Parenting tips
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बच्चे की परवरिश आसान काम नहीं है. माता-पिता बच्चों के लिए किताबें पढ़ते हैं, एक्सपर्ट की सलाह लेते हैं और उन्हें अच्छी आदतें सिखाने की कोशिश करते हैं. फिर भी पेरेंटिंग की कुछ बातें ऐसी होती हैं, जिन्हें समय के साथ ही समझा जा सकता है. बच्चा जैसे-जैसे बड़ा होता है, माता-पिता भी उसके साथ बहुत कुछ सीखते हैं.
अगर घर में एक से ज्यादा बच्चे हैं, तो माता-पिता समझ जाते हैं कि हर बच्चा अलग होता है. किसी बच्चे को ज्यादा समय चाहिए, तो किसी को भरोसा और भावनात्मक सहारे की जरूरत होती है. इसलिए सभी बच्चों से प्यार बराबर होना चाहिए, लेकिन प्यार दिखाने का तरीका एक जैसा होना जरूरी नहीं है.
कई बार माता-पिता सोचते हैं कि उन्होंने बच्चे को सही तरीके से समझा या नहीं. कभी लगता है कि बच्चे को कम समय दिया और कभी लगता है कि जरूरत से ज्यादा डांट दिया. ऐसी चिंता होना सामान्य है. इससे पता चलता है कि माता-पिता बच्चे की परवाह करते हैं और बेहतर करने की कोशिश कर रहे हैं.
बच्चे से प्यार करना आसान है, लेकिन उसकी जिद या गुस्से के समय शांत रहना मुश्किल हो सकता है. ऐसे समय में माता-पिता को खुद पर काबू रखना सीखना पड़ता है. बच्चे की हर बात पर तुरंत गुस्सा करने के बजाय उसकी बात समझना ज्यादा जरूरी है.
जो तरीका छोटे बच्चे पर काम करता है, जरूरी नहीं कि वही तरीका किशोर बच्चे पर भी काम करे. बच्चे की उम्र के साथ उसकी सोच और जरूरतें बदलती हैं. इसलिए माता-पिता को भी अपनी पेरेंटिंग का तरीका बदलते रहना चाहिए.
आमतौर पर माना जाता है कि माता-पिता बच्चों को सिखाते हैं. लेकिन बच्चे भी माता-पिता को धैर्य, समझ और अपनी भावनाओं को संभालना सिखाते हैं. कई बार बच्चे की वजह से माता-पिता खुद को नए तरीके से समझ पाते हैं.
हर फैसले को सही करना संभव नहीं है. माता-पिता से भी गलतियां हो सकती हैं. गलती होने पर उसे मानना और बच्चे से माफी मांगना कमजोरी नहीं है. इससे बच्चा भी अपनी गलती स्वीकार करना सीखता है.
पेरेंटिंग की कोई अंतिम परीक्षा नहीं होती. बच्चे की उम्र और जरूरत के साथ माता-पिता भी सीखते रहते हैं. इसलिए खुद पर हर समय परफेक्ट बनने का दबाव डालने के बजाय बच्चे के साथ इस सफर को समझना और सीखना बेहतर है.