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मिशन 360 से कितनी दूर है बीजेपी? सियासी मंथन तेज, 19 जुलाई को सर्वदलीय बैठक

संसद का मानसून सत्र 20 जुलाई से शुरू हो रहा है. इससे पहले बीजेपी सियासी मंथन में जुट गई है. पार्टी मिशन 360 को कामयाब बनाने में जुटी है. लोकसभा में दो-तिहाई बहुमत के लिए सरकार को तमाम कोशिशों के बावजूद 6 सांसदों की और जरूरत पड़ेगी. सरकार ने 19 जुलाई को सर्वदलीय बैठक बुलाई है.

PM Modi and Amit Shah PM Modi and Amit Shah

संसद का मानसून सत्र 20 जुलाई से शुरू हो रहा है. इससे पहले दिल्ली में सियासी गतिविधियां तेज हो गई हैं. एक तरफ भारतीय जनता पार्टी लगातार बैठकों का दौर चला रही है, वहीं दूसरी ओर कांग्रेस ने भी अपने सांसदों और वरिष्ठ नेताओं की बैठक बुलाई है. पिछले एक सप्ताह के दौरान बीजेपी नेतृत्व ने कई अहम बैठकें की हैं. इनमें सबसे महत्वपूर्ण बैठक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आवास पर हुई, जिसमें बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और संगठन महामंत्री बी.एल. संतोष मौजूद रहे. सूत्रों के मुताबिक, इन बैठकों का मुख्य उद्देश्य मानसून सत्र की रणनीति तैयार करना है.

बीजेपी का सियासी मंथन-
हालांकि, प्रधानमंत्री आवास पर हुई बैठक में बी.एल. संतोष की मौजूदगी इस बात का भी संकेत मानी जा रही है कि जल्द ही बीजेपी के नए राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन की टीम का ऐलान हो सकता है. सूत्रों के अनुसार, नई राष्ट्रीय टीम को लेकर पिछले कुछ दिनों से संगठन के भीतर व्यापक स्तर पर चर्चा चल रही है. विभिन्न राज्यों से संभावित पदाधिकारियों के नाम मांगे गए हैं और इन्हीं नामों में से नई टीम का गठन किए जाने की संभावना है.

राजनीतिक सूत्रों का कहना है कि प्रधानमंत्री आवास पर हुई बैठक में केवल संगठनात्मक बदलावों पर ही चर्चा नहीं हुई, बल्कि मानसून सत्र के दौरान सरकार की रणनीति, विपक्ष के संभावित रुख और संसद में पेश किए जाने वाले विधेयकों पर भी विस्तार से मंथन हुआ. इन्हीं चर्चाओं के बीच सबसे अधिक चर्चा परिसीमन (Delimitation) और महिला आरक्षण से जुड़े संभावित विधेयक को लेकर है.

सदन में सरकार की स्थिति मजबूत-
सरकारी सूत्रों का दावा है कि सरकार इन मुद्दों पर आगे बढ़ सकती है. उनका तर्क है कि मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियों में सरकार पहले की तुलना में अधिक मजबूत स्थिति में दिखाई दे रही है, जबकि विपक्ष अपेक्षाकृत कमजोर नजर आ रहा है. सूत्रों के मुताबिक, कुछ क्षेत्रीय दलों का रुख भी सरकार के लिए अहम साबित हो सकता है. 

चर्चा है कि 22 सांसदों वाली डीएमके जैसे दल कुछ मुद्दों पर सरकार का समर्थन कर सकते हैं. बीजेपी के एक वरिष्ठ नेता का कहना है कि डीएमके का राजनीतिक रुख कांग्रेस से अलग हो सकता है और कई मुद्दों पर वह कांग्रेस के विपरीत निर्णय ले सकती है. यदि ऐसा होता है और तृणमूल कांग्रेस से अलग हुए एनसीपीआई के 20 सांसदों के साथ-साथ डीएमके के 22 सांसदों का भी समर्थन सरकार को मिलता है, तो संसद में सरकार की स्थिति और मजबूत हो सकती है.

लोकसभा में एनडीए के पास कितने सांसद?
यदि मौजूदा आंकड़ों को देखें तो एनडीए के पास फिलहाल लगभग 293 सांसद हैं. यदि इसमें एनसीपीआई के 20 और डीएमके के 22 सांसद जुड़ते हैं, तो यह संख्या करीब 335 तक पहुंच सकती है. इसके अलावा सरकार को समय-समय पर वाईएसआरसीपी के 4 सांसदों और एक निर्दलीय सांसद का भी समर्थन मिलता रहा है. ऐसे में यह संख्या लगभग 340 तक पहुंच सकती है.

हाल ही में महाराष्ट्र की राजनीति में भी बड़ा बदलाव देखने को मिला है. उद्धव ठाकरे गुट के छह सांसदों के एकनाथ शिंदे के साथ आने के बाद यदि इन्हें भी एनडीए के समर्थन में जोड़ा जाए तो गठबंधन की ताकत करीब 346 सांसदों तक पहुंच सकती है. 

अगर भविष्य में शरद पवार की पार्टी के 8 सांसद भी परिसीमन विधेयक जैसे किसी मुद्दे पर सरकार का समर्थन करते हैं, तो एनडीए का आंकड़ा बढ़कर 354 सांसदों तक पहुंच सकता है.

दो-तिहाई के लिए 6 सांसदों की जरूरत-
फिलहाल लोकसभा की प्रभावी सदस्य संख्या 540 है. तीन सांसदों के निधन के बाद यह संख्या 543 से घटकर 540 रह गई है. इस आधार पर लोकसभा में दो-तिहाई बहुमत के लिए 360 सांसदों का समर्थन आवश्यक होगा. ऐसे में यदि सरकार 354 के आंकड़े तक पहुंचती है, तो उसे दो-तिहाई बहुमत हासिल करने के लिए केवल छह और सांसदों के समर्थन की जरूरत होगी.

ए्क्शन में बीजेपी नेतृत्व-
इसी राजनीतिक गणित के बीच पिछले कुछ दिनों में बीजेपी नेतृत्व की गतिविधियां तेज रही हैं. गृह मंत्री अमित शाह ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मुलाकात की. इसके अलावा उन्होंने महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे, मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस तथा हाल ही में शिंदे गुट में शामिल हुए छह सांसदों से भी अलग-अलग बैठकें की हैं. सरकार ने 19 जुलाई को सर्वदलीय बैठक बुलाई है. इस बैठक में सरकार विपक्ष और अन्य राजनीतिक दलों को मानसून सत्र के एजेंडे से अवगत कराएगी और बताएगी कि इस बार संसद में कौन-कौन से विधेयक पेश किए जाएंगे. इसके बाद 20 जुलाई से मानसून सत्र की शुरुआत होगी, जबकि 21 जुलाई को एनडीए संसदीय दल की बैठक बुलाई गई है, जिसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी संबोधित करेंगे.

कुल मिलाकर, मानसून सत्र से पहले दिल्ली में राजनीतिक हलचल लगातार बढ़ रही है. लगातार हो रही बैठकों और बदलते राजनीतिक समीकरणों ने इस बार के संसद सत्र को बेहद महत्वपूर्ण बना दिया है. अब सभी की नजर इस बात पर है कि सरकार संसद में कौन से बड़े विधेयक लाती है और उन्हें पारित कराने के लिए किस तरह की राजनीतिक रणनीति अपनाती है. उससे पहले दिल्ली में राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं. एक तरफ भारतीय जनता पार्टी लगातार बैठकों का दौर चला रही है, वहीं दूसरी ओर कांग्रेस ने भी अपने सांसदों और वरिष्ठ नेताओं की बैठक बुलाई है.

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