों की ओर मुड़ जाती हैं. इस तरह से जुलाई के पहले सप्ताह तक पूरे देश में झमाझम बारिश होने लगती है.
भारत में कितने प्रकार को होता है मॉनसून
हमारे देश में मॉनसून दो प्रकार के होत है. पहला समर मॉनसून और दूसरा विंटर मॉनसून. समर मॉनसून की शुरुआत जून और सितंबर के बीच होती है. यह मॉनसून देश के दक्षिण-पश्चिम क्षेत्रों को प्रभावित करता है. जुलाई के अंत में मॉनसून उत्तर भारत तक पहुंचता है. समर मानसून को साउथवेस्ट मॉनसून भी कहा जाता है. उधर, अक्टूबर और दिसंबर में आने वाले मॉनसून को विंटर मॉनसून कहा जाता है. यह मॉनसून तमिलनाडु और आंध्र प्रदेश जैसे राज्यों में बारिश करता है जो नॉर्थईस्ट ट्रेड विंड्स की वजह से होता है.
मॉनसून में आखिर कैसे होती है बारिश
हिंद महासागर में गर्मी के मौसम में जब सूर्य विषुवत रेखा (Equator) के ठीक ऊपर होता है, तब मॉनसून बनता है. इस प्रक्रिया में गर्म होकर समुद्र का तापमान 30 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच जाता है. इस दौरान धरती का तापमान 45-46 डिग्री सेल्सियस होता है. ऐसी स्थिति में हिंद महासागर के दक्षिणी हिस्से में मॉनसूनी हवाएं सक्रिय हो जाती हैं. ये हवाएं आपस में क्रॉस करते हुए Equator पार कर एशिया की तरफ बढ़ने लगती हैं. इसी दौरान समुद्र के ऊपर बादलों के बनने की प्रक्रिया शुरू होती है. विषुवत रेखा पार करके हवाएं और बादल बारिश करते हुए बंगाल की खाड़ी और अरब सागर का रुख करते हैं. इस दौरान देश के तमाम हिस्सों का तापमान समुद्र तल के तापमान से अधिक होता है. ऐसी स्थिति में हवाएं समुद्र से जमीनी हिस्सों की ओर बहने लगती हैं. ये हवाएं समुद्र के जल के वाष्पन से पैदा होने वाली वाष्प को सोख लेती हैं और धरती पर आते ही ऊपर उठती हैं और बारिश करती हैं.
मॉनसून आ गया यह कैसे होता है तय
भारतीय मौसम विज्ञान विभाग मॉनसून आने की घोषणा करता है. मॉनसून की घोषणा सिर्फ बारिश देखकर नहीं की जाती. इसके लिए मौसम विभाग कई वैज्ञानिक मानकों का विश्लेषण करता है जैसे हवाओं की दिशा, बादलों की स्थिति, नमी का स्तर और वर्षा की मात्रा. जब ये सभी परिस्थितियां अनुकूल हो जाती हैं, तभी आधिकारिक रूप से मॉनसून के आगमन की घोषणा की जाती है. भारतीय मौसम विभाग की ओर से देश में मॉनसून आने की घोषणा तब की जाती है जब केरल, लक्षद्वीप और कर्नाटक में मॉनूसन की शुरुआत की घोषणा करने वाले 8 स्टेशनों में लगातार दो दिनों तक कम से कम 2.5 मिमी बारिश हो. इस स्थिति में IMD मॉनसून आने की जानकारी देता है.
मॉनसून के दौरान कितनी बारिश सामान्य
भारतीय मौसम विभाग के मुताबिक यदि बारिश लॉन्ग पीरियड एवरेज (LPA) के 90-95% के बीच होती है तो इसे सामान्य से कम कहा जाता है. LPA 96%-104% हो तो इसे सामान्य बारिश कहा जाता है. LPA यदि 104% से 110% के बीच है तो इसे सामान्य से ज्यादा बारिश कहते हैं. 110% से ज्यादा को एक्सेस बारिश कहा जाता है. 90% से कम बारिश को सूखा पड़ना कहा जाता है. आपको मालूम हो कि देशभर में सालभर जितनी बारिश होती है, उसका 70% पानी दक्षिण-पश्चिम मॉनसून के दौरान बरसता है.
केरल में पहुंचने के बाद कैसे पूरे भारत में आगे बढ़ता है मॉनसून
भारतीय मौसम विभाग ने 4 जून के केरल में मॉनसून पहुंचने की संभावना व्यक्त की है. इसके बाद अगले 72 घंटों में मॉनसून तेजी से आगे बढ़ेगा और कर्नाटक के तटीय इलाकों, तमिलनाडु के कुछ हिस्सों और पूर्वोत्तर राज्यों को कवर करना शुरू कर देगा. केरल पहुंचने के बाद मॉनसून कितनी रफ्तार से आगे बढ़ेगा, यह इस बात पर निर्भर करता है कि क्या बंगाल की खाड़ी में कोई कम दबाव का क्षेत्र बनता है, जो उसे खींचकर तेजी से उत्तर की ओर ले जाए. अरब सागर से आने वाली मॉनसूनी हवाएं उत्तर की ओर बढ़ते हुए 10 जून तक मुंबई पहुंचती हैं. 10 जून तक गोवा तक पहुंचने का अनुमान है. तेलंगाना और आंध्र प्रदेश में मॉनसून आमतौर पर 10-12 जून तक आता है, इस बार भी यही अनुमान है. मॉनसून मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में 15-18 जून के आसपास पहुंच सकता है.
राजस्थान, उत्तर प्रदेश, दिल्ली, हरियाणा, पंजाब और उत्तराखंड में मॉनसून सामान्य तौर पर 25 जून से लेकर जुलाई के पहले हफ्ते तक आता है. इस बार भी इसी समय आने की उम्मीद है. उससे पहले इन राज्यों में प्री-मानसून के चलते बारिश होने की संभावना है. बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल और ओडिशा में मॉनसून 12-15 जून के आसपास प्रवेश कर सकता है. मौसम विभाग के मुताबिक बंगाल की खाड़ी वाली शाखा भी सक्रिय हो रही है, जो पूर्वी और पूर्वोत्तर राज्यों में पहले ही बारिश ला सकती है. मॉनसून जून के पहले सप्ताह तक असम आ जाता है. इसके बाद हिमालय से टकराने के बाद हवाएं पश्चिम की ओर मुड़ जाती हैं. मध्य जून तक अरब सागर से बहने वाली हवाएं सौराष्ट्र, कच्छ और मध्य भारत के प्रदेशों में फैल जाती हैं. इसके बाद बंगाल की खाड़ी और अरब सागर हवाएं फिर एकसाथ होकर बहने लगती हैं और पश्चिमी उत्तर प्रदेश, हरियाणा, पंजाब, पूर्वी राजस्थान में बारिश शुरू करा देती हैं. दिल्ली में मॉनसून कई बार पूर्वी दिशा से आता है और बंगाल की खाड़ी के ऊपर से बहने वाली धारा का हिस्सा होता है. कई बार दिल्ली में यह पहली बौछार अरब सागर के ऊपर से बहने वाली धारा का हिस्सा बनकर दक्षिण दिशा से आती है. आधी जुलाई गुजरते-गुजरते मॉनसून कश्मीर और देश के बाकी बचे हुए हिस्सों में भी फैल जाता है. हालांकि, तब तक इसकी नमी काफी कम हो चुकी होती है.