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ऑफबीट

भारत के इस शहर को कहा जाता है 'इत्र की राजधानी', जहां घर-घर से आती है इत्र की खुशबू

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आज के दौर में जहां ज्यादातर परफ्यूम फैक्ट्रियों में मशीनों से बनते हैं, वहीं उत्तर प्रदेश का कन्नौज आज भी सदियों पुराने तरीके से प्राकृतिक अत्तर तैयार करता है. यहां हर खुशबू के पीछे पीढ़ियों का अनुभव और पारंपरिक कारीगरी छिपी है. इसी वजह से कन्नौज को भारत की 'परफ्यूम कैपिटल' कहा जाता है.

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कन्नौज में इत्र बनाने का काम सदियों से किया जा रहा है. यहां कई परिवार ऐसे हैं, जो अपने खास इत्र के नुस्खे और बनाने की तकनीक को एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी तक पहुंचाते हैं. इन पारंपरिक तरीकों की वजह से कन्नौज के अत्तर की पहचान देश ही नहीं, विदेशों तक बनी हुई है.

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फूलों और प्राकृतिक चीजों से तैयार होता है अत्तर
यहां बनने वाले अत्तर में गुलाब, चमेली, केवड़ा और कई तरह के सुगंधित फूलों का इस्तेमाल किया जाता है. इन प्राकृतिक सामग्री से तैयार इत्र अपनी लंबे समय तक टिकने वाली खुशबू के लिए जाना जाता है. यही वजह है कि प्राकृतिक अत्तर आज भी लोगों की पहली पसंद बने हुए हैं.

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आज भी अपनाई जाती है पारंपरिक डिस्टिलेशन तकनीक
कन्नौज के कई इत्र निर्माता आज भी पारंपरिक 'देग-भापका' विधि का इस्तेमाल करते हैं. इस तकनीक में तांबे के बर्तनों में फूलों और अन्य प्राकृतिक सामग्री को धीमी आंच पर पकाकर उनकी खुशबू निकाली जाती है. इसके बाद इस सुगंध को चंदन के तेल में मिलाया जाता है, जिससे इत्र की खुशबू और भी गहरी और लंबे समय तक टिकने वाली बन जाती है.

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मिट्टी का अत्तर है सबसे अनोखी पहचान
कन्नौज की सबसे खास पहचान 'मिट्टी का अत्तर' है. इसे इस तरह तैयार किया जाता है कि इसमें पहली बारिश के बाद सूखी धरती से उठने वाली सोंधी खुशबू महसूस होती है. यह अनोखा अत्तर दुनियाभर में अपनी अलग पहचान रखता है.