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Kashmir: प्लास्टिक को रिसाइकल कर लोगों को मिल रहा रोजगार, मिट्टी के लिए बनाई जा रही खाद.. हज़ारों परिवार की दूर हो रही आर्थिक तंगी

कश्मीर के इस युवा ने तैयार किया ऐसा मॉडल जिससे प्लास्टिक को रिसाइकल किया जा सकता है. इससे धागे तैयार किए जा रहे है. मिट्टी के लिए खाद तैयार हो रही है. जिसमें लोगों को रोजगार भी मिल रहा है.

Representative Image (Source: Meta.AI) Representative Image (Source: Meta.AI)

क्या कभी कोई सोच सकता है कि कूड़े से मिट्टी को गुणवत्ता को बेहतर बनाया जा सकता है या फिर इससे रोजगार पैदा किया जा सकता है. अगर आपका जवाब न है तो, बता दें कि दक्षिण कश्मीर के रहने वाले मोहम्मद आमिर खान (30), जो एक इंजीनियर है, उन्होंने इस बात को कर दिखाया है.

कैसे काम करता है यह मॉडल
जम्मू-कश्मीर के पर्यावरण उद्यमियों में से एक, आमिर ने एक कचरा प्रबंधन मॉडल तैयार किया है. जिसमें अब 4,000 से ज़्यादा परिवार शामिल हैं. किसान उनकी खाद का इस्तेमाल करते हैं, स्थानीय लोग बेकार प्लास्टिक से कमाई करते हैं.

जीवाश्म ईंधन से चलने वाली मशीनों को छोड़कर, आमिर की मशीन प्लास्टिक कचरे को रीसायकल करने के लिए हथकरघा और पारंपरिक चरखों पर निर्भर है. यह प्रक्रिया कार्बन-तटस्थ, श्रम-प्रधान और रोज़गार-अनुकूल है. वे कहते हैं, "इस प्रक्रिया से कार्बन बिलकुल नहीं निकलता. यह पर्यावरण के प्रति जागरूक और आजीविका-संचालित दोनों है."

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सरकार से मिली मदद
सरकारी सहयोग से, उनकी पहल कुलगाम के 2,500 से ज़्यादा घरों तक फैल गई, और बाद में अनंतनाग और बिजबेहरा में भी 1,500 और परिवार जुड़ गए. किसानों को सस्ती खाद मिल गई, जबकि घरों में जैविक कचरे को अलग-अलग करना शुरू हो गया.

लंबे समय से बेकार समझे जाने वाले पॉलीथीन कचरे को भी एक उद्देश्य मिल गया है. आमिर की टीम ने इसे धागे में बदलने का एक तरीका विकसित किया है, जिसे कारीगर कश्मीरी हथकरघों पर बुनकर पर्यावरण-अनुकूल थैले और चादरें बनाते हैं. 

हज़ारो परिवार को मिला रोजगार
आज, उनकी पहल से 25 से ज़्यादा मज़दूरों को सीधे तौर पर रोज़गार मिलता है और हज़ारों परिवारों को अप्रत्यक्ष रूप से मदद मिलती है. कम्पोस्ट की बिक्री, प्लास्टिक रीसाइक्लिंग और हथकरघा उत्पादों की बदौलत राजस्व पिछले साल के ₹50 लाख से बढ़कर इस साल ₹80 लाख हो गया है.

विश्व में मिली पहचान
आमिर के काम को वैश्विक स्तर पर भी पहचान मिली है. जनवरी 2024 में, उन्हें पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति बिल क्लिंटन का एक निजी पत्र मिला, जिसमें उन्होंने सीजीआई यू के छात्रों के प्रति उनके मार्गदर्शन और समुदाय-आधारित स्थिरता के प्रति उनकी प्रतिबद्धता की प्रशंसा की थी.

आमिर के लिए, यह सफ़र अभी शुरू ही हुआ है. वे कहते हैं, "हमने दिखा दिया है कि यह मुमकिन है. अब हमारा लक्ष्य ज़्यादा लोगों तक पहुंचना, उनके लिए रोज़गार पैदा करना और कश्मीर में रोज़मर्रा की ज़िंदगी में स्थिरता लाना है."

-अशरफ वानी की रिपोर्ट