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Justice Abhijit Gangopadhyay: अफसर की नौकरी छोड़ शुरू की वकालत, फिर बने जज, अब करेंगे सियासत... इस्तीफा देकर राजनीति में जाने वाले हाई कोर्ट के पहले जज बनेंगे अभिजीत गंगोपाध्याय

जस्टिस अभिजीत गंगोपाध्याय ने बंगाल सिविल सेवा में अधिकारी के तौर पर नौकरी की शुरुआत की थी. लेकिन बाद उन्होंने नौकरी छोड़ दी और कलकत्ता हाईकोर्ट में वकालत करने लगे. 10 साल वकालत करने के बाद साल 2018 में उनको कलकत्ता हाई कोर्ट का एडिशनल जज बनाया गया. इसके दो साल बाद साल 2020 में उनको स्थाई जज के तौर पर प्रमोशन मिला.

Justice Abhijit Gangopadhyay Justice Abhijit Gangopadhyay

कलकत्ता हाईकोर्ट (Calcutta High Court) के जज जस्टिस अभिजीत गंगोपाध्याय (Justice Abhijit Gangopadhyay) ने इस्तीफा दे दिया है. अभिजीत गंगोपाध्याय अब सियासत में उतरने की तैयारी कर रहे हैं. बताया जा रहा है कि अभिजीत गंगोपाध्याय बीजेपी (BJP) में शामिल हो सकते हैं. अभिजीत हाईकोर्ट के पहले ऐसे न्यायाधीश हैं, जो इस्तीफा देकर सीधे सियासत में एंट्री लेने जा रहे हैं. कयास लगाए जा रहे हैं कि जस्टिस अभिजीत पश्चिम बंगाल के तामलुक संसदीय क्षेत्र (Tamluk Lok Sabha constituency) से चुनाव लड़ सकते हैं. फिलहाल इस सीट से बीजेपी नेता दिब्येंदु अधिकारी (Dibyendu Adhikari) सांसद हैं.

जस्टिस अभिजीत के अहम फैसले-
जस्टिस अभिजीत गंगोपाध्याय ने जज के तौर पर कई महत्वपूर्ण फैसले सुनाए हैं. जस्टिस अभिजीत ने कलकाता हाईकोर्ट के न्यायाधीश के तौर पर 14 मामलों की जांच सीबीआई (CBI) को सौंपी थी. उन्होंने जून 2021 से 30 जनवरी 2024 तक टीचर भर्ती घोटाले की सुनवाई की. उन्होंने इस मामले की जांच केंद्रीय एजेंसी से कराने का आदेश दिया था. जस्टिस अभिजीत ने 18 मई 2022 को ममता बनर्जी (Mamata Banerjee) के करीबी रहे पार्थ चटर्जी को सीबीआई के सामने हाजिर होने का निर्देश दिया था. जस्टिस ने इस मामले में टीएमसी नेता मानिक भट्टाचार्य को प्राथमिक शिक्षा बोर्ड के अध्यक्ष पद से हटा दिया था.

जस्टिस गंगोपाध्याय ने साल 2022 में ग्रुप डी के दो हजार कर्मचारियों, 10 मार्च को ग्रुप सी के 785 कर्मचारियों और 16 मई को 30 हजार से ज्यादा गैर-प्रशिक्षित टीचरों को बर्खास्त कर दिया था.

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पिछले साल जस्टिस अभिजीत ने एमबीबीएस (MBBS) अभ्यर्थी की रिट याचिका पर सीबीआई जांच का आदेश दिया था. इसमें दावा किया गया था कि जो छात्र अनुसूचित जनजाति वर्ग से नहीं आते थे, उन्होंने फर्जी सर्टिफिकेट का इस्तेमाल करके राज्य के मेडिकल कॉलेजों में प्रवेश लिया था. हालांकि जस्टिस सौमेन सेन और जस्टिस उदय कुमार की बेंच ने इस फैसले पर रोक लगा दी थी.

सितंबर 2023 में कलकत्ता हाईकोर्ट की पुस्तकाकार वार्षिक रिपोर्ट में जस्टिस अभिजीत गंगोपाध्याय के एक फैसले को सर्वश्रेष्ठ करार दिया गया था.

कौन हैं जस्टिस अभिजीत गंगोपाध्याय-
जस्टिस अभिजीत गंगोपाध्याय का जन्म 20 अगस्त 1962 को कोलकाता में हुआ था. उनकी शुरुआती पढ़ाई-लिखाई कोलकाता के मित्र इंस्टीट्यूशन से हुई. उन्होंने शहर के हाजरा लॉ कॉलेज से कानून की पढ़ाई की. पढ़ाई के दौरान उन्होंने बांग्ला शिएटर 'अमित्र चंद्र' में भी काम किया. उन्होंने आखिरी बार साल 1986 में किसी नाटक में काम किया था.

छोड़ दी थी अफसर की नौकरी-
जस्टिस अभिजीत ने बंगाल सिविल सर्विस West Bengal Civil Service (WBCS) में एक क्लास वन अफसर के तौर पर सरकारी नौकरी की शुरुआत की. उनकी पोस्टिंग उत्तर दिनाजपुर में थी. लेकिन उन्होंने नौकरी छोड़ दी और कलकत्ता हाईकोर्ट में एक वकील के तौर पर प्रैक्टिस करना शुरू कर दिया. उन्होंने 10 साल तक वकालत की. जस्टिस अभिजीत गंगोपाध्याय ने साल 2018 के मई महीने में कलकत्ता हाईकोर्ट में एडिशनल जज के तौर पर काम करना शुरू किया. साल 2020 में 30 जुलाई को उनको स्थाई जज बनाया गया. जस्टिस अभिजीत इसी साल रिटायर होने वाले थे. लेकिन इससे पहले ही उन्होंने इस्तीफा दे दिया है.

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