Pranjal Mittal and Anya Mittal
Pranjal Mittal and Anya Mittal
आज के दौर में बच्चों का काफी समय मोबाइल और सोशल मीडिया पर गुजर रहा है लेकिन धनबाद के धैय्या की रहने वाली दो बहनों ने अपनी प्रतिभा और संस्कारों के दम पर एक खास पहचान बनाई है. प्रांजल मित्तल और आन्या मित्तल ने श्रीमद्भगवद्गीता के श्लोकों का नियमित पाठ करते हुए विश्व स्तर पर अपनी पहचान कायम की है. दोनों बहनों की इस उपलब्धि को Guinness World Records में दर्ज किया गया है. इस खास सफलता के लिए उन्हें आधिकारिक प्रमाण पत्र के साथ गोल्ड मेडल भी प्रदान किया गया है. इस उपलब्धि के पीछे परिवार के संस्कार और उनकी मां प्रीति अग्रवाल की अहम भूमिका रही है.
किया गया सम्मानित
प्रांजल मित्तल और आन्या मित्तल ने श्रीमद्भगवद्गीता के श्लोकों के नियमित पाठ को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाया और इसी साधना ने उन्हें विश्व स्तर पर पहचान दिलाई. गीता के श्लोकों के पाठ में उनकी निरंतरता और लगन का परिणाम है कि दोनों बहनों की भागीदारी Guinness World Records में दर्ज हुई है. इस उपलब्धि के लिए उन्हें आधिकारिक प्रमाण पत्र और गोल्ड मेडल से सम्मानित किया गया है.
सिर्फ 5 मिनट में पूरा किया पाठ
प्रांजल और आन्या की इस सफलता में उनके परिवार के संस्कारों की बड़ी भूमिका रही है. खास तौर पर उनकी मां प्रीति अग्रवाल ने दोनों बेटियों को नियमित रूप से गीता पाठ के लिए प्रेरित किया और उनका हौसला बढ़ाया. आज दोनों बहनों की यह उपलब्धि सिर्फ उनके परिवार के लिए ही नहीं, बल्कि धनबाद के लिए भी गर्व का विषय है. आधुनिक दौर में जहां बच्चों का रुझान तेजी से दूसरी चीजों की ओर बढ़ रहा है, वहीं इन दोनों बहनों ने भारतीय संस्कृति, संस्कार और श्रीमद्भगवद्गीता के प्रति अपनी आस्था को अपनी पहचान बनाया है. प्रांजल और आन्या की कहानी यह संदेश देती है कि अगर संस्कार, अनुशासन और निरंतर मेहनत साथ हों, तो छोटी-सी शुरुआत भी दुनिया के मंच तक पहुंच सकती है. प्रांजल मित्तल और प्रांजल मित्तल ने बताया कि उन्होंने श्रीमद्भगवद्गीता के 15वें अध्याय का पाठ करीब पांच मिनट में पूरा किया. गीता के श्लोकों का सही उच्चारण हो, इसके लिए उन्होंने लगातार अभ्यास किया. प्रांजल अपनी सफलता का श्रेय माता-पिता को देती हैं. उनका कहना है कि मां बचपन से ही उन्हें गीता का पाठ सिखाती थीं. घर में गीता के श्लोकों की ऑडियो रिकॉर्डिंग चलती रहती थी और वह लगातार उन्हें सुनती थीं. इसी तरह सुनते-सुनते श्लोक याद होते चले गए.
श्रीमद्भगवद्गीता सिर्फ धार्मिक ग्रंथ नहीं
आन्या मित्तल ने कहा कि गीता का पाठ उनके लिए कोई नई चीज नहीं है. उन्होंने बचपन से ही अपनी मां से गीता के श्लोक सीखना शुरू कर दिया था. मां को देखकर उनमें भी गीता पढ़ने और उसके श्लोकों का सही उच्चारण करने की रुचि पैदा हुई.आज यही अभ्यास उनकी पहचान बन चुका है. प्रीति अग्रवाल का कहना है कि श्रीमद्भगवद्गीता में 700 श्लोक हैं और यह सिर्फ धार्मिक ग्रंथ नहीं, बल्कि जीवन जीने की सीख भी देती है. उनका मानना है कि बच्चों को गीता से जोड़ने से उनमें अनुशासन, संस्कार और अपनी संस्कृति के प्रति समझ विकसित होती है.पिता सुनील अग्रवाल के कहते हैं कि प्रांजल और आन्या की उपलब्धि आज उन अभिभावकों के लिए भी एक उदाहरण है, जो अपने बच्चों को आधुनिक शिक्षा के साथ-साथ भारतीय संस्कृति और संस्कारों से जोड़ना चाहते हैं. मोबाइल और सोशल मीडिया के दौर में इन दोनों बहनों ने गीता के श्लोकों को अपना साथी बनाया और अपनी मेहनत के दम पर विश्व स्तर पर पहचान बनाई. धैय्या की गलियों से शुरू हुई यह यात्रा अब Guinness World Records तक पहुंच चुकी है.