Mogra Plant Care
Mogra Plant Care
गर्मियों के मौसम में मोगरे की भीनी-भीनी खुशबू हर किसी को पसंद आती है. इसकी महक पूरे घर और छत का माहौल खुशगवार बना देती है. लेकिन कई लोगों की शिकायत रहती है कि नर्सरी से लाया गया मोगरे का पौधा कुछ दिनों बाद फूल देना बंद कर देता है या फिर उसकी कलियां खिलने से पहले ही गिर जाती हैं. अगर आपके साथ भी ऐसा हो रहा है तो अब चिंता करने की जरूरत नहीं है. क्योंकि आज हम आपको बताएंगे मोगरे के पौधे की देखभाल का ऐसा आसान तरीका बताया है, जिसे अपनाकर आप अपने पौधे को फूलों से भर सकते हैं.
नया पौधा लाने के बाद न करें जल्दबाजी
अक्सर लोग नर्सरी से पौधा खरीदकर तुरंत उसे दूसरे गमले में लगा देते हैं. यह सबसे बड़ी गलती मानी जाती है. नया पौधा घर लाने के बाद उसे 2 से 3 दिन तक उसी पॉट में बाकी पौधों के बीच रखें. इससे वह नए वातावरण और मौसम के अनुसार खुद को आसानी से ढाल लेता है.
बड़े गमले में लगाते समय रखें इन बातों का ध्यान
जब पौधा नए माहौल में अच्छी तरह सेट हो जाए, तब उसे बड़े गमले में लगाएं. सबसे पहले गमले के ड्रेनेज होल को किसी ठीकरी या दीये के टुकड़े से ढक दें. इसके बाद सबसे नीचे रसोई का सूखा या गीला जैविक कचरा जैसे सब्जियों और फलों के छिलके डालें. फिर अच्छी जल निकासी वाली उपजाऊ मिट्टी भरकर पौधे को लगाएं. समय के साथ यह किचन वेस्ट सड़कर प्राकृतिक खाद बन जाता है, जिससे जड़ों को लगातार पोषण मिलता रहता है.
धूप और पानी का रखें सही संतुलन
मोगरा धूप पसंद करने वाला पौधा है. इसे रोजाना कम से कम 5 से 6 घंटे की सीधी धूप जरूर मिलनी चाहिए. अगर पौधे छायादार जगह पर रहेगा तो उसमें पत्तियां तो आएंगी, लेकिन फूल नहीं खिलेंगे. गमले की ऊपरी 1 से 2 इंच मिट्टी पूरी तरह सूखने के बाद ही पानी दें. जरूरत से ज्यादा पानी देने से जड़ें सड़ सकती हैं और फंगस लगने का खतरा बढ़ जाता है. इससे कलियां भी खराब हो सकती हैं.
ज्यादा फूलों के लिए करें पिंचिंग
अगर मोगरे का पौधा केवल लंबा बढ़ रहा है और उसमें शाखाएं कम बन रही हैं, तो समय-समय पर नई टहनियों के ऊपरी हिस्से को उंगलियों से तोड़ें. इसे पिंचिंग कहा जाता है. इससे एक टहनी की जगह 2 से 3 नई शाखाएं निकलती हैं. पौधा जितना ज्यादा घना होगा, उसमें उतने ही ज्यादा फूल खिलेंगे.
दालचीनी का यह घरेलू नुस्खा करेगा कमाल
पौधा लगाने के लगभग 7 से 10 दिन बाद एक लीटर पानी में एक छोटा चम्मच दालचीनी पाउडर मिलाकर रातभर के लिए छोड़ दें. इसके बाद हर 15 दिन में यह पानी पौधे की जड़ों में डालें. दालचीनी प्राकृतिक एंटी-फंगल और रूटिंग एजेंट की तरह काम करती है. यह मिट्टी में मौजूद फंगस और हानिकारक कीड़ों को कम करने में मदद करती है. साथ ही जड़ों को मजबूत बनाकर पौधे की अच्छी ग्रोथ में सहायक होती है. मजबूत जड़ों वाले पौधे में कलियां अच्छी तरह विकसित होती हैं और फूलों की संख्या भी बढ़ सकती है.
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