Real and Chemical Based Sweet Potato
Real and Chemical Based Sweet Potato
सर्दियों की शुरुआत होते ही बाजारों में खूब शकरकंद दिखाई देने लगती है. ठंड के मौसम में इसे उबालकर या भूनकर खाना लोगों को बेहद पसंद होता है. स्वाद के साथ-साथ शकरकंद पोषण से भरपूर होती है और शरीर को ऊर्जा देने में मदद करती है. लेकिन बढ़ते मुनाफे की होड़ में कुछ दुकानदार इसकी खूबसूरती बढ़ाने के लिए खतरनाक केमिकल और सिंथेटिक रंगों का सहारा ले रहे हैं, जो सेहत के लिए गंभीर खतरा बन सकते हैं.
केमिकल से रंगी हुई शकरकंद आम शकरकंद की तुलना में ज्यादा चमकदार और गहरे लाल या नारंगी रंग की दिखाई देती है. जबकि प्राकृतिक रूप से उगी शकरकंद का रंग हल्का होता है और उस पर मिट्टी या कुदरती दाग-धब्बे नजर आ सकते हैं. बाहरी चमक के लिए इस्तेमाल किए गए ये रसायन शरीर में पहुंचकर पेट दर्द, गैस, उल्टी और एलर्जी जैसी समस्याएं पैदा कर सकते हैं. बच्चों और बुजुर्गों के लिए यह मिलावट और भी ज्यादा खतरनाक साबित हो सकती है.
घर पर करें असली-नकली की आसान पहचान
मिलावटी शकरकंद की पहचान के लिए किसी खास जांच की जरूरत नहीं होती. आप इसे घर पर ही 'पानी के टेस्ट' से परख सकते हैं. बाजार से लाई गई शकरकंद को साफ पानी से भरे बर्तन में डालें. अगर कुछ ही मिनटों में पानी का रंग हल्का लाल या नारंगी होने लगे, तो यह संकेत है कि उस पर बाहरी रंग चढ़ाया गया है. ऐसी शकरकंद का सेवन सेहत के लिए नुकसानदायक हो सकता है.
उबालते समय भी मिलावट का संकेत
शकरकंद उबालते वक्त भी उसकी सच्चाई सामने आ सकती है. अगर उबालने के दौरान पानी का रंग बहुत गहरा या असामान्य रूप से रंगीन हो जाए, तो समझ लें कि उसमें केमिकल की मिलावट है. प्राकृतिक शकरकंद उबालने पर पानी में बहुत हल्का रंग छोड़ती है. इसके अलावा, अगर खाने पर स्वाद कड़वा लगे या गले में जलन महसूस हो, तो उसे तुरंत खाने से बचें.
खरीदारी में थोड़ी समझदारी जरूरी
शकरकंद खरीदते समय बहुत ज्यादा चमकदार और एक जैसी दिखने वाली चीजों से दूरी बनाना ही बेहतर है. ऐसी शकरकंद चुनें जो थोड़ी खुरदरी हो, जिस पर हल्की मिट्टी लगी हो और जिसका रंग प्राकृतिक लगे. जरूरत से ज्यादा गहरे और चटक रंग वाली शकरकंद आकर्षक जरूर लगती है, लेकिन सेहत के लिए जोखिम भरी हो सकती है. थोड़ी सी सावधानी अपनाकर आप खुद को और अपने परिवार को गंभीर बीमारियों से सुरक्षित रख सकते हैं.