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अंतिम संस्कार के बाद घर वाले करा रहे थे शांति पाठ...तभी अचानक घर लौट आया शख्स, जिंदा देखकर परिवार और पुलिस भी रह गई हैरान

अंतिम संस्कार की सूचना मिलने पर कमल की पत्नी सुनीता गांव पहुंची, लेकिन उसे अंतिम संस्कार में शामिल नहीं होने दिया गया. सुनीता को पूरा विश्वास था कि उसका पति जिंदा है.

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उत्तर प्रदेश के औरैया जिले से एक हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है. जहां अंतिम संस्कार कर देने के बाद भी शख्स घर लौट आया. अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर जिस शव का अंतिम संस्कार किया गया, वह किसका था?

हाईवे किनारे मिला था अज्ञात शव, भाई ने की पहचान
मामला औरैया के अजीतमल कोतवाली क्षेत्र का है. 18 जुलाई को भीखेपुर नेशनल हाईवे के किनारे करीब 40 वर्षीय अज्ञात व्यक्ति का शव मिला था. पुलिस ने पंचनामा भरकर शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया और पहचान के लिए सोशल मीडिया पर तस्वीरें जारी कीं. 20 जुलाई को सैदपुर अड्डा निवासी दशरथ ने शव की पहचान अपने छोटे भाई कमल सिंह के रूप में की. इसके बाद पोस्टमार्टम के बाद शव परिजनों को सौंप दिया गया और 21 जुलाई को अंतिम संस्कार कर दिया गया.

पत्नी को था भरोसा- पति जिंदा है
अंतिम संस्कार की सूचना मिलने पर कमल की पत्नी सुनीता गांव पहुंची, लेकिन उसे अंतिम संस्कार में शामिल नहीं होने दिया गया. सुनीता को पूरा विश्वास था कि उसका पति जिंदा है. उसने उस मोबाइल नंबर पर कॉल किया, जिससे पहले कमल उससे बात करता था. फोन उठाने वाले से कमल की बात कराई गई. कमल से बात होते ही सुनीता ने पूरी घटना बताई और तुरंत घर लौटने को कहा.

शांति पाठ में पहुंचा कमल, सब रह गए दंग
उस समय कमल ग्वालियर में प्लंबर का काम कर रहा था. पत्नी की बात सुनते ही वह गांव के लिए रवाना हो गया. संयोग से जब वह घर पहुंचा, तब उसके नाम का शांति पाठ चल रहा था. दरवाजे पर कमल को जिंदा देखकर परिवार के लोग और गांव वाले हैरान रह गए. किसी को अपनी आंखों पर भरोसा नहीं हो रहा था. सूचना मिलते ही पुलिस भी गांव पहुंच गई और कमल व उसकी पत्नी से पूछताछ की.

डेढ़ साल से घर से बाहर था कमल
कमल ने बताया कि वह करीब डेढ़ साल से घर से बाहर रह रहा था. पहले पंजाब में नौकरी की, फिर ट्रक पर हेल्पर का काम किया. बाद में वह ग्वालियर जाकर प्लंबर का काम करने लगा. कुछ दिन पहले वह अपनी ससुराल गया था, लेकिन वहां कोई नहीं मिला, इसलिए वापस ग्वालियर लौट गया. इसी दौरान उसके मृत होने की खबर गांव पहुंच गई.

अब पुलिस के सामने सबसे बड़ा सवाल- आखिर शव किसका था?
पुलिस का कहना है कि 18 जुलाई को मिले अज्ञात शव की पहचान सोशल मीडिया के जरिए कराई गई थी. परिजनों ने उसे कमल सिंह बताकर पहचान की, जिसके आधार पर पोस्टमार्टम और अंतिम संस्कार कराया गया. 25 जुलाई को कमल की पत्नी ने सूचना दी कि उसका पति जीवित है और घर लौट आया है. अब पुलिस इस बात की जांच कर रही है कि जिस शव का अंतिम संस्कार कमल समझकर किया गया, वह आखिर किस व्यक्ति का था.

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