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Driver Amma: 74 साल की उम्र में दुबई की सड़कों पर चलाती हैं Rolls Royce... बस, ट्रैक्टर, ट्रक और हैवी मशीनरी चलाने का भी है लाइसेंस

साड़ी पहने, बेहद आत्मविश्वास के साथ वह सफेद रोल्स-रॉयस घोस्ट की ड्राइविंग सीट पर बैठती हैं और दुबई की सड़कों पर गाड़ी चलाती हैं.

Radhamani Amma (Photo: Instagram) Radhamani Amma (Photo: Instagram)

दुबई की सड़कों पर एक 74 वर्षीय भारतीय महिला अपनी शानदार ड्राइविंग के लिए सोशल मीडिया पर छाई हुई हैं. राधामणि अम्मा को लोग प्यार से ‘ड्राइवर अम्मा’ कह रहे हैं. एक वीडियो में वह अपनी रोल्स-रॉयस चलाती नजर आ रहे हैं और यहीं से दुनिया भर में मशहूर हो गई हैं. उनकी शालीनता, आत्मविश्वास और बेखौफ अंदाज ने उन्हें लाखों लोगों के लिए प्रेरणा बना दिया है.

साड़ी पहनकर रोल्स-रॉयस चलाती दिखीं मणि अम्मा
मणि अम्मा अपने वायरल वीडियो में अपना इंटरनेशनल ड्राइविंग परमिट दिखाती हैं. साड़ी पहने, बेहद आत्मविश्वास के साथ वह सफेद रोल्स-रॉयस घोस्ट की ड्राइविंग सीट पर बैठती हैं और दुबई की सड़कों पर गाड़ी चलाती हैं.उनकी बैलेंस्ड ड्राइविंग देखकर सोशल मीडिया पर लोग उनकी तारीफों के पुल बांध रहे हैं. 

11 तरह के व्हीकल्स के हैं लाइसेंस
मणि अम्मा की खासियत सिर्फ लक्ज़री कारें चलाना नहीं है, बल्कि उनके पास 11 अलग-अलग तरह के वाहनों की लाइसेंस हैं. इनमें शामिल हैं- 

  • लक्ज़री कारें – रोल्स-रॉयस घोस्ट, मर्सिडीज-बेंज आदि
  • हेवी मशीनरी – क्रेन, रोड रोलर, फोर्कलिफ्ट, एक्सकेवेटर
  • बस, ट्रैक्टर और ट्रक भी वह आसानी से चलाती हैं.

उनकी यह बहुमुखी प्रतिभा लोगों को हैरान कर रही है. आपको बता दें कि मणि अम्मा का नाम India Book of Records में शामिल है. 

पति की विरासत को आगे बढ़ाया
मणि अम्मा की ड्राइविंग यात्रा केरल से शुरू हुई. 1978 में उनके पति ने एक ड्राइविंग स्कूल खोला था और उन्होंने ही मणि अम्मा को ड्राइविंग सीखने के लिए प्रेरित किया. वक्त के साथ मणि अम्मा ने कार, बस, ट्रक, क्रेन और अन्य भारी वाहन चलाने की कला में महारत हासिल की. 2004 में पति के निधन के बाद उन्होंने खुद ड्राइविंग स्कूल की जिम्मेदारी संभाली और परिवार को आगे बढ़ाया.

आनंद महिंद्रा भी हुए प्रभावित
मणि अम्मा की कहानी ने बिजनेस लीडर्स को भी प्रभावित किया. उद्योगपति आनंद महिंद्रा ने उनकी प्रशंसा करते हुए सोशल मीडिया पर लिखा कि उनकी "जीवन जीने की भूख" वाकई काबिल-ए-तारीफ है. मणि अम्मा साबित करती हैं कि उम्र सिर्फ एक संख्या है. उनकी कहानी सिखाती है कि सपनों की कोई उम्र नहीं होती, हुनर की कोई सीमा नहीं होती और आत्मविश्वास और जुनून से हर मुश्किल आसान हो जाती है. 

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