At What Age Should Children Learn Swimming
At What Age Should Children Learn Swimming
आजकल माता-पिता बच्चों को सिर्फ पढ़ाई तक सीमित नहीं रखना चाहते, बल्कि उन्हें खेल, संगीत और अन्य हुनर भी सिखाना चाहते हैं. हालांकि कई बार यह समझना मुश्किल हो जाता है कि बच्चे को किस उम्र में कौन-सी एक्टिविटी शुरू करानी चाहिए. अगर बहुत जल्दी शुरुआत की जाए तो बच्चा उसे समझ नहीं पाता और देर होने पर सीखने की गति प्रभावित हो सकती है. कुछ चीजें कम उम्र में शुरू की जा सकती हैं, जबकि कुछ के लिए बच्चे का शारीरिक और मानसिक विकास होना जरूरी होता है. ऐसे में सही उम्र का चुनाव बेहद जरूरी हो जाता है. चाइल्ड साइकेट्रिस्ट डॉ. गायत्री राठौड़ ने बताया है कि स्विमिंग, कराटे, फुटबॉल, सिंगिंग और म्यूजिकल इंस्ट्रूमेंट्स जैसी गतिविधियों को शुरू करने की सही उम्र क्या है और किन बातों का ध्यान रखना चाहिए.
स्विमिंग की शुरुआत कब करें?
डॉ. गायत्री राठौड़ बताती हैं कि बच्चों को पहले साल से ही फॉर्मल स्विमिंग लेसन दिए जा सकते हैं. हालांकि, सही तरीके से तैरने के स्ट्रोक्स सिखाने के लिए 4 साल या उससे अधिक उम्र बेहतर मानी जाती है. इस उम्र में बच्चे सुरक्षा संबंधी निर्देशों को बेहतर तरीके से समझ पाते हैं.
जिमनास्टिक के लिए सही उम्र
बच्चों को 3 से 4 साल की उम्र में बेसिक जिमनास्टिक्स सिखाई जा सकती है. हालांकि, इसके लिए प्रशिक्षित कोच, उचित निगरानी और सुरक्षित माहौल होना जरूरी है. इससे बच्चों का शरीर लचीला बनता है और उनका संतुलन भी बेहतर होता है.
फुटबॉल और क्रिकेट कब शुरू करें?
ऑर्गनाइज्ड स्पोर्ट्स जैसे फुटबॉल और क्रिकेट की शुरुआत 5 से 6 साल की उम्र में करना बेहतर माना जाता है. इस उम्र तक बच्चों का कोआर्डिनेशन और शारीरिक संतुलन काफी विकसित हो जाता है, जिससे वे खेल के नियमों और तकनीकों को आसानी से समझ पाते हैं.
सिंगिंग और म्यूजिकल इंस्ट्रूमेंट्स
बच्चों को 3 साल की उम्र से सिंगिंग सिखाई जा सकती है. वहीं, पियानो, गिटार या अन्य म्यूजिकल इंस्ट्रूमेंट्स सीखने के लिए 5 से 6 साल की उम्र अधिक उपयुक्त मानी जाती है. इस समय बच्चों की एकाग्रता और हाथों का नियंत्रण बेहतर होता है.
कराटे सीखने की सही उम्र
कराटे जैसी मार्शल आर्ट्स की शुरुआत 5 से 6 साल की उम्र में करनी चाहिए. इस उम्र में बच्चे निर्देशों को बेहतर ढंग से समझते हैं और उन पर अमल भी कर पाते हैं. साथ ही उनका फोकस और अनुशासन भी विकसित होने लगता है.
हर बच्चा होता है अलग
डॉ. राठौड़ का कहना है कि हर बच्चे का विकास अलग-अलग गति से होता है. इसलिए केवल उम्र के आधार पर फैसला नहीं लेना चाहिए. बच्चे की रुचि, तैयारी और उस गतिविधि में मिलने वाला आनंद भी उतना ही महत्वपूर्ण है. सही समय पर सही एक्टिविटी शुरू करने से बच्चे का सर्वांगीण विकास बेहतर तरीके से हो सकता है.
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