Parenting Tip
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टीनएज बच्चों की जिंदगी का ऐसा दौर होता है, जब वे तेजी से बदलते माहौल, दोस्तों और सोशल मीडिया से बहुत जल्दी प्रभावित होने लगते हैं. इस उम्र में बच्चे नई चीजें सीखना चाहते हैं और कई बार बिना सोचे-समझे दूसरों की बातों में भी आ जाते हैं. यही कारण है कि माता-पिता की जिम्मेदारी और बढ़ जाती है. अगर सही समय पर बच्चों को सही बातें सिखाई जाएं, तो वे गलत संगत, गलत आदतों और गलत फैसलों से खुद को बचा सकते हैं.
बच्चों को 'नो' कहना जरूर सिखाएं
हर बच्चे को यह समझाना जरूरी है कि हर बात मानना जरूरी नहीं होता. अगर कोई व्यक्ति उन्हें किसी ऐसी चीज के लिए कहे जिससे वह अनकंफ्रट्रेबल महसूस करें, तो उन्हें बिना डरे साफ शब्दों में मना करना आना चाहिए. कई लोग प्यार, दबाव या डर का इस्तेमाल करके बच्चों से अपनी बात मनवाने की कोशिश करते हैं. ऐसे में बच्चों को यह समझाना जरूरी है कि खुद की सुरक्षा सबसे पहले आती है और गलत चीज के लिए मना करना बिल्कुल सही बात है.
पेरेंट्स की रोक-टोक
टीनएज में बच्चों और माता-पिता के बीच मनमुटाव होना आम बात है. कई बार दोस्त या दूसरे लोग बच्चों को यह महसूस कराने की कोशिश करते हैं कि उनके पेरेंट्स उन्हें ज्यादा रोकते-टोकते हैं. लेकिन बच्चों को यह समझना चाहिए कि माता-पिता उनकी भलाई और सुरक्षा के लिए ही नियम बनाते हैं. उनकी हर बात के पीछे प्यार और चिंता छिपी होती है.
हर किसी से न शेयर करें निजी बातें
बच्चों को यह सिखाना भी जरूरी है कि वे अपनी कमजोरी, डर या पर्सनल बातें हर किसी से शेयर न करें. कई बार लोग पहले भरोसा जीतते हैं और बाद में उसी जानकारी का गलत फायदा उठाने लगते हैं. इसलिए बच्चों को समझाएं कि अपनी निजी बातें सिर्फ उन्हीं लोगों से शेयर करें, जिन पर वे पूरी तरह भरोसा करते हैं.
सफलता के लिए मेहनत जरूरी
आजकल कई बच्चे कम उम्र में जल्दी पैसे कमाने और जल्दी सफल होने का सपना देखते हैं. लेकिन इसी दौरान कुछ लोग उन्हें आसान पैसे या शॉर्टकट का लालच देकर गुमराह करने की कोशिश करते हैं. बच्चों को यह समझाना जरूरी है कि जिंदगी में सफलता पाने का कोई आसान रास्ता नहीं होता. मेहनत और सही दिशा में काम करने से ही आगे बढ़ा जा सकता है.
सोशल मीडिया पर सोच-समझकर करें शेयर
सोशल मीडिया आज बच्चों की जिंदगी का बड़ा हिस्सा बन चुका है. लाइक्स और फॉलोअर्स पाने के चक्कर में कई बच्चे अपनी निजी जिंदगी की हर बात इंटरनेट पर डालने लगते हैं. लेकिन बच्चों को यह समझाना जरूरी है कि ज्यादा पर्सनल जानकारी शेयर करना सुरक्षित नहीं होता. इससे उनकी प्राइवेसी खतरे में पड़ सकती है.