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26 January Desh Bhakti Song: वह गीत नहीं, क्रांति के थे शब्द... इस 26 जनवरी जरूर नजर डालें उन 5 देशभक्ति गानों पर

वह पांच गीत जिसमें दिखाई गई देशभक्ति की असल झलक.

26 January Desh Bhakti song  (AI Generated Image) 26 January Desh Bhakti song (AI Generated Image)

अगर आप सोचते हैं कि पुराने देशभक्ति गाने अंडरेटेड हैं, तो लगता है आपने इन गानों को आज तक सुना ही नहीं और अगर सुना है तो समझा ही नहीं. पुराने देशभक्ति गाने दिल से लिखे जाते थे. अगर आप GenZ हैं और आपने ये गीत नहीं सुने हैं, तो एक बार जरूर इन गीतों पर नजर डालें.

1. जब जीरो दिया मेरे भारत ने
इस गाने के एक-एक शब्द भारत के गुणों का बखान करते हैं. जब पूरी दुनिया भारत के सामर्थ्य पर सवाल उठा रही थी, तब 1970 में आई इस फिल्म ने दुनिया के सामने भारत की एक अलग छवि पेश की. मनोज कुमार का यह गाना उन दिनों काफी प्रचलित था और आज भी इसे सुनते ही रोंगटे खड़े हो जाते हैं.

2. जहां डाल-डाल पर सोने की चिड़िया करती है बसेरा
मोहम्मद रफी द्वारा गाए इस गीत में भारत की अखंडता और सुंदरता का वर्णन किया गया है. इस गाने में 'सोने की चिड़िया' का मतलब है भारत में रहने वाला हर वह इंसान, जिसमें कोई न कोई खूबी है, और इस धरती में छिपी वह धरोहर जिसे कई बार लूटा गया. लेकिन आज भी इसकी चमक रत्ती भर भी कम नहीं हुई. गायक यह कहते हुए बताते हैं कि यह भारत देश हम भारतीयों का है और हमें इस पर गर्व है.

3. दुल्हन चली
'पूर्व में सूरज ने छेड़ी जब किरणों की शहनाई
चमक उठा सिंदूर गगन पर पश्चिम तक लाली छाई'

महेंद्र कपूर ने इस गीत के माध्यम से भारत को एक नवविवाहिता बेटी के रूप में प्रस्तुत किया है, क्योंकि उस वक्त भारत को गुलामी से नई-नई आजादी मिली थी. उन्होंने बताया है कि आजादी के साथ भारत प्रगति की ओर बढ़ रहा है. सूरज की किरणें शहनाई बनकर इस शुभ विदाई का संकेत देती हैं और सिंदूर-सी लाली पूरे आकाश में फैलकर गर्व, आशा और नए आरंभ का भाव जगाती है. इस गाने की शुरुआत में सांप्रदायिक भाईचारे को मनोज कुमार ने अपने अभिनय के जरिए बेहद खूबसूरती से पेश किया है.

4. धर्म जुदा है, जात जुदा है
साहिर लुधियानवी द्वारा रचित इस गीत की पंक्ति यह संदेश देती है कि इंसानों के बीच बनाए गए धर्म और जाति के भेद अलग-अलग हो सकते हैं, लेकिन मानवता सबसे ऊपर है. यह पंक्ति समाज में एकता, भाईचारे और समानता की बात करती है, जहां इंसान को उसकी पहचान से नहीं बल्कि उसके कर्म और इंसानियत से पहचाना जाना चाहिए. आज के समय में यह गीत और भी ज्यादा मायने रखता है.

5. ए मेरे वतन के लोगों
कभी न कभी आपने सोशल मीडिया पर या स्कूल के किसी देशभक्ति समारोह में यह गीत जरूर सुना होगा 'ए मेरे वतन के लोगों, जरा आंख में भर लो पानी.' बहुप्रचलित लता मंगेशकर का यह गीत स्वतंत्रता सेनानियों को समर्पित है. जब वह गाती हैं-

'जब घायल हुआ हिमालय
 खतरे में पड़ी आजादी
जब तक थी सांस लड़े वो 
फिर अपनी लाश बिछा दी'

और

'जब देश में थी दीवाली 
वो खेल रहे थे होली 
जब हम बैठे थे घरों में
वे झेल रहे थे गोली
थे धन्य जवान वो आपने
थी धन्य वो उनकी जवानी
जो शहीद हुए हैं उनकी
जरा याद करो क़ुर्बानी'

इन पंक्तियों को सुनकर आज भी लोगों की आंखें अपने आप नम हो जाती हैं. ये गीत केवल गीत नहीं थे, बल्कि भारत की आत्मा को पढ़ के निचोड़े हुए शब्द थे.