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धोखा मिलने पर टूटें नहीं, बस याद कर लें चाणक्य की ये 3 बातें... रुलाने वाला खुद आपके पैरों में गिरेगा

जानें चाणक्य ने धोखे को लेकर क्या कहा है, जिसको अपना कर आप रुलाने वाले को भी रुला देंगे.

चाणक्य चाणक्य

आज से हजारों साल पहले जन्में चाणक्य, आज भी भटके हुए युवाओं को मार्ग दिखाने का काम करते हैं. उनकी नीतियां और उनके उद्देश्य आज भी बड़े-बड़े इंस्टीट्यूशन में एक विषय के रूप में बच्चों को पढ़ाया जाता है. 375 BCE से 350 BCE के बीच में जन्में चाणक्य ने अपने बुद्धि और नीति से मौर्य साम्राज्य की स्थापना भी की. उनकी राजनीतिक समझ ने देखते-देखते एक चरवाहा को राजा की गद्दी पर बैठा दिया. उनका ज्ञान आज भी लोगों को जीवन जीने की शैली सिखाता है.  

अगर आपके साथ भी कुछ ऐसा हुआ है, जिससे आपका दिल और दिमाग परेशान है? दरअसल ऐसे लोग हमेशा सोचते रहते हैं कि हमारे साथ ही ऐसा क्यों होता है, हमेशा हमें मदद के बदले धोखा क्यों मिलता है. यह समस्या आज की नहीं है, यह समस्या लाखों साल पुरानी है. हजारों साल से लोग इस मनोवृत्ति से जुझ रहे हैं. 

तो आज हम आपको अर्थशास्त्री और नीति-शास्त्र के ज्ञाता चाणक्य की वह नीति बताने जा रहे हैं, जिसको अपनाकर आप लोगों के दिए धोके से आसानी से बाहर निकल सकते हैं. उन्होंने धोखे को ले कर बहुत गहरी बात कही है, ये बातें आज के समय में भी उतनी ही प्रभावशाली है. 


मनुष्य के स्वभाव को लेकर चाणक्य ने क्या कहा
उन्होंने कहा है कि हर व्यक्ति अच्छाई को भावना से नहीं, बल्कि अपने लाभ और स्वार्थ के नजरिये से देखता है. जब तक मनुष्य को आपसे फायदा मिलेगा, तब तक वह आपसे जुड़ा रहेगा और अच्छा व्यवहार करेगा. लेकिन जैसे ही स्वार्थ खत्म हो जाता है, उस मनुष्य का व्यवहार आपके साथ खराब हो जाएगा और वह व्यक्ति आपको कमजोर समझ लेगा. चाणक्य ने ये भी कहा है कि अत्यधिक उपकार करने वाला व्यक्ति भी अंत में घृणा का पात्र बन जाता है. 


ज्यादा उपलब्ध रहने को लोग कमजोरी समझ लेते हैं
माना आप किसी व्यक्ति को अत्यधिक प्रेम करते हैं, लेकिन हर चीज का एक दायरा होता है. कई बार हमेशा मौजूद रहना लोगों के मन में ये बात डाल देता है कि इस इंसान के साथ कितना भी बुरा कर लो, ये यहीं रहेगा और आप भी उस व्यक्ति से निकल नहीं पाते है. ऐसे लोग ही सबसे ज्यादा चोट पहुंचा देते हैं.  


दया करें लेकिन अपने आत्मसम्मान को दाव पर न लगाएं
जहां केवल दया होता है, वहां कई बार व्यक्ति का सम्मान नहीं होता. कई बार लोग दया या उदारता दिखाते हुए लोगों का तिरस्कार भी सह लेते हैं, जो कि गलत है. इसके लिए चाणक्य ने कहा है कि इंसान को न ज्यादा कठोर होना चाहिए और न ज्यादा नरम. लोगों के हिसाब से अपने बर्ताव में संतुलन रखें. 


जानें कि कौन है भरोसे के लायक 
हर मुस्कराता चेहरा आपका शुभचिंतक नहीं होता, चाणक्य ने इस बात को याद रखने को कहा है. कुछ लोग आपकी अच्छाई को केवल अपने फायदे के लिए इस्तेमाल करते हैं. अगर आपके जीवन में भी कोई ऐसा है, तो तुरंत ऐसे लोगों से दूरी बना लें.  

 

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