India Top 10 Silk Saree
India Top 10 Silk Saree
भारत में साड़ी सिर्फ एक परिधान नहीं, बल्कि परंपरा, संस्कृति और शान की पहचान है. शादी-ब्याह हो, त्योहार हो या कोई छोटी-मोटी पूजा-पाठ, महिलाओं की पहली पसंद अकसर साड़ी ही होती है. खास कर सिल्क की साड़ियां. कांजीवरम और बनारसी साड़ियों के बारे में तो सभी जानते हैं, लेकिन देश के अलग-अलग राज्यों की कई ऐसी सिल्क साड़ियां भी हैं, जिन्होंने अपनी खूबसूरती और बारीक कारीगरी से दुनियाभर में पहचान बनाई है. हर महिला की अलमारी में इन 10 मशहूर सिल्क साड़ी तो जरूर होनी चाहिए.
1. बनारसी सिल्क साड़ी (उत्तर प्रदेश)
भारत की सबसे ज्यादा पसंद की जाने वाली सिल्क साड़ियों में बनारसी साड़ी का नाम सबसे ऊपर आता है. वाराणसी में बनने वाली इस साड़ी को GI टैग प्राप्त है. बनारसी साड़ी की बुनाई में शुद्ध रेशम के धागों के साथ सोने-चांदी वाली जरी का इस्तेमाल किया जाता है. एक बनारसी साड़ी को तैयार करने में 15 दिन से लेकर 6 महीने तक लग सकते हैं, जैसी उसकी डिमांड होती है. विश्वभर में इसकी बूटेदार डिजाइन, मुगल शैली की बेल-बूटियां और हाथ की महीन कारीगरी इसे अलग पहचान देती हैं. बिहार, यूपी, बंगाल और कई राज्यों के शादी-ब्याह और पूजा-पाठ में बनारसी साड़ियों का विशेष महत्व होता है. लोगों का कहना होता है कि बाकी सिल्क की साड़ियों के मुकाबले बनारसी सिल्क सबसे शुद्ध होता है.
अंतरराष्ट्रीय बाजारों में प्रीमियम बनारसी सिल्क साड़ी की कीमत 500 डॉलर से 5000 डॉलर (लगभग 40 हजार से 4 लाख रुपए) तक हो सकती है. इसकी कीमत इसमें इस्तेमाल होने वाले सोने-चांदी के तारों के कारण बढ़ती है.
2. कांजीवरम सिल्क साड़ी (तमिलनाडु)
तमिलनाडु के कांचीपुरम शहर में बनने वाली कांजीवरम साड़ी को 'साड़ियों की रानी' कहा जाता है. मलबरी सिल्क के धागों से तैयार की जाने वाली इस साड़ी में बॉर्डर और पल्लू अलग बुने जाते हैं और बाद में उसे साड़ी में जोड़े जाते हैं. इसमें पूरा काम असली जरी का प्रयोग कर किया जाता है. एक कांजीवरम साड़ी में 600 ग्राम तक सिल्क और भारी मात्रा में जरी लगा होता है, इसलिए अंतरराष्ट्रीय बाजार में एक कांजीवरम की साड़ी की कीमत 1000 डॉलर से 10,000 डॉलर (80 हजार से 8 लाख रुपए) तक पहुंच सकती है. अगर काम और प्रीमियम हो तो दाम और बढ़ सकता है.
3. भागलपुरी सिल्क (बिहार)
बिहार के भागलपुर को 'सिल्क सिटी' कहा जाता है. भागलपुरी सिल्क को दुनिया भर में प्राकृतिक टेक्सचर के लिए जाना जाता है. पहले रेशम के कोकून से धागा निकाला जाता है और फिर उसे हाथों और मशीन दोनों की मदद से बुना जाता है. भागलपुरी सिल्क को GI भी टैग प्राप्त है. अंतरराष्ट्रीय बाजार में इस सिल्क की कीमत 200 डॉलर से 1500 डॉलर (16 हजार से 1.25 लाख रुपए) तक जा सकती है. अगर काम आप अपने मन के हिसाब से कराएंगे तो कीमत और बढ़ सकती है.
4. मूंगा सिल्क (असम)
असम की मूंगा सिल्क दुनिया की सबसे दुर्लभ प्राकृतिक सिल्क में गिनी जाती है. मूंगा रेशम विशेष कीड़ों से प्राप्त होता है जो केवल असम के मौसम में पनपते हैं. ये सिल्क इसलिए भी खास है क्योंकि इसकी प्राकृतिक सुनहरी चमक कभी फीकी नहीं पड़ती और ये हमेशा वैसा ही नए जैसा दिखता है. इसकी कीमत अंतरराष्ट्रीय बाजार में 1500 डॉलर से 6000 डॉलर (1.2 लाख से 5 लाख रुपए) तक हो सकती है. कई बार इसकी कीमत 6000 डॉलर भी पार कर जाती है.
5. पैठणी सिल्क (महाराष्ट्र)
महाराष्ट्र की पैठणी साड़ी कोई ऐसी-वैसी साड़ी नहीं है. दरअसल इसको शाही साड़ियों में गिना जाता है. इन साड़ियों को रॉयल लुक देने के लिए इसमें मोर, कमल और महाराष्ट्र की पारंपरिक डिजाइनों को हाथ से बुना जाता है. जहां बनारसी साड़ी बनने में महीनों लगाती है, वहीं पैठणी साड़ी को तैयार होने में एक साल से ज्यादा का समय कई बार लग जाता है. पैठणी को GI टैग प्राप्त है और इसकी कीमत 1 लाख से 8 लाख रुपए तक हो सकती है.
6. मैसूर सिल्क (कर्नाटक)
मैसूर सिल्क अपनी चिकनी बनावट और शुद्धता के लिए विश्वभर में जाना जाता है. इसे 100% शुद्ध रेशम और उच्च गुणवत्ता वाली जरी का इस्तेमाल कर बनाया जाता है. इसकी विशेषता ये है कि मैसूरी सिल्क की गिनती भारत की सबसे नियंत्रित और प्रमाणित सिल्क साड़ियों में होती है. नॉर्मल साड़ियों की शुरुआती कीमत अंतरराष्ट्रीय बाजार में 500 डॉलर से 3000 डॉलर (40 हजार से 2.5 लाख रुपये) तक हो सकती है.
7. बालूचरी सिल्क (पश्चिम बंगाल)
पश्चिम बंगाल की बालूचरी साड़ियों पर पौराणिक कथाओं और परंपराओं को धागों से उकेरा जाता है. साड़ी के पल्लू और बॉर्डर पर रामायण, महाभारत और लोककथाओं के दृश्य बुने जाते हैं. बालूचरी सिल्क को GI दर्जा मिला हुआ है. इसकी कीमत 25 हजार से 2 लाख रुपए और उससे ज्यादा तक हो सकती है.
8. पटोला सिल्क (गुजरात)
पटोला भारत की सबसे मुश्किल डबल इकट बुनाई वाली साड़ियों में शामिल है. इसके धागों को पहले रंगा जाता है, फिर डिजाइन के अनुसार बुना जाता है. एक साड़ी बनाने में कई महीने लग सकते हैं. पटोला को भी GI मान्यता प्राप्त है. अंतरराष्ट्रीय कीमत 2000 डॉलर से 15,000 डॉलर (1.5 लाख से 12 लाख रुपए) तक या उससे ज्यादा भी हो सकती है.
9. बोमकई सिल्क (ओडिशा)
ओडिशा की बोमकई साड़ी पारंपरिक जनजातीय कला और रेशम का शानदार मेल है. बोमकई सिल्क पर हाथों से बेहद बारीक बुनाई की जाती है. इसमें मछली, पक्षी और लोककला आधारित डिजाइन प्रमुख होते हैं. बोमकई साड़ी को GI टैग दिया गया है. इसकी कीमत 20 हजार से 1.5 लाख रुपए हो सकती है.
10. लोटस सिल्क साड़ी (मणिपुर)
दुनिया की सबसे दुर्लभ और महंगी सिल्क साड़ियों में लोटस सिल्क का नाम शुमार है. इसको बनाने के लिए रेशम के कीड़ों की जरूरत नहीं पड़ती, बल्कि अनोखे तरीके से बनाया जाता है. इसे बनाने के लिए कमल के तनों (Lotus Stem) के अंदर मौजूद महीन रेशों को सावधानी से निकाल कर तैयार किया जाता है. एक साड़ी बनाने के लिए लगभग हजारों कमलों के डंठलों से फाइबर निकाला जाता है. फिर उन्हें प्रोसेस कर हाथों से बनाया जाता है. इस साड़ी को तैयार करने में कई महीने लग सकते हैं. अंतरराष्ट्रीय बाजार इसके लिए लोग 3000 डॉलर से 20,000 डॉलर (2.5 लाख से 17 लाख रुपए) तक देने को तैयार रहते हैं.
(नोट- साड़ियों की कीमत उनके बनावट, जरी और सोने-चांदी के काम के आधार पर बढ़ती और घटती है. इस लेख में दिए हुए दाम पर विश्वास न करें. थोड़ा-बहुत ऊपर-नीचे रेट हो सकता है. खरीदते वक्त अंतरराष्ट्रीय और भारतीय बाजारों के दाम का पता जरूर लगा लें.)
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