Kanpur News
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उत्तर प्रदेश के कानपुर में एक अनोखा मामला सामने आया है. एक महिला कलेक्टर के पास पहुंची और गुहार लगाई कि वो अपने पालतू डॉगी के बिना नहीं रह सकती है. इसलिए उसे वापस दिलवा दिया जाए. इसके बाद प्रशासन एक्टिव हुआ और 4 घंटे के भीतर महिला को डॉगी मिल गई.
महिला ने रो-रोकर लगाई गुहार-
कानपुर में एक महिला ने अपने पालतू डॉगी मोंटी के लिए हार नहीं मानी. उसको वापस लेने के लिए महिला सीधे डीएम के पास गुजारिश करने पहुंच गई. महिला ने रोते हुए कलेक्टर से बोला कि सर, मेरा मोंटी मुझे वापस दिलवा दीजिए, मैं उसके बगैर जी नहीं सकती. डीएम जितेंद्र कुमार सिंह ने उस की फरियाद सुनकर तुरंत जिला पशु चिकित्सा अधिकारी को जांच के आदेश दिए.
केयर सेंटर ने वापस करने किया था इनकार-
कानपुर में आवास विकास के रहने वाली फरहा 18 दिसंबर को बाहर गई थी तो वह अपना डॉगी मोंटी एक डॉग केयर सेंटर वाले को सौंप गई थी. आठ महीने का मोंटी कुछ घायल भी था. जब वह लौट के आई तो सेंटर वाले ने यह कहकर डॉगी को देने से इनकार कर दिया कि उन्होंने डॉगी की केयर ढंग से नहीं की. इसलिए हमने उसको एसपीसीए को सौंप दिया है. यह संस्था पालतू जानवरों के साथ क्रूरता करने वालों से पालतू जानवरों को लेकर उनकी केयर करती है. इसके अध्यक्ष जिले के डीएम होते हैं.
हारकर सीएम ऑफिस पहुंची महिला-
महिला कई बार केयर सेंटर में कई बार गुहार लगाई, लेकिन उसकी कोई सुनवाई नहीं हुई. इसके बाद वो बुधवार को सीधे डीएम जितेंद्र कुमार सिंह के ऑफिस पहुंच गई और फरियाद करने लगी. डीएम जितेन कुमार सिंह को लखनऊ में दो बहनों के डॉगी न मिलने पर सुसाइड करने की घटना पता थी, उन्होंने तुरंत जिले के पशु अधिकारी को आदेश दिया कि मामले की जांच करें. इनके वैधानिक कागज चेक करें. डॉगी का स्वामित्व देखें. डीएम ने आदेश किया कि एनपीसीए संस्था का काम पशुओं के साथ होने वाली क्रूरता को रोकना है, ना कि किसी के स्वामित्व वाले डॉगी रखना. डीएम की मानवीय आधार पर की गई इस कार्रवाई पर तुरंत जिला पशु अधिकारी आइडीएन चतुर्वेदी संस्था पहुंचे और मामले की जांच की. फराह के पूरे कागज चेक किए गए और 4 घंटे बाद ही डीएम के आदेश पर डॉगी मोंटी को फराह को सौंप दिया गया.
महिला ने डीएम को धन्यवाद दिया-
महिला फराह 15 दिन से अपनी डॉगी के लिए परेशान थी. जब उसे डॉगी मिली तो उसकी खुशी का ठिकाना नहीं रहा. उसने कलेक्टर को धन्यवाद दिया. कानपुर डीएम का इस मामले पर कहना है कि कानपुर में आवारा कुत्तों के काटने से कई घटनाएं हो चुकी हैं. इससे जान भी जा चुकी है. ऐसे में जिनके पास डॉगी रखने का लाइसेंस है. उनका डॉगी समिति के लिए खतरा नहीं है. ऐसे में उसको किसी संस्था में रोका नहीं जा सकता. महिला परेशान थी. मानवता और विधि सम्मत ढंग को अपनाते हुए कार्रवाई की गई.
(रंजय सिंह की रिपोर्ट)
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