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EcoKaari: वाह! कमाल हो गया...प्लास्टिक वेस्ट से हैंडबैग और एक्सेसीरीज बनाती है ये कंपनी

पुणे का एक स्टार्ट-अप, इकोकारी (EcoKaari),सभी प्रकार के प्लास्टिक को इकट्ठा करता है और पारंपरिक तकनीकों का उपयोग करके इससे सुंदर-सुंदर हैंडबैग तैयार कर रहा है.

Bag Made from Plastic Bag Bag Made from Plastic Bag
हाइलाइट्स
  • प्लास्टिक करती है इकट्ठा

  • करते हैं चरखे से बुनाई

मनुष्य आए दिन किसी ना किसी तरीके से धरती को नुकसान पहुंचा रहा है. हिमालय पर पिघलती बर्फ, ओजोन डिप्लीशन आदि इसका उदाहरण हैं. हम पृथ्वी को अब और प्रदूषित करने का खतरा नहीं उठा सकते हैं इसलिए हमने चीजों को रिसाइकल करना सीख लिया है. खासकर प्लास्टिक जोकि धरती में नहीं मिलती ना ही गलती है.

हम केवल कचरे का पुनर्चक्रण कर सकते है, जितना हो सके अपने संसाधनों का पुन: उपयोग करके प्रदूषण को कम करने और धरती को स्वस्थ बनाने में मदद कर सकते हैं. पुणे का एक स्टार्टअप ऐसा ही काम कर रहा है.

प्लास्टिक करती है इकट्ठा
पुणे स्थित एक स्टार्ट-अप, इकोकारी (EcoKaari),सभी प्रकार के प्लास्टिक को इकट्ठा करता है और पारंपरिक तकनीकों का उपयोग करके इससे सुंदर-सुंदर हैंडबैग तैयार कर रहा है. 

'इको' का अर्थ होता है पर्यावरण के अनुकूल, और 'कारी' का अर्थ है कारीगर. वेबसाइट पर उनका विवरण कुछ इस प्रकार है, ''हमारा नाम कारीगरों और पर्यावरण के बीच संबंधों का प्रतिनिधित्व करता है, और वे दोनों परस्पर और अन्योन्याश्रित हैं. भारत की हस्तशिल्प विरासत ने पर्यावरण से लगातार प्रेरणा ली है, और धरती माता हमेशा से हमारे जीवन का एक अभिन्न अंग रही है." ये लोग भूमि और महासागरों को प्रदूषित करने के लिए नियत कचरे को इकट्ठा करते हैं, और इससे सभी प्रकार के उपयोगी और नैतिक रूप से उत्पादित हैंडबैग में बदल देते हैं.

कौन है फाउंडर?
नंदन भट्ट, एक इंजीनियरिंग और मार्केटिंग के बैकग्राउंड वाले व्यक्ति हैं. नंदन के पास एक अच्छा बैंक बैलेंस था और वो आराम की जिंदगी बिता रहे थे. कॉरपोरेट नौकरी करने वाले भट्ट किसी तरह प्रकृति से जुड़े. भट्ट ने इकोकारी की वेबसाइट पर लिखा, "इस तरह उन्हें तनाव मुक्त होने में मदद मिली. इस बीच उनका कई चीजों से सामना हुआ और शहर में कचरा देखकर उनका मन दुखी हो जाता था खासकर प्लास्टिक कचरा जो डिकम्पोज नहीं होता है."

 

नंदन हमेशा से एक इंटरप्रेन्योर बनना चाहते थे इसलिए उन्होंने इस मौके का फायदा उठाया और एक वर्कशॉप की स्थापना की जो बाद में इकोकारी बन गई. इसके लिए उन्होंने हार्डवेयर और कच्चे माल की व्यवस्था की, एक समान विचारधारा वाली टीम को इकट्ठा किया, उन्हें कुशल बनाया, प्रक्रियाओं को स्थापित किया, गुणवत्ता की जांच की, ग्राहकों को पिच किया. धीरे-धीरे चीजें सेट होने लगीं और इकोकारी ने आकार लेना शुरू कर दिया. 

करते हैं चरखे से बुनाई
स्टार्टअप की प्रक्रिया मैनुअल लेबर ओरिएंटेड है और इसमें कुछ हद तक शिल्प कौशल भी शामिल है. हैंडबैग से लेकर पर्स, Tote बैग और बुक कवर तक, ब्रांड के ई-स्टोर के सभी उत्पादों को कारीगरों द्वारा चरखे से बुनाई जैसी पारंपरिक तकनीकों का उपयोग करके सभी प्रकार के कचरे से हस्तनिर्मित किया गया है. बिजनेस इनसाइडर इंडिया को नंदन भट ने बताया कि उनके ब्रांड ने एक साल में, लगभग 1.7 मिलियन प्लास्टिक बैग और पैकेजिंग वस्तुओं को रिसाइकल किया, और यह अगले वित्तीय वर्ष में 4.7 मिलियन से अधिक वस्तुओं तक बढ़ सकता है.

विदेशों में भी भेज रही प्रोडक्ट्स
इकोकारी ने कूड़ा उठाने वाले संगठनों जैसे Poornam Ecovision और सहस जीरो वेस्ट के साथ करार किया है. वे दान के रूप में प्लास्टिक भी प्राप्त करते हैं और उन्हें कचरा बीनने वालों से भी खरीदते हैं. ये लोग गिफ्ट रैपर, चिप्स और कुकी पैकेट भी इकट्ठा करते हैं. इस साल इकोकारी ने 2025 करोड़ का रेवेन्यू जेनरेट किया. कंपनी अपना काम धीरे-धीरे और एक्सपेंड कर रही है. फाउंडर नंदन भट ने कहा कि टाटा समूह और डेल जैसे संगठनों ने कॉर्पोरेट गिफ्टिंग के लिए उत्पादों की सोर्सिंग के लिए इकोकारी के साथ करार किया है. उन्होंने कहा कि कंपनी यूरोप, जापान और अमेरिका जैसे देशों को भी निर्यात कर रही है.