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DNA से लेकर खान-पान तक पर रिसर्च... बाघिन 'महक' की लंबी उम्र के राज से उठेगा पर्दा

कोटा के अभेड़ा बायोलॉजिकल पार्क में सबसे लंबी उम्र की बाघिन महक पर रिसर्च होगा. रिसर्च में महक की जेनेटिक संरचना, DNA, जैविक प्रक्रियाओं, खान-पान, वैक्सीनेशन और स्वास्थ्य देखभाल का अध्ययन किया जाएगा. महक 28 अगस्त को 23 साल हुई है.

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Tigress (Representative Image) Tigress (Representative Image)

राजस्थान में कोटा के अभेड़ा बायोलॉजिकल पार्क की सबसे खास पहचान बन चुकी देश की सबसे बुजुर्ग जीवित बाघिन ‘महक’ ने 28 अगस्त को 23 साल पूरे कर नया रिकॉर्ड बनाया है. अब महक की इतनी लंबी उम्र और बढ़ती उम्र में भी उसकी बेहतर सेहत का वैज्ञानिक रहस्य तलाशा जाएगा. इसके लिए वाइल्डलाइफ इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (WII) के वैज्ञानिक महक पर रिसर्च करेंगे.

रिसर्च में महक की जेनेटिक संरचना, DNA, जैविक प्रक्रियाओं, खान-पान, वैक्सीनेशन और स्वास्थ्य देखभाल का अध्ययन किया जाएगा. खास तौर पर यह पता लगाने की कोशिश होगी कि क्या महक के शरीर में कोई ऐसा विशेष जीन है, जिसकी वजह से वह उम्र बढ़ने के बावजूद बुढ़ापे से जुड़ी बीमारियों से बची हुई है.

कैद में 16-18 साल, महक ने 23 साल पूरे किए-
आमतौर पर कैद में बाघों की उम्र करीब 16 से 18 साल तक मानी जाती है, जबकि जंगल में शिकार, संघर्ष और दूसरे जोखिमों के कारण उनकी उम्र इससे भी कम हो सकती है. ऐसे में महक का 23 साल की उम्र तक स्वस्थ रहना वन्यजीव विशेषज्ञों के लिए भी अध्ययन का विषय है.

28 अगस्त 2004 को जयपुर के नाहरगढ़ बायोलॉजिकल पार्क में जन्मी महक ने कभी खुले जंगल का जीवन नहीं देखा. इसके बावजूद 23 साल की उम्र में उसके दांत और पंजे मजबूत हैं और उसकी सक्रियता भी बनी हुई है. उसके साथ जन्मी बहन रंभा की करीब छह महीने पहले मौत हो चुकी है.

रिसर्च से बन सकती है नई गाइडलाइन-
महक की सेहत और लंबी उम्र के पीछे के कारण सामने आने पर देश के दूसरे चिड़ियाघरों को भी फायदा मिल सकता है. उसके खान-पान, इलाज, वैक्सीनेशन और तनावमुक्त वातावरण से जुड़ी व्यवस्थाओं का अध्ययन कर बुजुर्ग बाघों की देखभाल के लिए नई गाइडलाइन तैयार करने में मदद मिल सकती है.

महक के अंगों और दांत-पंजों की कार्यक्षमता का अध्ययन बूढ़े बाघ, शेर और तेंदुओं के इलाज में भी उपयोगी साबित हो सकता है. वहीं, उसके तनावमुक्त जीवन और व्यवहार का अध्ययन वन्यजीवों के मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर तरीके से समझने में मदद करेगा.

नाहरगढ़ से अभेड़ा तक महक का सफर-
2004:
28 अगस्त को जयपुर के नाहरगढ़ जैविक उद्यान में जन्म.

2012: पहली बार कोटा लाई गई। बाद में पुराने चिड़ियाघर से वापस जयपुर भेजी गई.

2023: अभेड़ा बायोलॉजिकल पार्क बनने के बाद 1 मार्च को बाघ नाहर के साथ कोटा लाई गई.

2026: 28 अगस्त को 23 साल पूरे किए और देश की सबसे बुजुर्ग जीवित बाघिन का रिकॉर्ड बनाया.

20 साल तक जिंदा रही थी स्वाति-
महक से पहले कैप्टिविटी में सबसे अधिक उम्र तक जीवित रहने वाली बाघिन का रिकॉर्ड गुवाहाटी के चिड़ियाघर की स्वाति के नाम बताया जाता है. स्वाति करीब 20 साल की उम्र तक जीवित रही थी और 2017 में उसकी मौत हुई थी. अब महक ने 23 साल की उम्र पूरी कर यह रिकॉर्ड पीछे छोड़ दिया है.

LED स्क्रीन पर दिखाई जाएगी महक की कहानी-
अभेड़ा प्रशासन महक की जिंदगी और उसके सफर पर डॉक्यूमेंट्री भी तैयार करवाएगा. इसमें नाहरगढ़ में जन्म से लेकर कोटा पहुंचने और 23 साल की उम्र तक स्वस्थ रहने की कहानी दिखाई जाएगी. पार्क में लगी LED स्क्रीन के जरिए पर्यटकों को यह डॉक्यूमेंट्री दिखाई जाएगी.

प्रमोद धाकड़, डीएफओ, वन्यजीव विभाग, कोटा ने बताया कि महक की लंबी उम्र का वैज्ञानिक कारण जानने के लिए WII के वैज्ञानिकों, डॉक्टरों और CCF से चर्चा कर DNA सैंपलिंग और विस्तृत स्टडी कराई जाएगी. इसके साथ ही महक पर डॉक्यूमेंट्री भी तैयार करवाई जा रही है.

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