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Dussehra 2022: कई खूबियों के बावजूद बुराई का प्रतीक माना जाता है रावण, जानिए दशानन के बारे में ये रोचक तथ्य

dussehra 2022: पौराणिक पात्रों में रावण को सबसे सशक्त खलनायक माना जाता है लेकिन निश्चित रूप से वह इससे कहीं अधिक है. यदि रावण में अधर्म अधिक बलवान न होता तो वह देवलोक का भी स्वामी बन सकता था. वह वेदों का ज्ञाता था. दशहरे के अवसर पर चलिए आपको बताते हैं रावण से जुड़ी कुछ रोचक बातें...

रावण के किरदार में अरविंद त्रिवेदी रावण के किरदार में अरविंद त्रिवेदी
हाइलाइट्स
  • भगवान राम के लिए किया था यज्ञ

  • दशानन का जन्म ही बुराई के लिए हुआ था

देशभर में आज दशहरा मनाया जा रहा है. जगह-जगह रावण के पुतले फूंके जा रहे हैं. दशहरा यानी विजयादशमी का पर्व बुराई पर अच्छाई की जीत के प्रतीक के रूप में मनाया जाता है. दशहरा के दिन अस्त्र-शस्त्र की पूजा का विधान है. मान्यता है कि विजयादशमी पर शस्त्र पूजा से शत्रुओं पर विजय प्राप्त होती है.

पौराणिक पात्रों में रावण को सबसे सशक्त खलनायक माना जाता है लेकिन निश्चित रूप से वह इससे कहीं अधिक है. यदि रावण में अधर्म अधिक बलवान न होता तो वह देवलोक का भी स्वामी बन सकता था. वह वेदों का ज्ञाता था. दशहरे के अवसर पर चलिए आपको बताते हैं रावण से जुड़ी कुछ रोचक बातें...

  • रावण जब पैदा हुआ तब बहुत जोर से रोया. उसके रोने की आवाज से सब डर गए, तब उसका नाम रावण रखा गया.

  • रावण भगवान ब्रह्मा के पोते थे. रावण के पिता प्रसिद्ध ऋषि विश्रवा थे, जो स्वयं प्रजापति पुलस्त्य के पुत्र थे, जो ब्रह्मा के दस 'मन जनित' पुत्रों में से एक थे.

  • कहा जाता है कि एक बार राम की सेना ने लंका जाने के लिए पुल बनाया था, उन्हें शिव का आशीर्वाद चाहिए था. जिसके लिए उन्होंने एक यज्ञ किया. लेकिन शिव का सबसे बड़ा भक्त रावण था और चूंकि वह अर्ध-ब्राह्मण था, इसलिए वह यज्ञ करने के लिए सबसे योग्य भी था. ऐसे में भगवान राम ने रावण को यज्ञ करने का निमंत्रण भेजा. रावण भगवान शिव का परम भक्त था इसलिए वह भगवान राम द्वारा भेजे गए इस निमंत्रण को ठुकरा न सका. 

  • रावण को वेद और संस्कृत का उच्च ज्ञान था. इसलिए राम ने अपने भाई लक्ष्मण को रावण से राज्य कला और कूटनीति में महत्वपूर्ण सबक सीखने को कहा था. 

  • रावण अपने पुत्र मेघनाद को अजेय बनाना चाहता था. उन्हें मेघनाद की कुंडली में सही से बैठने के लिए आदेश दिया, लेकिन शनिदवे ने उसकी बात नहीं मानी. इसके बाद रावण शनि देव को ही बंदी बना लिया.

  • रावण एक असाधारण वीणा वादक था. ऐसा माना जाता है कि उन्हें संगीत में गहरी दिलचस्पी थी और वे एक बेहद निपुण वीणा वादक थे.

  • वेदों की ऋचाओं को स्वरबद्ध करने का काम रावण ने ही किया था. आसी करने के लिए भगवान शिव ने उसे कहा था. शिव को प्रसन्न करने के लिए उसने कई मंत्रों की रचना की थी.

  • रावण अपनी ताकत से ग्रहों को भी अपने वश में करने की क्षमता रखता है. रावण इतना पराक्रमी और ज्ञानी था कि उसे मारने के लिए खुद भगवान को अवतार लेना पड़ा. 

  • रावण जब किसी भी कार्य को हाथ में लेता, तो उसे पूरी निष्पक्षता और कर्तव्यभाव से पूर्ण करता था, यह उसकी खूबी थी.