
World Health Day
World Health Day
हर साल 22 अप्रैल को पूरी दुनिया पृथ्वी दिवस (World Earth Day) मनाती है. इसकी शुरुआत 1970 में अमेरिकी सीनेटर जेराल्ड नेल्सन ने की थी. इस दिन का मकसद सिर्फ जागरूकता फैलाना नहीं, बल्कि लोगों को अपनी रोजमर्रा की आदतों पर सोचने के लिए प्रेरित करना भी है.
जाने अनजाने धरती को पहुंचा रहे नुकसान
हम अक्सर मानते हैं कि पर्यावरण को नुकसान बड़ी इंडस्ट्रीज या फैक्ट्रियां पहुंचाती हैं, लेकिन सच यह है कि हमारी छोटी-छोटी आदतें भी धीरे-धीरे धरती पर बड़ा असर डालती हैं. आइए 5 ऐसी आम आदतों को समझते हैं, जिन्हें हम रोज करते हैं और जाने अनजाने में धरती को नुकसान पहुंचाते हैं.
1. जरूरत से ज्यादा AC का इस्तेमाल
राहुल दिल्ली में एक कॉर्पोरेट जॉब करता है. गर्मी शुरू होते ही वह घर और ऑफिस दोनों जगह AC का तापमान 18-20 डिग्री पर सेट कर देता है. उसे लगता है कि इससे ज्यादा ठंडक मिलेगी, लेकिन वह यह नहीं जानता कि इससे बिजली की खपत कई गुना बढ़ जाती है और कार्बन उत्सर्जन भी.
क्या कर सकते हैं- राहुल जैसे लाखों लोग अगर AC को 24-26 डिग्री पर सेट करें, तो न सिर्फ बिजली बचेगी बल्कि पर्यावरण पर दबाव भी कम होगा. साथ ही, पंखे और प्राकृतिक हवा का इस्तेमाल बढ़ाना चाहिए.
2. पूजा सामग्री को नदियों में बहाना
सीमा हर त्योहार और पूजा के बाद फूल-मालाएं और अन्य सामग्री नदी में बहा देती है. उसके लिए यह आस्था का हिस्सा है, लेकिन यही सामग्री पानी को प्रदूषित करती है और जलीय जीवों के लिए खतरा बनती है.

क्या कर सकते हैं- सीमा अगर इन फूलों को अलग इकट्ठा कर कम्पोस्ट बनाए या नगर निगम द्वारा बनाए गए कलेक्शन पॉइंट पर दे, तो यह पर्यावरण के लिए बेहतर होगा. कई जगहों पर इन फूलों से अगरबत्ती और जैविक उत्पाद भी बनाए जा रहे हैं.
3. प्लास्टिक का रोजाना इस्तेमाल
अमित रोज ऑफिस जाते समय रास्ते में पानी की प्लास्टिक बोतल खरीदता है. दिन भर में 2-3 बोतलें इस्तेमाल करना उसकी आदत बन चुकी है. उसे लगता है कि यह छोटा खर्च है, लेकिन वह यह नहीं सोचता कि यह प्लास्टिक सालों तक धरती पर पड़ा रहता है.
क्या कर सकते हैं- अगर अमित रोजाना घर से बाहर निकलते वक्त स्टील की एक बोतल साथ रखे, तो वह रोजाना प्लास्टिक कचरे को काफी कम कर सकता है. यह न सिर्फ पर्यावरण के लिए अच्छा है, बल्कि उसके स्वास्थ्य के लिए भी बेहतर है.
4. खाने की बर्बादी...
नेहा को खाना बनाना और नई-नई डिश ट्राय करना पसंद है. लेकिन अक्सर वह जरूरत से ज्यादा खाना बना लेती है, जो बाद में कूड़ेदान में चला जाता है. यह सिर्फ खाना नहीं, बल्कि उस भोजन को उगाने में लगी मेहनत, पानी और ऊर्जा की भी बर्बादी है.
क्या कर सकते हैं- नेहा अगर अपनी जरूरत के हिसाब से खाना बनाए और बचा हुआ खाना सही तरीके से स्टोर करे या जरूरतमंदों को दे, तो यह बर्बादी कम हो सकती है. साथ ही फूड वेस्ट से कम्पोस्ट बनाना भी घरती के लिए एक अच्छा विकल्प है.

5. बेवजह बिजली और पानी की बर्बादी
संजय को अक्सर कमरे से निकलते समय लाइट और पंखा बंद करना याद नहीं रहता. कई बार वह पानी का नल भी खुला छोड़ देता है. उसे यह छोटी-छोटी बातें लगती हैं, लेकिन यही आदतें लंबे समय में बड़े संसाधन संकट का कारण बनती हैं.
क्या कर सकते हैं- अगर संजय जैसी आदतों में थोड़ा बदलाव लाया जाए जैसे कमरे से निकलते समय स्विच ऑफ करना और पानी का सही उपयोग करना तो बड़ी मात्रा में संसाधनों की बचत हो सकती है.
ये सिर्फ नेहा, संजय, राहुल या सीमा की कहानी नहीं है… ये हम सबकी कहानी है. हमारे घरों की, हमारी रोजमर्रा की आदतों की, उन छोटी-छोटी लापरवाहियों की जिन्हें हम अक्सर नजरअंदाज कर देते हैं. कभी बिना सोचे AC चला देना, कभी पानी बहता छोड़ देना, कभी प्लेट में बचा खाना फेंक देना ये सब इतनी आम बातें हैं कि हमें इनका असर दिखता ही नहीं.
लेकिन सच ये है कि यही छोटी आदतें मिलकर बड़ी तस्वीर बनाती हैं. धरती पर बढ़ता तापमान, घटते संसाधन और प्रदूषण...इन सबकी जड़ कहीं न कहीं हमारी ही लाइफस्टाइल से जुड़ी है.
इन सभी बदलावों के लिए किसी बड़े कदम की जरूरत नहीं है. शुरुआत बहुत छोटी हो सकती है. जैसे घर से निकलते वक्त एक स्विच ऑफ करना, जरूरत के हिसाब से ही खाना बनाना, अपनी पानी की बोतल साथ रखना... ये छोटे-छोटे कदम दिखने में मामूली लगते हैं, लेकिन जब करोड़ों लोग इन्हें अपनाते हैं, तो इनका असर बहुत बड़ा होता है.