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Jaipur News: सेल्फी के दौर में 200 साल पुराना कैमरा, तीन पीढ़ियों से जिंदा है ये 20 किलो का Vintage Camera

आज के डीएसएलआर, स्मार्टफोन कैमरों और सेल्फी के दौर में राजस्थान के जयपुर में 200 साल पुराना कैमरा आकर्षण का केंद्र बना हुआ है. टीकम चंद का यह कैमरा सभी लोगों का ध्यान अपनी ओर जरूर खींचता है. आइए इस कैमरे के बारे में जानते हैं.  

Vintage Camera Vintage Camera

राजस्थान के जयपुर की गुलाबी गलियों में जहां हर पल कैमरों की क्लिक और सेल्फियों की चहल-पहल सुनाई देती है, वहीं हवा महल के पास एक कोना ऐसा भी है, जहां वक्त जैसे ठहर जाता है. यहां आधुनिकता की तेज रफ्तार के बीच एक शख्स आज भी इतिहास को अपने हाथों में थामे खड़ा है. जी हां, इस शख्स का नाम है टीकम चंद, जिन्हें लोग प्यार से 'ओल्ड फोटोग्राफर' के नाम से जानते हैं. करीब 200 साल पुराने लकड़ी के बॉक्स कैमरे के साथ खड़े टीकम चंद सिर्फ तस्वीरें नहीं खींचते, बल्कि हर फ्रेम में एक कहानी कैद करते हैं.

चलता-फिरता डार्करूम है यह कैमरा
टीकम चंद का यह कैमरा 1860 के दशक का है और इसमें लगा असली Carl Zeiss Jena लेंस आज भी उतनी ही खूबसूरती से ब्लैक एंड व्हाइट तस्वीरें उकेरता है, जितना कभी शाही दौर में करता था. खास बात यह है कि यह कैमरा अपने आप में एक पूरा चलता-फिरता डार्करूम है, जिसमें डेवलपर, फिक्सर और फिल्म बॉक्स सब कुछ उसी 20 किलो के कैमरे में समाया हुआ है.

जयपुर के महाराजा ने उपहार में दिया था यह कैमरा
इस अनोखी विरासत की शुरुआत टीकम चंद के दादा, पहाड़ी लाल से हुई थी, जो जयपुर रियासत के आधिकारिक फोटोग्राफर थे. कहा जाता है कि यह कैमरा उन्हें जयपुर के महाराजा द्वारा उपहार में दिया गया था. रियासतों के खत्म होने के बाद इस ऐतिहासिक धरोहर को टीकम चंद के पिता मोहन लाल ने संभाला और फिर 1977 में टीकम चंद ने इसे अपने हाथों में लिया. तब से लेकर आज तक वे इस कैमरे की हर छोटी-बड़ी बारीकी को समझते हुए इसे जीवित परंपरा की तरह आगे बढ़ा रहे हैं.

हर तस्वीर हाथों से की जाती है तैयार 
हवा महल के बाहर जब टीकम चंद अपना कैमरा सेट करते हैं, तो वहां से गुजरने वाले पर्यटक ठिठक कर रुक जाते हैं. डिजिटल युग में जहां तस्वीरें सेकंडों में खींची और भुला दी जाती हैं, वहीं टीकम चंद की तस्वीरें वक्त लेती हैं, लेकिन बदले में एक यादगार अनुभव देती हैं. फ्रांस से मंगवाई गई खास फिल्म पर खींची गई हर तस्वीर हाथों से तैयार की जाती है, जिसमें एक अलग ही आत्मा और गहराई होती है. करीब 500 रुपए में मिलने वाली यह तस्वीर सिर्फ एक फोटो नहीं होती, बल्कि इतिहास का एक टुकड़ा होती है. एक ऐसा लम्हा जो समय के साथ फीका नहीं पड़ता. हर क्लिक के साथ टीकम चंद न सिर्फ लोगों की तस्वीरें कैद करते हैं, बल्कि एक लुप्त होती कला को भी जीवित रखे हुए हैं.

खूबसूरती सिर्फ तकनीक में नहीं
आज जब दुनिया तेजी से डिजिटल हो रही है, टीकम चंद जैसे कलाकार हमें यह याद दिलाते हैं कि असली खूबसूरती सिर्फ तकनीक में नहीं, बल्कि उस एहसास में है जो किसी चीज को खास बनाता है. उनकी यह अनोखी पहल न सिर्फ जयपुर की पहचान को और खास बनाती है, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए एक अमूल्य विरासत भी संजोए हुए है.