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Indian Railways Waiting List Rules: कौन सी वेटिंग टिकट होती है सबसे पहले कंफर्म... जान लें रेलवे का नियम, भविष्य में आएगी जानकारी काम

त्योहारों का सीजन शुरू होते ही ट्रेनों में कंफर्म सीट मिलना एक बड़ी चुनौती बन जाता है. टिकट बुकिंग विंडो खुलते ही कुछ ही मिनटों में ट्रेनें फुल हो जाती हैं और यात्रियों को वेटिंग टिकट थमा दिया जाता है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि आपकी टिकट पर लिखे GNWL, RLWL, PQWL या TQWL जैसे कोड यह तय करते हैं कि आपकी सीट कंफर्म होगी या नहीं?

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त्योहार का समय शुरू हो चुका है. लोग घर जाने के लिए टिकट बुक करेंगे. घर जाने वालों की संख्या इतनी होती है कि कई ट्रेनों में अलोटमेंट शुरू होते ही सिटें वेटिंग में चली जाती है. हालांकि, वेटिंग भी एक तरह की नहीं होती. दरअसल 4 तरह की वेटिंग लिस्ट बनती है, जिसे कंफर्म होने के चांसेस भी अलग-अलग होते हैं. ऐसे में टिकट पर GNWL, RLWL, PQWL या TQWL जैसे कोड दिखाई दे सकते हैं. इन सभी वेटिंग टिकटों के कंफर्म होने की संभावना एक जैसी नहीं होती. रेलवे में अलग-अलग वेटिंग लिस्ट के लिए अलग प्राथमिकता तय होती है, इसलिए टिकट बुक करते समय इनका मतलब जानना भविष्य में आपके काम आ सकता है.

GNWL की कंफर्म होने की संभावना सबसे ज्यादा
अगर आपकी टिकट पर GNWL लिखा है, तो इसके कंफर्म होने की संभावना बाकी वेटिंग लिस्ट की तुलना में ज्यादा होती है. GNWL यानी जनरल वेटिंग लिस्ट आमतौर पर ट्रेन के शुरुआती स्टेशन से यात्रा करने वाले यात्रियों को मिलती है. इस वेटिंग को सबसे पहली प्राथमिकता दी जाती है. इसकी वजह यह है कि मुख्य कोटे से होने वाली कैंसिलेशन का फायदा GNWL को मिलता है, जिससे यह बाकी वेटिंग की तुलना में जल्दी आगे बढ़ सकती है.

RLWL का नंबर दूसरे स्थान पर
RLWL यानी रिमोट लोकेशन वेटिंग लिस्ट उन यात्रियों के लिए होती है, जो ट्रेन के बीच में आने वाले किसी प्रमुख स्टेशन से सफर शुरू करते हैं. ऐसे स्टेशनों के लिए अलग छोटा कोटा निर्धारित होता है. यही वजह है कि RLWL की कंफर्म होने की संभावना GNWL से कम रहती है. इसे वेटिंग क्लियर होने की प्राथमिकता में दूसरा स्थान मिलता है.

PQWL में कंफर्मेशन के चांस कम
PQWL का मतलब पूल्ड कोटा वेटिंग लिस्ट है. यह छोटे स्टेशनों के बीच यात्रा करने वाले यात्रियों के लिए जारी होती है और एक खास पूल्ड कोटे में चलती है. इसमें सीट तभी आगे बढ़ती है या कंफर्म होती है, जब उसी पूल्ड रूट से किसी यात्री का टिकट कैंसिल होता है. इसलिए इसकी कंफर्म होने की संभावना GNWL और RLWL के मुकाबले कम रहती है.

TQWL को सबसे कम प्राथमिकता
TQWL यानी तत्काल कोटा वेटिंग लिस्ट को कंफर्म होने की सबसे कम संभावना वाली वेटिंग माना जाता है. यह तत्काल टिकट बुकिंग के दौरान सीट उपलब्ध न होने पर मिलती है. इसमें टिकट तभी कंफर्म होता है, जब तत्काल कोटे से किसी यात्री का टिकट कैंसिल हो. सामान्य टिकट कैंसिल होने का फायदा TQWL को नहीं मिलता. इसलिए इसकी प्राथमिकता सबसे आखिरी यानी चौथे नंबर पर होती है.

वेटिंग टिकट RAC में पहुंची तो कर सकते हैं सफर
अगर आपकी वेटिंग टिकट आगे बढ़कर कंफर्म हो जाती है तो बहुत बढ़िया, लेकिन अगर RAC हो जाती है, तो आपको ट्रेन में यात्रा की अनुमति मिलती है. RAC में साइड लोअर बर्थ दूसरे यात्री के साथ शेयर करनी पड़ सकती है, लेकिन यात्री ट्रेन में सफर कर सकता है. यानी वेटिंग टिकट के RAC में बदलने पर यात्रा का रास्ता खुल जाता है. वहीं, केवल वेटिंग रहने पर ऑनलाइन टिकट के साथ ट्रेन में सफर नहीं किया जा सकता. लेकिन अगर लक की बात करें तो आपकी टिकट किसी भी चरण में कंफर्म हो सकती है. हालांकि अगर रूल की बात करें तो रेलवे की पहली प्राथमिकता GNWL वेटिंग टिकट ही होती है. 

क्या वेटिंग वाले कर सकते हैं ट्रेन में यात्रा
कन्फर्म टिकट:
आराम से यात्रा कर सकते हैं.

RAC टिकट: ट्रेन में यात्रा कर सकते हैं. उन्हें साइड की सीट दूसरे यात्री से शेयर करनी पड़ सकती है. हालांकि साथ वाला व्यक्ति अपनी टिकट कैंसिल करता है तो आपको पूरी सिट मिल सकती है.

ऑनलाइन बुक की गई ई-टिकट: अगर चार्ट बनने के बाद भी टिकट वेटिंग में रह गई, तो वह ऑटोमैटिक कैंसिल हो जाती है और पैसा आपके अकाउंट में आ जाता है. कानूनी तौर पर, ऐसे टिकट पर ट्रेन में यात्रा करने की अनुमति नहीं मिलती है.

काउंटर से लिया गया वेटिंग टिकट: इसके नियम अलग हैं, ऐसे यात्री यात्रा तो कर सकते हैं, लेकिन उन्हें सिट नहीं दी जाती है. लेकिन ट्रेन खुलने पर अगर कोई बर्थ खाली रह जाती है तो आपके सिट के कंफर्म होने के चांसेस बढ़ जाते हैं. 
 

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