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ये है देश का सबसे अमीर गांव, हर परिवार में है एक NRI... गांव वालों की रईसी देखकर उड़ जाएंगे होश

Indias Richest Village: एक ऐसा गांव जहां खेतों से ज्यादा बैंकों की चर्चा होती है. जहां की गलियों में धूल नहीं, डॉलर की महक आती है. एक ऐसा गांव जहां 10 हजार की आबादी है, अरबों का टर्नओवर है, लेकिन एक भी पुलिस थाना नहीं है. जी हां, हम बात कर रहे हैं गुजरात के 'धर्मज' की, जिसे 'NRI गांव' कहा जाता है. आखिर बिना पुलिस और बिना सरकारी मदद के ये गांव कैसे बना ग्लोबल मॉडल? चलिए आपको बताते हैं.

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NRI Village of India: देश के गांवों की जो तस्वीर आपके दिमाग में है, उसे आज ये रिपोर्ट बदल देगी. एक ऐसा गांव जहां खेतों से ज्यादा बैंकों की चर्चा होती है. जहां की गलियों में धूल नहीं, डॉलर की महक आती है. एक ऐसा गांव जहां 10 हजार की आबादी है, अरबों का टर्नओवर है, लेकिन एक भी पुलिस थाना नहीं है. जी हां, हम बात कर रहे हैं गुजरात के 'धर्मज' की, जिसे 'NRI गांव' कहा जाता है. आखिर बिना पुलिस और बिना सरकारी मदद के ये गांव कैसे बना ग्लोबल मॉडल? चलिए आपको बताते हैं.

इसे गांव कहें या कोई यूरोपीय शहर? गुजरात के आणंद जिले का 'धर्मज' गांव, आज देश के लिए एक पहेली भी है और मिसाल भी. चरोतर की इस धरती पर कदम रखते ही आपको एहसास हो जाएगा कि आप किसी मामूली जगह पर नहीं हैं. यहां की भव्यता का आलम ये है कि गांव की बैंकों में करीब 8,000 करोड़ रुपये से ज्यादा की फिक्स्ड डिपॉजिट जमा है. जी हां, आपने सही सुना... 8,000 करोड़ से ज्यादा! यहां करीब 13 से ज्यादा नेशनल और प्राइवेट बैंक अपनी शाखाएं खोलकर बैठे हैं, क्योंकि यहां का किसान भी 'करोड़पति' है.

धर्मज कैसे बना स्मार्ट गांव
दरअसल, धर्मज की इस तरक्की की नींव 19वीं सदी में ही पड़ गई थी. आज इस गांव का शायद ही कोई ऐसा घर होगा, जिसका सदस्य विदेश में न हो. ब्रिटेन, कनाडा, अमेरिका से लेकर अफ्रीका तक, करीब 3,000 परिवार सात समंदर पार बसे हैं. लेकिन ये 'ग्लोबल गुजराती' अपनी मिट्टी को नहीं भूले. हर साल 'धर्मज डे' मनाया जाता है, जहां डॉलर और पाउंड बरसते हैं, सिर्फ और सिर्फ अपने गांव के विकास के लिए.

गांव में एक भी पुलिस थाना नहीं
हैरानी की बात सिर्फ पैसा नहीं है. धर्मज की सबसे बड़ी शक्ति है यहां की 'शांति'. 10 हजार से ज्यादा की आबादी, लेकिन गांव में एक भी पुलिस थाना नहीं है. यहां न कोई विवाद होता है, न कोई एफआईआर. अगर कोई समस्या आती भी है, तो गांव के बुजुर्ग और युवा आपसी समझ से उसे सुलझा लेते हैं. पुलिस की लाठी से ज्यादा यहां 'भाईचारे' की धाक है.

इलाज का खर्च बेहद कम
​सुविधाएं ऐसी कि मेट्रो शहर भी शरमा जाएं. हाई-स्पीड वाई-फाई, वर्ल्ड क्लास ड्रेनेज और सड़कों पर दूधिया रोशनी. सेहत की बात करें तो यहां आई हॉस्पिटल से लेकर गायनेक और फिजियोथेरेपी सेंटर तक मौजूद हैं, जहां इलाज का खर्च बेहद कम है. इन सबके बीच आस्था का केंद्र है 'जलाराम मंदिर', जहां की रसोई से कोई भूखा नहीं जाता.

यहां के लोगो का कहना है की, 'हमारे पूर्वजों ने हमें सिखाया कि चाहे आप दुनिया के किसी भी कोने में चले जाओ, अपनी जड़ों को मत भूलना. आज हमारे गांव में वाई-फाई है, आधुनिक अस्पताल हैं और इंटरनेशनल लेवल के स्कूल हैं. एसी सुविधाएं जो किसी मेट्रो सिटी मे भी नही होती. यह सब हमारे NRI भाइयों के सहयोग से संभव हुआ है. यहां पर पुलिस थाना ही नहीं है, क्योंकि यहां पर सब आपसी समझ से रहते है.  

100 साल पुराने घर आज भी खड़े हैं
धर्मज सिर्फ सुविधा के लिए ही नहीं बल्कि 100 साल पुराने हेरिटेज घरों से भी जाना जाता है. आज भी पुराने घर एसे खडे है, मानो अभी ही बनवाए गए हो. यहां के पुराने घरो की कलाकृती देख कर भी आप दंग रह जाओगे. मोर, क्रिष्न, हाथी, समेत संस्कृति के ग्रंथ की कहानी मानो यहां के घर में उतारी गई हो. यहां से लोग विदेश में भले ही बस गए हो. लेकिन धरोहर को अभी भी संजो कर रखा है. भले ही धर्मज के हर घर से कोई ना कोई विदेश में बसा हो, लेकिन यही वजह होगी की आज नेशनल बैंक , अस्पताल, स्कूल जैसी संस्था में काम करते कर्मचारी धर्मज में ही रहना पसंद करते है.

धर्मज ने दुनिया को बता दिया कि अगर प्रवासी भारतीय और स्थानीय समुदाय हाथ मिला लें, तो बिना सरकारी इमदाद के भी 'स्वर्ग' रचा जा सकता है. धर्मज सिर्फ एक भौगोलिक नक्शा नहीं, बल्कि एक सोच है. एक ऐसी सोच जो बताती है कि पैसा कमाना बड़ी बात नहीं, लेकिन उस पैसे से अपनी जड़ों को सींचना असली कामयाबी है. आज धर्मज की चकाचौंध के पीछे सिर्फ डॉलर नहीं, बल्कि हर धर्मज वासी का अटूट समर्पण और एकता है.

(रिपोर्टर: हेताली एक शाह)

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