बाढ़ और बारिश का कहर पहाड़ से लेकर मैदान तक जारी है. कई इलाके जलमग्न हैं. किसान, दुकानदार, छात्र और मजदूर सभी सैलाब के सितम के शिकार बने हैं. जिला प्रशासन की सूचना पर NDRF, BSF और सेना के जवान बचाव दलों के साथ मौके पर पहुंचे. गुरदासपुर में जवाहर नवोदय विद्यालय के लगभग 400 छात्र और केरल इंटरनेशनल स्कूल के 30 से 40 मजदूर बाढ़ में फंस गए थे, जिन्हें सुरक्षित निकाला गया. हिमाचल के कांगड़ा में अर्नी यूनिवर्सिटी के कैंपस में पानी भरने से 412 विद्यार्थियों और स्टाफ सहित कुल 427 लोगों को रेस्क्यू किया गया. पठानकोट में माधोपुर हेडवर्क्स के गेट चेक कर रहे करीब 50 कर्मचारी फंसे, जिन्हें हेलिकॉप्टर से बचाया गया. छत्तीसगढ़ के सुकमा में 600 से अधिक लोगों को राहत शिविरों में पहुंचाया गया. यहां एक शख्स 29 घंटे तक पेड़ के सहारे बचने का इंतजार कर रहा था, जिसे बचाया गया. एक 160 वर्षीय बुजुर्ग को 26 घंटे बाद रेस्क्यू किया गया. जम्मू-कश्मीर के अखनूर में एक बीएसएफ जवान को भी बाढ़ से सुरक्षित निकाला गया. पानी का बहाव तेज होने के कारण रेस्क्यू ऑपरेशन में कई चुनौतियां आ रही हैं. 'मुश्किल हालात में कभी कभार हौसला पस्त होने लगता है, लेकिन देवदूतों कदम कभी हार नहीं मानता' इन बचाव दलों की जिद है कि मुश्किल में फंसे हर शख्स का रेस्क्यू करके सुरक्षित ठिकानों तक पहुंचाया जाए.