मुनक नहर
मुनक नहर
दिल्ली की मुनक नहर… एक ऐसी नहर, जो लंबे वक्त से कचरे और गंदगी की वजह से चर्चा में रही है. लेकिन इसी नहर को साफ करने की जिम्मेदारी एक युवक ने अपने हाथों में ली है. इनमें एक नाम है विनय दास का, जो पिछले कई सालों से बच्चों और युवाओं की टीम के साथ मुनक नहर की सफाई में जुटे हैं. कहीं प्लास्टिक का कचरा, कहीं पूजा सामग्री, तो कहीं नहर के किनारे जमा मलबा. इसी गंदगी के बीच पहुंचती है विनय दास की टीम… हाथों में दस्ताने, कंधों पर कचरे से भरे बोरे और मकसद सिर्फ एक...मुनक नहर को साफ करना.
मूर्तियों के विसर्जन ने किया परेशान
विनय बताते हैं कि इस मुहिम की शुरुआत तब हुई, जब उन्होंने बड़ी संख्या में देवी-देवताओं की मूर्तियों को मुनक नहर में विसर्जित होते देखा. यह देखकर उनका मन काफी परेशान हुआ. इसके बाद उन्होंने नहर की सफाई का बीड़ा उठाने का फैसला किया और यहीं से इस मिशन की शुरुआत हुई. सफाई का यह काम सिर्फ किनारे से कचरा उठाने तक सीमित नहीं है. टीम नहर के आसपास जमा प्लास्टिक, पूजा सामग्री, मलबे और दूसरे कचरे को निकालती है.
एक साल में 1600 से ज्यादा बच्चे-युवा जुड़े
विनय दास की इस मुहिम की शुरुआत करीब एक साल पहले हुई थी. शुरुआत में करीब 150 बच्चे उनके साथ जुड़े थे. आज इस अभियान से 1600 से ज्यादा बच्चे और युवा जुड़ चुके हैं. इनमें करीब 350 एक्टिव वॉलंटियर्स हैं. ये वॉलंटियर्स अलग-अलग ग्रुप में काम करते हैं और मुनक नहर के किनारे सफाई अभियान चलाते हैं. अब तक टीम करीब 3 किलोमीटर के हिस्से में सफाई अभियान चला चुकी है. विनय की टीम अब तक मुनक नहर से 2500 से ज्यादा मूर्तियां निकाल चुकी है. हाल ही में गणेश विसर्जन के बाद भी विनय और उनकी टीम ने मुनक नहर से कई मूर्तियां निकालीं.
कचरे में मिला 30-35 किलो का शिवलिंग
मुनक नहर की सफाई के दौरान टीम को कई बार ऐसी चीजें भी मिलीं, जिन्हें देखकर लोग हैरान रह गए. हाल ही के एक अभियान में कचरे के बीच करीब 30 से 35 किलो का शिवलिंग मिला. इसके अलावा सैकड़ों धार्मिक मूर्तियां और पूजा सामग्री भी नहर से निकाली गई. टीम इन चीजों को नहर से बाहर निकालकर आसपास के इलाके की सफाई करती है.
विनय खुद भी एक बेहद साधारण परिवार से आते हैं. उनके पिता एक प्यून थे. विनय का बचपन जेजे कॉलोनी में बीता है. विनय बताते हैं कि पढ़ाई करने के लिए उन्होंने 7 साल की उम्र से ही काम करना शुरू कर दिया था. इसके बावजूद उन्होंने नहर की सफाई के इस अभियान को अपने जीवन का मिशन बना लिया.
कांच, सुई और केमिकल के बीच होती है सफाई
मुनक नहर की सफाई का काम जितना आसान दिखाई देता है, असल में उतना ही जोखिम भरा है. कचरे के बीच कांच, सुई और दूसरे खतरनाक सामान तक मिल जाते हैं. कई बार सफाई के दौरान विनय और उनकी टीम के सदस्यों को चोटें भी लगी हैं. एक बार कचरे से भरे बोरे से निकले केमिकल की वजह से विनय के हाथों में छाले तक पड़ गए थे. इसके बावजूद विनय की मुहिम रुकी नहीं. वह लगातार बच्चों और युवाओं के साथ मिलकर नहर की सफाई में जुटे हुए हैं.
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