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लखनऊ का ये Didi’s Food बना बेसहारा महिलाओं का सहारा... 15 सालों से लोगों तक पहुंचा रहा अपना स्वादिष्ट खाना

Didi's Food में काम करने वाली हर महिला अपने पैरों पर तो खड़ी है और संघर्ष कर रही है. यहां हर ज़रूरतमंद महिला को काम मिलता है. पहले अचार, फिर मसाले, फिर लड्डू , फिर नमकीन और उसके बाद केटरिंग का व्यवसाय शुरू हुआ. इस all women team ने सब कर दिखाया.

Didi's Food Didi's Food
हाइलाइट्स
  • किसी को वापस नहीं लौटाते

  • हर महिला की अलग कहानी

अक्सर लोग किसी सफल बिजनेस मॉडल की सफलता की कहानी जानना चाहते हैं. कहीं बिज़नेस की स्ट्रैटेजी खास होती है तो कहीं मार्केटिंग बिजनेस को सफल बना देती है. लेकिन आज हम आपको एक ऐसे बिज़नेस के बारे में बता रहे हैं जिसकी सफलता की सबसे बड़ी वजह है इससे जुड़े लोगों का हौंसला और एक दूसरे की मदद का जज़्बा है. लखनऊ के didi’s food लेबल से बिकने वाले अचार, मसाले, लड्डू की कहानी, जिसे इनको बनाने वाली इस ‘All women’ team ने न सिर्फ़ बनाया बल्कि अपने हौंसले से बाज़ार तक पहुंचाया है.

एक दूसरे का हाथ बंटाती और एक दूसरे का दुःख सुख बांटती इन महिलाओं की एक अलग कहानी है. सबका अलग दर्द है. बस कुछ एक है तो वो है सबका जज़्बा. ज़िंदगी की मुश्किलों से निकलने और हार न मानने  का हौंसला.

हर महिला की अलग कहानी
इस किचन में काम करने वाली शशि की आंखें आज भी अपनी बात कहते हुए भर आती हैं. पति ने साथ नहीं दिया. विरोध किया तो फिर जलाकर मारने की कोशिश की,पर जब क़िस्मत से बची तो शशि ने तय किया कि वो अपने पैरों पर खड़ी होगी.आज Didi’s Food में शशि के बनाए स्नैक्स और लड्डू का हर कोई दीवाना है. ऐसी ही कई कहानी यहाँ की हर दीदी की है।कैसे शुरुआत हुई इस सफ़र की?

किसी को वापस नहीं लौटाते
महिलाओं की मदद के लिए शुरू किया ये काम इतना आसान नहीं था. यहां हर महिला अपने पैरों पर तो खड़ी होने के लिए संघर्ष कर ही रही थी पर अपने बिखरे घर को भी सहेज रही थी. अपने आत्मसम्मान की भी लड़ाई लड़ रही थी. लेकिन ये इन महिलाओं का और इनको साथ देने वाली वीना आनंद का जज़्बा ही था कि एक के बाद एक रुकावटें दूर होती गयीं. वीना बताती हैं कि जब लोगों को पता चलता कि यहां ज़रूरतमंद महिलाओं को काम मिलता है तो सब आ जाती हैं. पहले अचार, फिर मसाले, फिर लड्डू , फिर नमकीन और उसके बाद केटरिंग का व्यवसाय शुरू हुआ. इस all women team ने सब कर दिखाया . आज didi’s food की केटरिंग कई schools और Tata जैसे बड़े प्रतिष्ठानों में भी चलती है. यहां के पैक नमकीन मॉल में बिकते हैं.

यहां 2010 में आयी कुंती हाल ही में अमेरिका में ट्रेनिंग करके आई है. कुंती अब इसका मार्केटिंग सम्भालती है. कुंती ने बताया कि इस व्यवसाय के सफल होने के पीछे सबसे ख़ास बात यह है कि यहां काम न आने की वजह से किसी को लौटाया नहीं जाता. काम की दक्षता आ जाती है बस जज़्बा ज़रूरी है. जब तक काम नहीं आता दूसरों के साथ मिल कर काम करती हैं.