Narsinghpur Mango Farming
Narsinghpur Mango Farming
कहते हैं कि खेती में सफलता सिर्फ जमीन से नहीं, बल्कि सोच से मिलती है. मध्य प्रदेश में नरसिंहपुर जिले के एक किसान ने यह साबित कर दिखाया है. जिस जमीन को लोग कम उपजाऊ मानते थे, वहां आज विदेशी तकनीक से तैयार आम के बगीचे लाखों का कारोबार कर रहे हैं. इतना ही नहीं, यहां उगाए गए आम दुबई और लंदन तक पहुंच चुके हैं.
70 एकड़ में फैला है आम का बगीचा-
नरसिंहपुर जिले के छेना कछार गांव का एक आम का बगीचा किसी कृषि प्रयोगशाला से कम नहीं है. करीब 70 एकड़ क्षेत्र में विकसित इस बगीचे में आम की कई उन्नत किस्में लगाई गई हैं. नदी किनारे की जिस जमीन को खेती के लिए ज्यादा उपयुक्त नहीं माना जाता था, उसी भूमि पर आज हजारों आम के पेड़ किसानों के लिए मिसाल बन गए हैं.
इजरायल की तकनीक से लगाए पौधे-
इस बगीचे को किसान विजय पाल सिंह पटेल ने तैयार किया है. मूल रूप से छिंदवाड़ा के रहने वाले विजय पाल ने पारंपरिक खेती से अलग हटकर बागवानी को अपनाया और इजराइल की अल्ट्रा हाई डेंसिटी तकनीक से आम के पौधे लगाए. इस तकनीक में कम जगह में अधिक पौधे लगाए जाते हैं, जिससे उत्पादन और मुनाफा दोनों बढ़ते हैं.
केसर आम के 6 हजार पेड़-
बगीचे में केसर आम की भी बड़े पैमाने पर खेती की जा रही है, जो मध्य प्रदेश में कम देखने को मिलती है. विजय पाल ने जम्बो केसर आम के करीब छह हजार पौधे लगाए हैं. इस प्रजाति का एक आम डेढ़ से दो किलो तक वजन का हो सकता है. 2 वर्ष पहले यहां के आम दुबई और लंदन तक निर्यात भी किए जा चुके हैं.
बैगिंग तकनीक का भी इस्तेमाल-
उत्पादन के साथ गुणवत्ता पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है. आम के फलों पर विशेष बैग लगाए जाते हैं, जिसे बैगिंग तकनीक कहा जाता है. इससे फलों का रंग, चमक और गुणवत्ता बेहतर होती है. साथ ही कीटों से सुरक्षा मिलती है और दवाओं का असर सीधे फल पर नहीं पड़ता है.
(अनुज ममार की रिपोर्ट)
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