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रेड लाइट जंप, ओवर स्पीडिंग जैसे नियमों का उल्लंघन पड़ेगा भारी.. लाइसेंस हो सकता है रद्द, जानें पूरा जानकारी

अक्सर लोग वाहन चलाते समय नियमों का उल्लंघन करते हैं. लेकिन एक बार गलती करने के बाद भी वह दोबारा गलती करते हैं. उनकी इस फितरत को दूर करने के लिए एक नया सिस्टम लागू होगा. जिसके तहत नियमों के उल्लघंन पर उनका डीएल रद्द हो सकता है.

Driving Licence Cancellation Driving Licence Cancellation

देशभर में हर दिन करोड़ों वाहन सड़कों पर चलते हैं. भागदौड़ भरी जिंदगी में समय से पहले मंजिल तक पहुंचने की चाह में लोग अक्सर ट्रैफिक नियमों को नजरअंदाज कर देते हैं. लेकिन यही छोटी लापरवाही कभी-कभी बड़े हादसों का कारण बन जाती है. ओवरस्पीडिंग, रेड लाइट जंप करना, मोबाइल फोन पर बात करते हुए गाड़ी चलाना या नशे की हालत में ड्राइविंग करना. ये सभी आदतें अब केवल नियम उल्लंघन नहीं रहीं, बल्कि जानलेवा खतरे का रूप ले चुकी हैं. हर साल सड़क दुर्घटनाओं में हजारों लोग अपनी जान गंवाते हैं और कई परिवार हमेशा के लिए बिखर जाते हैं.

नियमों के उल्लंघन पर कटेगा प्वाइंट
सड़क सुरक्षा को मजबूत बनाने के लिए सरकार ड्राइविंग लाइसेंस से जुड़ी एक नया सिस्टम लागू करने की तैयारी में है. इस प्रस्तावित सिस्टम को 'ग्रेडेड अंक प्रणाली' कहा जा रहा है. इसके तहत हर ड्राइवर के लाइसेंस पर निर्धारित प्वाइंट दिए जाएंगे. जैसे ही कोई चालक ट्रैफिक नियमों का उल्लंघन करेगा, उसके लाइसेंस से प्वाइंट काट लिए जाएंगे. तेज रफ्तार, सिग्नल तोड़ना, गलत दिशा में वाहन चलाना या शराब पीकर ड्राइविंग करना जैसे गंभीर अपराधों पर ज्यादा प्वाइंट कट सकते हैं.

ड्राइवर बनेगा जिम्मेदार
यदि किसी ड्राइवर के सभी प्वाइंट समाप्त हो जाते हैं, तो उसका लाइसेंस छह महीने तक के लिए रद्द किया जा सकता है. वहीं, बार-बार नियम तोड़ने वालों का लाइसेंस पर्मानेंट रूप से रद्द करने का प्रावधान भी किया जा सकता है. सरकार का मानना है कि यह सिस्टम ड्राइविंग में डिसिपलिन और जिम्मेदारी की भावना को बढ़ावा देगी.

क्यों जरूरी है सख्ती?
भारत में सड़क सुरक्षा लंबे समय से एक गंभीर चुनौती बनी हुई है. हर वर्ष लाखों सड़क हादसे दर्ज किए जाते हैं, जिनमें बड़ी संख्या में लोगों की जान चली जाती है. ओवरस्पीडिंग, हेलमेट और सीट बेल्ट का इस्तेमाल न करना, तथा ड्राइविंग के दौरान मोबाइल का उपयोग. ये हादसों की प्रमुख वजहें हैं. एस्टपर्ट्स का कहना है कि केवल जुर्माना बढ़ा देने से समस्या का स्थायी समाधान संभव नहीं है.

इसी सोच के साथ सरकार अब ड्राइवरों की मानसिकता और व्यवहार में बदलाव लाने पर जोर दे रही है. अंक आधारित यह नई प्रणाली सिर्फ आर्थिक दंड तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि सीधे तौर पर ड्राइवर के लाइसेंस को प्रभावित करेगी. जब लोगों को यह महसूस होगा कि नियम तोड़ने पर उनके लाइसेंस के प्वाइंट कम हो सकते हैं, तो वे स्वाभाविक रूप से अधिक सतर्क और जिम्मेदार बनेंगे.