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गैस सिलेंडर की किल्लत से दूल्हे ने बदला मैन्यू, लकड़ी भट्टी पर बनवाए दाल बाफले, मेहमानों ने उठाया लुत्फ

मध्य प्रदेश के भोपाल में गैस सिलेंडर की किल्लत की वजह से एक शादी के रिसेप्शन में मैन्यू बदलना पड़ा. घरवालों ने कई तरह के डिश बनवाने की तैयारी की थी. लेकिन रिसेप्शन से एक दिन पहले तक गैस सिलेंडर नहीं मिला तो पूरा मैन्यू बदल दिया और लकड़ी की भट्टी पर दाल बाफले बनवाया. मेहमानों ने जमकर इस डिश का लुत्फ उठाया.

लकड़ी की भट्टी पर बना खाना लकड़ी की भट्टी पर बना खाना

अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच चल रहे युद्ध की वजह से देश में गैस सिलेंडर की किल्लत हो रहा है. इसका असर देशभर में शादी-विवाह और दूसरे आयोजनों में पड़ रहा है. गैस सिलेंडर नहीं मिल रहा है, जिसकी वजह से लोगों को अपना प्लान बदलना पड़ रहा है. मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में भी गैस सिलेंडर नहीं मिल रहे हैं. जिसका असर शादियों पर पड़ रहा है. गैस सिलेंडर की कमी के चलते एक शादी में मैन्यू बदलना पड़ा. घरवालों ने गैस चूल्हे की जगह लकड़ी की भट्टी पर खाना बनवाना पड़ा.

गैस सिलेंडर की जगह लड़की पर बना खाना-
भोपाल में भी गैस सिलेंडर की कमी हो रही है. लोगों को समय पर सिलेंडर नहीं मिल रहा है. जिससे चलते काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है. फूलमाली समाज की एक शादी में गैस सिलेंडर नहीं मिला तो घरवालों ने पूरा खाना लकड़ी की भट्टी पर बनवाया. घरवालों ने मैन्यू भी बदल दिया और दाल बाफले बनवाए गए. 

1500 लोगों के लिए बना खाना-
रिसेप्शन के एक दिन पहले तक घरवालों ने गैस सिलेंडर लेने की काफी कोशिश की. लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ. गैस सिलेंडर नहीं मिला. इसके बाद रात में घरवालों ने एक बड़ा फैसला किया. घरवालों ने सबसे पहले मैन्यू बदला, उसके बाद गैस सिलेंडर की जगह लकड़ी का इंतजाम किया. घरवालों ने रातों-रात दाल बाफले बनवाने का फैसला किया और उसके लिए सामान का इंतजाम किया. इसके बाद 1200 से 1500 लोगों के लिए भोजन बनवाया गया.

कई तरह का डिश बनाने की थी तैयारी- दूल्हा
यह रिसेप्शन ईटखेड़ी स्थित स्वयंवर मैरिज गार्डन मैं हुआ था. दूल्हे रोहित माली का कहना है कि हमने अपने रिसेप्शन में अलग-अलग प्रकार के मैन्यू बनवाने की तैयारी की थी. जिसमें करीब 18 से 20 गैस सिलेंडर का इस्तेमाल होना था. लेकिन गैस की किल्लत के कारण हमें समय पर गैस सिलेंडर नहीं मिला और सबकुछ कैंसिल करना पड़ा. इसके साथ ही सिर्फ दाल बाफले बनवाने का फैसला करना पड़ा.

(धर्मेंद्र साहू की रिपोर्ट)

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