Agra News
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उत्तर प्रदेश के आगरा में यूनेस्को की विश्व धरोहर (World Heritage Monument) ताजमहल एक बार फिर सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सवालों के घेरे में है. ताजमहल घूमने आई दक्षिण कोरिया की एक महिला पर्यटक पर बंदर ने हमला कर दिया. हमले में महिला के हाथ में गंभीर चोट आई और खून बहने लगा. हालांकि प्राथमिक इलाज के बाद टूरिस्ट को निजी अस्पताल में भेज दिया गया.
एक घंटे तक नहीं पहुंची एंबुलेंस-
घटना ताजमहल के पूर्वी गेट के बाहर की बताई जा रही है. घायल महिला को पहले प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में प्राथमिक उपचार दिया गया. इसके बाद बैटरी कार से निजी अस्पताल भेजा गया. सबसे चिंताजनक बात यह रही कि ASI की तरफ से सूचना देने के बावजूद करीब एक घंटे तक एंबुलेंस मौके पर नहीं पहुंची. इस दौरान घायल विदेशी पर्यटक इलाज का इंतजार करती रही.
ASI की टीम तुरंत मौके पर पहुंची-
ताजमहल के वरिष्ठ संरक्षण सहायक कलंदर ने फोन पर मौखिक तौर से जानकारी देते हुए बताया कि जैसे ही दक्षिण कोरिया की पर्यटक पर बंदर के हमले की सूचना मिली, एएसआई (ASI) की टीम तुरंत मौके पर पहुंच गई. स्वास्थ्य विभाग की एंबुलेंस को तत्काल बुलाया गया, लेकिन चालक करीब एक घंटे तक मौके पर नहीं पहुंचा.
उन्होंने बताया कि एंबुलेंस चालक की लापरवाही को गंभीर मानते हुए उसके खिलाफ रिपोर्ट बनाकर मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) को कार्रवाई के लिए भेज दी गई है.
ताजमहल कैंपस में बंदरों की भरमार-
विश्व प्रसिद्ध स्मारक ताजमहल में पर्यटकों की सुरक्षा और बंदरों के बढ़ते आतंक को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं. ताजमहल के सेंट्रल टैंक के पानी में बंदरों की भरमार होती है. हमेशा बंदर अटखेलियां करते नजर आते हैं.
ASI ने एक महीने पहले ही लिखा था पत्र-
कलंदर ने पूछने पर यह भी बताया कि ताजमहल परिसर और आसपास बंदरों और कुत्तों की बढ़ती समस्या को लेकर भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) ने करीब एक महीने पहले ही आगरा नगर निगम को पत्र लिखकर स्थिति से अवगत कराया था. पत्र में बंदरों और आवारा कुत्तों को पकड़ने की मांग की गई थी, लेकिन अब तक प्रभावी कार्रवाई नहीं हो सकी है.
विश्व धरोहर ताजमहल हर दिन हजारों भारतीय और विदेशी पर्यटकों की मेजबानी करता है. ऐसे में विदेशी पर्यटक पर बंदर का हमला और उसके बाद समय पर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध न होना न सिर्फ स्थानीय व्यवस्थाओं पर सवाल खड़े करता है, बल्कि देश की पर्यटन छवि पर भी असर डालने वाला मामला माना जा रहा है. अब देखना होगा कि प्रशासन बंदरों के आतंक और स्वास्थ्य सेवाओं की लापरवाही पर क्या ठोस कदम उठाता है.
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