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What is UGC: क्या है UGC, जिसे लेकर देशभर में मच रहा बवाल, क्यों हो रहा विरोध, जानें पूरी बात!

UGC Equality Regulations 2026: यूजीसी की स्थापना 28 दिसंबर 1953 को हुई थी. इसका फुल फॉर्म विश्वविद्यालय अनुदान आयोग है, इसे अंग्रेजी में यूनिवर्सिटी ग्रांट कमीशन के रूप में जाता है. UGC देश में उच्च शिक्षा की गुणवत्ता, समान अवसर और नियमन से जुड़ी शीर्ष संस्था है.

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What is UGC: विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) द्वारा लागू किए गए ‘उच्च शिक्षण संस्थानों में समानता को बढ़ावा देने के नियम, 2026’ को लेकर जहां एक तरफ इसे सामाजिक न्याय की दिशा में ऐतिहासिक कदम बताया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर देश के कई हिस्सों में इसका विरोध भी शुरू हो गया है. इस नियम को लेकर अगड़ी जातियों से जुड़े संगठनों और प्रभावशाली धार्मिक व सामाजिक नेताओं ने सवाल खड़े किए हैं. यूपी चुनाव 2027 से पहले यह मुद्दा अब राजनीतिक रंग भी लेने लगा है. हालांकि, अब भी हममें से कई ऐसे लोग हैं तो UGC क्या है, यह नहीं जानते. तो चलिए आपको डिटेल में बताते हैं कि आखिर UGC है क्या.

क्या है UGC
यूजीसी की स्थापना 28 दिसंबर 1953 को हुई थी. इसका फुल फॉर्म विश्वविद्यालय अनुदान आयोग है, इसे अंग्रेजी में यूनिवर्सिटी ग्रांट कमीशन के रूप में जाता है. UGC देश में उच्च शिक्षा की गुणवत्ता, समान अवसर और नियमन से जुड़ी शीर्ष संस्था है. यूजीसी का मुख्य कार्य विश्वविद्यालयों और कॉलेजों को मान्यता देना, उन्हें अनुदान प्रदान करना और शिक्षा में समानता और उत्कृष्टता सुनिश्चित करना है. यूजीसी का मुख्यालय नई दिल्ली में बहादुर शाह जफर मार्ग पर स्थित है, साथ ही दो अतिरिक्त ब्यूरो 35, फिरोजशाह रोड और दिल्ली विश्वविद्यालय के दक्षिण परिसर से भी संचालित होते हैं. यूजीसी के वर्तमान अध्यक्ष विनीत जोशी (Vineet Joshi) हैं, जिन्हें अप्रैल 2025 में प्रोफेसर एम. जगदीश कुमार के सेवानिवृत्त होने के बाद यह अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है.

UGC का नया रेगुलेशन?
दरअसल, 15 जनवरी 2026 से देशभर के विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में ‘उच्च शिक्षण संस्थानों में समानता को बढ़ावा देने के नियम, 2026’ लागू कर दिया गया. इस नियम का मकसद था कि, कैंपस में जातिगत भेदभाव को रोका जा सके और और सभी वर्गों के लिए समान, सुरक्षित और सम्मानजनक शैक्षणिक माहौल हो.

अब तक उच्च शिक्षण संस्थानों में जातिगत भेदभाव से जुड़ी शिकायतें मुख्य रूप से SC और ST समुदाय तक सीमित मानी जाती थीं. लेकिन नए रेगुलेशन के तहत OBC वर्ग को भी स्पष्ट रूप से जातिगत भेदभाव की श्रेणी में शामिल कर लिया गया है. इसका मतलब यह है कि अब ओबीसी छात्र, शिक्षक और कर्मचारी भी अपने साथ होने वाले उत्पीड़न या भेदभाव की शिकायत आधिकारिक रूप से दर्ज करा सकेंगे.

क्यों हो रहा विरोध
विरोध करने वालों का कहना है कि नए दिशा- निर्देशों में शिकायत दर्ज कराने का अधिकार केवल कुछ वर्गों तक सीमित कर दिया गया है, जिसमें केवल अनुसूचित जाति और अन्य पिछड़ा वर्ग के लोग ही शिकायत कर सकते हैं.  विरोध करने वालों का आरोप है कि इस कानून का दुरुपयोग हो सकता है और इसके जरिए अगड़ी जातियों के छात्रों और शिक्षकों को झूठे मामलों में फंसाया जा सकता है.

नए एक्ट के नियम 3(सी) में जाति-आधारित भेदभाव की परिभाषा और प्रक्रिया ऐसी है कि यह सामान्य वर्ग के छात्रों/शिक्षकों के खिलाफ पूर्वाग्रही हो सकती है. इसमें झूठी शिकायतों पर कोई सजा का प्रावधान नहीं है, जिससे दुरुपयोग का खतरा है. इन लोगों का तर्क है कि यह ढांचा उनके खिलाफ भेदभाव का कारण बन सकता है.

यहां देखें आंकड़े?
UGC द्वारा संसद और सुप्रीम कोर्ट में पेश आंकड़ों के अनुसार पिछले 5 सालों में जातिगत भेदभाव की शिकायतों में 118.4% की वृद्धि हुई है. साल 2019-20 में 173 शिकायतें दर्ज हुई थीं, तो वहीं 2023-24 में  संख्या बढ़कर 378 हो गई. 704 विश्वविद्यालयों और 1553 कॉलेजों से कुल 1160 शिकायतें सामने आईं. 

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