khichdi (Photo- Pixabay)
khichdi (Photo- Pixabay)
मकर संक्रांति पर उत्तर प्रदेश, बिहार समेत देश के कई हिस्सों में खिचड़ी खाने का रिवाज है. खिचड़ी गांवों से लेकर शहरों तक में काफी पॉपुलर है. बंगाल से लेकर यूपी तक, बिहार से लेकर महाराष्ट्र तक खिचड़ी खाई जाती है. हर जगह खिचड़ी को अलग तरीके से बनाया जाता है. लेकिन हर जगह चावल और दाल का ही इस्तेमाल किया जाता है.
मिजाज से लेकर सेहत तक को बेहतर रखने वाली खिचड़ी की लोकप्रियता इतनी है कि इसपर अनगिनत किस्से, मुहावरे बन चुके हैं. देशभर में खिचड़ी को लेकर कई मुहावरे फेमस हैं. चलिए आपको खिचड़ी वाले कुछ पॉपुलर मुहावरों के बारे में बताते हैं.
खिचड़ी पकाना-
देश के हिंदी पट्टी में खिचड़ी पकाना मुहावरे का खूब इस्तेमाल किया जाता है. खिचड़ी पकाना मुहावरें का मतलब गुप्त विचार विमर्श करना होता है. अगर दो लोग बैठकर चुपचाप धीरे-धीरे बातचीत कर रहे हैं और तीसरा आता है तो वो पूछता है कि क्या खिचड़ी पक रही है. इसके अलावा सियासी तौर पर भी इस मुहावरे का इस्तेमाल किया जाता है. इसका इस्तेमाल साजिश के लिए भी किया जाता है.
बीरबल की खिचड़ी-
ये मुहावरा काफी लोकप्रिय है. ये गांव-गांव में फेमस है. इसका खूब इस्तेमाल होता है. बीरबल की खिचड़ी मुहावरे का मतलब दूर की कौड़ी से है. अगर कोई काम नहीं हो पा रहा है या उसके होने की संभावना नहीं है तो इस मुहावरे का इस्तेमाल होता है. लोग कहते हैं कि बीरबल की खिचड़ी पक रही है.
खिचड़ी कर देना-
इस मुहावरे का इस्तेमाल भी खूब होता है. अक्सर लोगों को कहते सुना होगा कि सब खिचड़ी कर दिया. इसका मतलब है कि सब घालमेल कर देना. अगर किसी बात को इतना घालमेल कर दिया जाए कि असली बात समझ ही नहीं आए तो इसे कहते है कि उसने सब खिचड़ी कर दिया.
अपनी अलग खिचड़ी पकाना-
इस मुहावरे का मतलब होता है कि इतना स्वार्थी हो जाना कि हर समय सिर्फ अपनी ही बात करते रहना, दूसरे की बातों को नहीं सुनने पर लोग कहते हैं कि ये अपनी अलग खिचड़ी पका रहे हैं.
डेढ़ चावल की खिचड़ी-
इस मुहावरे का इस्तेमाल काफी कम होता है. लेकिन कभी-कभी लोग इसका इस्तेमाल करते हैं. इसका मतलब होता है कि ऐसा व्यक्ति जो किसी भी सूरत में अपनी अलग राय रखता हो.
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