
Mughal and Modern Art Fusion
Mughal and Modern Art Fusion
कैनवास पर ब्रश चलता है और देखते ही देखते सफेद रंग की खाली सतह पर तस्वीर जीवंत हो उठती है. कहीं चेहरे की आंखों में भाव नजर आते हैं तो कहीं रंगों की बारीकी पूरी तस्वीर को खास बना देती है. यह हुनर है मुजफ्फरपुर की 21 साल की पलक वर्मा का, जिन्होंने बचपन के शौक को अब अपनी पहचान बना लिया है.
पलक को पेंटिंग का शौक LKG से ही था. शुरुआत स्केचिंग से हुई और धीरे-धीरे एक्रिलिक पेंटिंग समेत अलग-अलग आर्ट फॉर्म सीखती चली गईं. आज वह मुगल आर्ट और मॉडर्न आर्ट के साथ मिनिएचर, पोस्टर, नेचर और एब्सट्रैक्ट आर्ट में भी प्रयोग कर रही हैं.
तस्वीर बनाने से पहले बारीकी से समझती हैं हर डिटेल
पलक के लिए पेंटिंग सिर्फ कैनवास पर रंग भरना नहीं है. किसी तस्वीर को पेंटिंग में बदलने से पहले वह उसकी हर छोटी-बड़ी डिटेल को ध्यान से देखती हैं. खासकर पोर्ट्रेट बनाते समय चेहरे के भाव और आंखों की बारीकियों पर उनका सबसे ज्यादा ध्यान रहता है.

एक स्केच या पेंटिंग को पूरा करने में उन्हें दो से तीन दिन तक लग जाते हैं. पलक कहती हैं कि फिनिशिंग और डिटेलिंग में काफी समय लगता है. उनका लक्ष्य अलग-अलग तरह की आर्ट सीखकर अपनी कला को और बेहतर बनाना है.
पिता ज्वेलरी आर्टिस्ट, बेटी ने उनसे सीखी बारीकी
पलक की कला के पीछे उनके पिता की सीख भी बड़ी वजह है. उनके पिता खुद ज्वेलरी आर्टिस्ट हैं. यानी बारीक डिजाइन और कारीगरी उनके परिवार का हिस्सा रही है. बचपन से ही पिता ने पलक की पेंटिंग में रुचि को पहचाना और उसे निखारने में मदद की.
पिता सिर्फ बेटी की तारीफ नहीं करते थे, बल्कि पेंटिंग में कमी दिखने पर उसे सुधारने की सलाह भी देते थे. शुरुआत में पलक को लगता था कि शायद पापा को उनकी पेंटिंग पसंद नहीं आती, लेकिन बाद में उन्हें समझ आया कि गलतियां बताने वाला ही असल में बेहतर बनाने में मदद करता है.
राजा रवि वर्मा से प्रेरणा, पोर्ट्रेट पेंटिंग में खास दिलचस्पी
पलक मशहूर चित्रकार राजा रवि वर्मा की कला से भी काफी प्रभावित हैं. खासकर उनके पोर्ट्रेट पेंटिंग के काम ने पलक को आकर्षित किया. यही वजह है कि वह चेहरों के भाव और आंखों की बारीकियों को कैनवास पर उतारना पसंद करती हैं.

सोशल मीडिया से मिला प्लेटफॉर्म, अब मिलने लगे ऑर्डर
पलक की कला अब घर और स्टूडियो तक सीमित नहीं है. सोशल मीडिया ने उनके हुनर को लोगों तक पहुंचाने का काम किया. उनकी बनाई पेंटिंग्स को पसंद करने वाले लोग अब उनसे तस्वीरों को पेंटिंग में बदलने के ऑर्डर भी दे रहे हैं. इन ऑर्डर से होने वाली कमाई से पलक अपनी कला से जुड़े खर्च निकाल रही हैं.
वह रोज करीब चार से पांच घंटे पेंटिंग की प्रैक्टिस करती हैं. अर्जेंट ऑर्डर मिलने पर कभी-कभी दिन-रात काम करना पड़ता है. अब पलक का अगला सपना अपनी पेंटिंग्स की बड़ी एग्जीबिशन लगाना है. मुजफ्फरपुर की यह युवा कलाकार मानती हैं कि पहचान सिर्फ हुनर से नहीं, बल्कि लगातार अभ्यास से बनती है. उनके ब्रश का हर स्ट्रोक इसी मेहनत और बड़े सपने की कहानी कहता है.