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Inspiring: हाथ फ्रैक्चर होने के बाद लोगों ने दी संन्यास लेने की सलाह...लेकिन किसी की नहीं सुनी, एक Dentist मां ने Powerlifting के जरिए यूं पूरा किया अपना सपना

कई बार हम कोशिश करते हैं लेकिन चुनौतियों से डरकर पीछे हट जाते हैं. लेकिन आपकी जीत तभी होती है जब आप कठिनाइयों से बिना डरें उनका डटकर सामना करें. आज की कहानी ऐसी ही एक महिला (पावरलिफ्टर आरती अरुण) की है जिसने कभी हार नहीं मानी.

Arathi Arun Powerlifter Arathi Arun Powerlifter
हाइलाइट्स
  • मेरे लिए गर्व का क्षण - आरती

  • हाथ में हुआ फ्रैक्चर

लहरों से डरकर नौका पार नहीं होती, कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती. ये लाइनें बिल्कुल सटीक बैठती हैं पावरलिफ्टिंग के जुनून के साथ आगे बढ़ रहीं दो बच्चों की मां आरती अरुण (Arathi Arun) पर. पेशे से डेंटिस्ट डॉ. आरती अरुण को पावरलिफ्टिंग का Mary Kom कहा जाता है. आरती का जन्म एक रूढ़िवादी मध्यम वर्गीय परिवार में हुआ था. उनके पिता कंस्ट्रक्शन बिजनेस का काम करते हैं और मां हाउसवाइफ हैं. 

18 साल की उम्र में शादी
आरती को स्पोर्ट्स में शुरू से ही इंटरेस्ट था और वो बैटमिंटन खेला करती थीं. नेशनल्स में उनका सेलेक्शन हो गया लेकिन स्पोर्ट्स कॉस्ट्यूम पहनकर बाहर खेलने को लेकर घरवालों ने इजाजत नहीं दी. आरती को अपना खेल वहीं रोकना पड़ा और कहा कि इंजीनियर या डॉक्टर बनो. 18 साल की कम उम्र में उनकी शादी एक ऑर्थोडॉन्टिस्ट डॉ. ए.वी. अरुण से हो गई और शादी के बाद वह चेन्नई आ गईं. आरती  के पति उनकी पढ़ाई को लेकर काफी सपोर्टिव थे. आरती ने 1997 में अपना बीडीएस (डेंटल) पूरा किया और एक डेंटल सर्जन बन गईं. वह चेन्नई के अन्ना नगर में स्माइल सेंटर मल्टीस्पेशलिटी डेंटल क्लिनिक की डायरेक्टर बन गईं.

आरती कहती हैं, ''जीवन मेरे लिए हमेशा संघर्षपूर्ण और चुनौतियों से भरा रहा है, लेकिन मैंने हमेशा अपना रास्ता सफलतापूर्वक बनाया.''

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लोग Bodyshaming करते थे
डेंटल सर्जन बनने के बाद, किसी भी अन्य मां की तरह, उनकी पूरी दुनिया उनके घर, परिवार और क्लिनिक के इर्द-गिर्द घूमने लगी. हालांकि, तब भी उन्हें लग रहा था कि  उनकी लाइफ से कुछ तो मिसिंग हैऔर वो उस गायब हिस्से की तलाश करती रहीं. पॉवरलिफ्टिंग के साथ उनकी दोबार जर्नी साल 2015 में शुरू हुई. दूसरे बच्चे के जन्म के बाद उनका वेट काफी ज्यादा बढ़ गया था. दूसरे बच्चे के बाद उनका वजन 80 किलो हो गया था. उनके साइज की ड्रेस नहीं मिल रही थी.  जब वो बड़े शाइज की ड्रेस पहनतीं तो लोग बॉडीशेमिंग करने लगे. वो वेट लूज करने के लिए जिम जानें लगीं. जिम में उन्होंने देखा कि वो लोग भी जो लीन बॉडी के थे बड़ी आसानी से हैवी वेट उठा ले रहे थे. उन्हें इस पर आश्चर्य हुआ क्योंकि उन्हें अभी तक यही लगता था कि वेट उठाने के लिए आपकी बॉडी भी वैसे ही bulky होनी चाहिए. आरती को वहां से पता चला कि ये सब एक ट्रिक होती है और कोई भी ट्रेनर के अंडर इंस्ट्रक्शन को फॉलो करके इसे कर सकता है. 

कहां से मिला मोटिवेशन
उन्होंने पावरलिफ्टिंग के बारे में जब जिम में लोगों से जानना चाहा तो उन्हें यह कहकर टाल दिया गया कि यह पुरुषों का खेल है इसलिए बच्चों वाली या फिर विवाहित महिला इसके लिए परफेक्ट नहीं है. लेकिन आरती अपनी जिद पर अड़ी रहीं और उन्होंने यह विचार नहीं छोड़ा. आरती यह साबित करना चाहती थीं कि न तो शादी और न ही वजन बढ़ना महिलाओं के लिए बाधा बन सकता है. वह कहती है, "मैंने उनसे कहा कि यह बात केवल हम ही जानते हैं कि मैं एक महिला हूं और शादीशुदा हूं. लेकिन रॉड (एक्सरसाइज करने वाली) को कुछ भी पता नहीं होगा. वह मेरे साथ समान व्यवहार करेगी. उन्होंने यूट्यूब पर पावरलिफ्टिंग के वीडियो देखना शुरू किया, खासकर महिला वैश्विक चैंपियनों के. इससे उनमें आत्मविश्वास आया और उन्होंने इसे करने का फैसला किया.

शुरुआत में यह एक तंग रस्सी पर चलने जैसा था क्योंकि आरती की उम्र 40 साल थी और उनके दो बच्चे हो चुके थे. हालांकि आरती के संकल्प और दृढ़ विश्वास के आगे कुछ भी नहीं टिका और इसके बाद से उन्होंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा. आरती खुद को भाग्यशाली बताते हुए कहती हैं कि मैं बहुत खुश हूं कि मुझे ऐसा परिवार, पति और बच्चे मिले जिन्होंने मेरा पूरा सहयोग किया. जब भी वह उदास महसूस करती थीं तो वे हमेशा उनका हौसला बढ़ाते और उन्हें आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित करते. 

कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा
आरती को दिन में 4 से 5 घंटे अभ्यास करना पड़ता था. इस दौरान उन्होंने जंक फूड से पूरी तरह से दूरी बनाई और एक्सरसाइज के लिए टाइम मैनेज किया. तीन साल की कड़ी मेहनत और विश्वास के दम पर आरती ने साल 2018 में National Championship में अपना पहला ब्रांज मेडल जीता. इसके बाद उन्होंने 2019 के एशियन चैंपियनशिप और कॉमनवेल्थ में गोल्ड जीता.

मेरे लिए गर्व का क्षण - आरती
आरती ने कोलकाता में आयोजित फेडरेशन कप में एक और स्वर्ण पदक जीता. उनका सपना तब सच हुआ जब उन्हें हांगकांग में आयोजित एशियाई पावरलिफ्टिंग चैंपियनशिप में देश का प्रतिनिधित्व करने के लिए चुना गया. भारतीय टीम में 9 महिलाएं और 25 पुरुष थे और आरती तमिलनाडु से अकेली व्यक्ति थीं. आरती के लिए भारतीय तिरंगे रंग की जर्सी पहनना और भारतीय टीम के साथ उड़ान भरना गर्व का क्षण था.

आरती ने इस प्रतियोगिता में अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया और अपने देश के लिए स्वर्ण पदक जीता. वह कहती हैं, "जब मैं विक्ट्री स्टैंड पर खड़ी थी और राष्ट्रगान के साथ भारतीय ध्वज को लहराते देखा, तो मेरे रोंगटे खड़े हो गए और उस एक मिनट ने मेरी चार साल की कड़ी मेहनत और प्रशिक्षण को सार्थक बना दिया." इसके बाद जीतना तो जैसे आरती की आदत बन गई. बाद में उन्होंने नवंबर 2019 में नई दिल्ली में नेशनल बेंच प्रेस चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक जीता और मई 2020 में इंडोनेशिया में होने वाली एशियाई पावरलिफ्टिंग चैंपियनशिप में भारत का प्रतिनिधित्व करने के लिए चुनी गईं. लेकिन इसे रिशिड्यूल किया गया क्योंकि तब तक दुनिया भर में कोविड महामारी फैल चुकी थी.

हाथ में फ्रैक्चर हो गया
आरती को कोयंबटूर में होने वाली एशियाई चैंपियनशिप 2022 के लिए चुना गया था और वह एशियाई रिकॉर्ड बनाने के अपने सपने को पूरा करने की उम्मीद कर रही थीं. लेकिन दुर्भाग्य से चैंपियनशिप के महज 20 दिन पहले  प्रेक्टिस सेशन के दौरान 170 किलोग्राम वजन उठाते समय आरती के दाहिने हाथ में फ्रैक्चर हो गया. इसके लिए उनकी तुरंत सर्जरी करवानी पड़ी. उनके दाहिने हाथ में 12 स्क्रू के साथ एक टाइटेनियम प्लेट जोड़कर फ्रैक्चर का इलाज किया गया. इस सर्जरी के बाद उन्हें खेल से संन्यास लेने की सलाह दी गई क्योंकि भविष्य में उनके लिए भारी वजन उठाना मुश्किल होगा.

वर्ल्ड चैंपियनशिप की तैयारी
इससे आरती काफी उदास हुईं लेकिन उनका जुनून उन्हें शांत बैठने नहीं दे रहा था. वो डिप्रेशन में जाने लगी थीं जब उनकी बेटी ने कहा, 'मां आप कर सकते हो'. आरती को इससे हौसला मिला और वो फिर से धीरे-धीरे मूवमेंट करने लगीं. इसके लिए उन्होंने फिजियोथेरेपी की भी मदद ली. उन्होंने एक बार फिर चेन्नई जिला पावरलिफ्टिंग एसोसिएशन में भाग लिया और सर्जरी के ठीक 6 महीने बाद दिसंबर 2022 में स्वर्ण पदक जीता.

आरती लागातार प्रैक्टिस में लगी हुई हैं और वर्ल्ड चैंपियनशिप की तैयारी कर रही हैं. इसके अलावा वो भारतीय ताइक्वांडो महासंघ के ICC (महिला एथलीटों की सुरक्षा के लिए आंतरिक शिकायत समिति) की भी सदस्य हैं.