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नवजात को गोद में लेकर मां ने दी 12वीं बोर्ड की परीक्षा, दो दिन पहले ही हुई है डिलीवरी

शीतल की शादी दो साल पहले हुई थी. वह श्री बश्वेश्वर कॉलेज की छात्रा हैं. उन्होंने बताया कि दिन में उनके पति काम पर चले जाते हैं और घर पर बच्चे की देखभाल के लिए कोई नहीं था.

mother writes exam with newborn (Photo: Representational ) mother writes exam with newborn (Photo: Representational )
हाइलाइट्स
  • कॉलेज ने बनाया विशेष मातृस्नेह कक्ष

  • 861 छात्रों के बीच बनी प्रेरणा की मिसाल

महाराष्ट्र के नांदेड़ में 21 वर्षीय महिला ने अपनी 10 दिन की नवजात बच्ची को साथ लेकर 12वीं बोर्ड की परीक्षा दी. बुधवार को वह पॉलिटिकल साइंस का पेपर देने परीक्षा केंद्र पहुंचीं. इससे पहले 10 फरवरी को डिलीवरी के महज दो दिन बाद उन्होंने अंग्रेजी का पेपर भी दिया था. उस समय उनकी बहन साथ में थी.

कॉलेज ने बनाया 'मातृस्नेह कक्ष’'
21 वर्षीय शीतल चंद्रकांत चिट्टे की लगन को देखते हुए People's College प्रशासन ने परीक्षा केंद्र पर विशेष 'मातृस्नेह कक्ष' तैयार किया. कमरे में बच्चे के लिए पालना रखा गया, ताकि शीतल आराम से परीक्षा लिख सकें और बच्ची सुरक्षित रहे. कॉलेज प्रशासन का यह कदम मिसाल बन गया.

दो साल पहले हुई थी शादी
शीतल की शादी दो साल पहले हुई थी. वह श्री बश्वेश्वर कॉलेज की छात्रा हैं. उन्होंने बताया कि दिन में उनके पति काम पर चले जाते हैं और घर पर बच्चे की देखभाल के लिए कोई नहीं था. 12वीं की परीक्षा उनके भविष्य के लिए बेहद अहम है, इसलिए उन्होंने इसे छोड़ने के बजाय हिम्मत दिखाना बेहतर समझा. परिवार ने भी उनके फैसले का पूरा समर्थन किया.

प्रशासन ने की पहल की सराहना
नांदेड़ के शिक्षा अधिकारी माधव सालगर ने कॉलेज की पहल की सराहना करते हुए कहा कि आगे भी ऐसी छात्राओं के लिए परीक्षा केंद्रों पर विशेष व्यवस्था की जाएगी, ताकि वे पढ़ाई जारी रखने के लिए प्रेरित हों.
वहीं Maharashtra State Board of Secondary and Higher Secondary Education के लातूर डिवीजन के अध्यक्ष सुधाकर तेलंग ने इसे राज्य में पहली ऐसी पहल बताया.

861 छात्र दे रहे परीक्षा
महाराष्ट्र बोर्ड की हायर सेकेंडरी सर्टिफिकेट (HSC) परीक्षाएं 10 फरवरी से शुरू हुई हैं. इस केंद्र पर कुल 861 परीक्षार्थी परीक्षा दे रहे हैं और व्यवस्था सुचारु रूप से चल रही है. शीतल की कहानी ने यह साबित कर दिया कि अगर इरादे मजबूत हों, तो कोई भी परिस्थिति सपनों की राह नहीं रोक सकती.

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