
Desi Water Purifier
Desi Water Purifier
गर्मी का मौसम शुरू होते ही देश के कई हिस्सों में पीने के साफ पानी की समस्या गंभीर हो जाती है. खासकर गांवों और छोटे कस्बों में आज भी बड़ी आबादी शुद्ध पानी से वंचित है, जिससे लोगों को कई बीमारियों का सामना करना पड़ता है. ऐसे में बिहार के मुजफ्फरपुर से एक सकारात्मक पहल सामने आई है. यहां फकीरा चौक की रहने वाली वंदना शर्मा ने देसी तकनीक पर आधारित 'बायो सैंड वाटर प्यूरीफायर' तैयार किया है, जो कम लागत में लोगों को शुद्ध पानी उपलब्ध करा रहा है.
बिना बिजली और केमिकल के काम करने वाली तकनीक
यह प्यूरीफायर रेत, कंकड़ और प्राकृतिक जैविक परतों की मदद से पानी को साफ करता है. इसमें किसी तरह की बिजली या केमिकल की जरूरत नहीं होती. पानी धीरे-धीरे इन परतों से गुजरता है, जिससे गंदगी, बैक्टीरिया और हानिकारक कण फिल्टर हो जाते हैं.
पानी की बचत भी और पर्यावरण के अनुकूल भी
इस तकनीक की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें पानी की बर्बादी नहीं होती, जबकि महंगे RO सिस्टम में एक लीटर शुद्ध पानी के लिए कई लीटर पानी बर्बाद हो जाता है. यही वजह है कि यह प्यूरीफायर पर्यावरण के अनुकूल भी है.

इस देसी प्यूरीफायर की कीमत करीब 2000 रुपये रखी गई है, जिससे यह आम लोगों की पहुंच में है. अब तक करीब 356 घरों में इसे लगाया जा चुका है और इसकी मांग लगातार बढ़ रही है. लोग दूर-दूर से इसे खरीदने के लिए पहुंच रहे हैं.
ट्रेनिंग से शुरुआत तक का सफर
वंदना शर्मा बताती हैं कि उन्होंने इस तकनीक की ट्रेनिंग उत्तराखंड में ली थी, जहां उनके मॉडल को सराहना भी मिली. इसके बाद उन्होंने मुजफ्फरपुर लौटकर इसे स्थानीय स्तर पर शुरू किया, ताकि कम लागत में ज्यादा से ज्यादा लोगों को शुद्ध पानी मिल सके.
30 साल तक खराब नहीं होता ये प्यूरीफायर
यह प्यूरीफायर करीब 30 वर्षों तक काम कर सकता है. एक बार में इसमें 14 लीटर पानी डाला जाता है, जो लगभग आधे घंटे में शुद्ध हो जाता है. यदि इसे लंबे समय तक इस्तेमाल नहीं किया जाए, तो इसकी बालू बदलना जरूरी होता है. क्षमता की बात करें तो यह प्यूरीफायर प्रति मिनट करीब एक लीटर पानी शुद्ध करता है और एक दिन में लगभग 84 लीटर पानी तैयार कर सकता है, जो एक परिवार के लिए पर्याप्त है.

इस प्यूरीफायर को तैयार करने वाले कारीगर अभय कुमार के मुताबिक, इसकी निर्माण प्रक्रिया पूरी तरह सरल और स्थानीय है. लोहे के फ्रेम में गिट्टी, बालू और सीमेंट की परतें डाली जाती हैं, जिससे पानी छनकर साफ हो जाता है.
अगर इस तरह की देसी तकनीकों को बढ़ावा दिया जाए, तो जल संकट से जूझ रहे लाखों लोगों को राहत मिल सकती है और सुरक्षित पेयजल की समस्या काफी हद तक हल हो सकती है.
-मणिभूषण शर्मा की रिपोर्ट
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