
बीटरूट यानी चुकंदर न सिर्फ स्वाद में मीठा होता है, बल्कि सेहत के लिए भी किसी सुपरफूड से कम नहीं है. इसमें आयरन, पोटैशियम, फोलेट, फाइबर और एंटीऑक्सीडेंट्स भरपूर मात्रा में होते हैं. खून की कमी से जूझ रहे लोगों को भी बीटरूट खाने की सलाह दी जाती है. आजकल लोग इसे गमले में भी उगाने लगे हैं.
घर की बालकनी में बीटरूट यानी चुकंदर उगाना बेहद आसान है. अगर बीटरूट के लिए सही गमला, मिट्टी, पानी और इस मौसम में घर की बनी जैविक खाद दी जाए, तो पूरे मौसम ताजा और हेल्दी चुकंदर मिल सकता है.
बीटरूट के लिए कैसा गमला चुनें?
बीटरूट की जड़ें गोल और मोटी होती हैं, इसलिए कम से कम 12-16 इंच गहरे और चौड़े गमले का चयन करें. गमला प्लास्टिक, मिट्टी या सिरेमिक किसी भी किस्म का हो सकता है, लेकिन मिट्टी का गमला सबसे बेहतर रहता है.
बीटरूट उगाने के लिए मिट्टी कैसे तैयार करें?
बालकनी या गमले में बीटरूट उगाने के लिए भुरभुरी, हल्की और जैविक खाद वाली उपजाऊ मिट्टी सबसे उपयुक्त रहती है. इसमें 60% गार्डन की मिट्टी, 30% गोबर खाद या वर्मी कम्पोस्ट और 10% रेत मिलाकर गमले में डालें.
कैसे लगाएं बीटरूट का पौधा?
बीटरूट के बीजों को पहले 6–8 घंटे गुनगुने पानी में भिगो लें, ताकि अंकुरण जल्दी हो. बीज को ½ इंच गहराई में और 2–3 इंच की दूरी पर बोएं. बोने के बाद हल्का पानी छिड़कें, ताकि मिट्टी गीली रहे. गुलाबी स्टेम निकलने लगें तो कमजोर पौधे निकाल दें और स्वस्थ पौधों को बढ़ने दें.
बरसात के मौसम में कैसे करें देखभाल?
बारिश के मौसम में गमले की मिट्टी में अधिक पानी जमा न होने दें, वरना जड़ें सड़ सकती हैं.
हर हफ्ते मिट्टी की हल्के हाथों से गुड़ाई करें ताकि ऑक्सीजन बनी रहे.
बरसात में बीटरूट को सबसे ज्यादा फायदा जैविक खाद जैसे गोबर खाद या सरसों की खली से मिलता है.
कीट या फंगस दिखे तो नीम तेल या घरेलू जैविक छिड़काव करें.
पानी और धूप कितनी मिलनी चाहिए?
बीटरूट के गमले को धूप कम से कम 4–5 घंटे मिले, तो पौधा खूब खिलेगा. पानी जरूरत के अनुसार दें, मिट्टी ऊपर से सूखने लगे तब ही पानी डालें. ओवरवॉटरिंग न करें, खासकर बारिश में.
कटाई कब और कैसे करें?
बीटरूट बोने के 2–3 महीने बाद लगे जड़ मोटी और गहरे लाल रंग की दिखें तो कटाई के लिए तैयार हैं. कटाई के लिए मिट्टी को हल्का खोदें और धीरे-धीरे जड़ निकालें ताकि टूटे नहीं. ज्यादा देर तक छोड़ने से इसका स्वाद खराब हो सकता है. बीटरूट के पत्ते भी खाए जाते हैं. आप इन्हें सूप, पराठे या सलाद में इस्तेमाल कर सकते हैं.