Saharanpur Heavy house tax
Saharanpur Heavy house tax
सहारनपुर में नगर निगम का एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है, जहां एक मकान मालिक को एक साल का हाउस टैक्स 22 करोड़ 17 लाख रुपये से अधिक का भेज दिया गया. मामला नगर निगम के वार्ड नंबर-2 का है. फरहाद आलम गाड़ा के मुताबिक, उनके पास जब यह नोटिस पहुंचा तो वह रकम देखकर दंग रह गए और उन्होंने इसकी जानकारी अपने पिता इश्तियाक अहमद को दी. पहले से दिल की बीमारी से जूझ रहे पिता ने करोड़ों रुपये का टैक्स देखा तो उनकी तबीयत बिगड़ गई और वह बेड रेस्ट पर चले गए.
एक साल पहले ही बना है मकान
फरहाद का कहना है कि उनका मकान करीब एक साल पहले बनकर तैयार हुआ था और परिवार इसी दौरान यहां शिफ्ट हुआ है. उनका दावा है कि मकान की कीमत करीब 4 करोड़ रुपये है, जबकि नगर निगम की ओर से जारी नोटिस में 22 करोड़ 17 लाख 1288 रुपये का होम टैक्स बताया गया है. फरहाद के मुताबिक, इस रकम में करीब 2 करोड़ 17 लाख रुपये पानी के टैक्स के तौर पर दर्शाए गए हैं, जबकि उनके मकान में न तो पानी का कनेक्शन है और न ही पानी की पाइपलाइन और न सीवर की सुविधा है. उनका सवाल है कि आखिर नगर निगम ने किस आधार पर इतना भारी-भरकम टैक्स निर्धारित किया है.
जीआईएस सर्वे के आधार पर जारी हुआ नोटिस
पीड़ित परिवार का आरोप है कि यह नोटिस नगर निगम के जीआईएस सर्वे के आधार पर जारी हुआ है. फरहाद का कहना है कि करीब एक साल पहले उन्होंने पीडीए पाठशाला चलाई थी, जिसके बाद उनके खिलाफ एससी-एसटी एक्ट में मुकदमा दर्ज हुआ था. अब एक साल पूरा होने पर उन्होंने इस मामले को लेकर प्रेस वार्ता की और इसके बाद उनके घर 22 करोड़ रुपये से अधिक का हाउस टैक्स नोटिस पहुंच गया. फरहाद ने आरोप लगाया कि उन्होंने नगर निगम अधिकारियों से संपर्क कर अपनी आपत्ति बताई, लेकिन उन्हें अब तक कोई स्पष्ट जवाब नहीं मिला है.
इतनी बड़ी रकम कैसे दर्ज हुई?
पीड़ित इश्तियाक अहमद का कहना है कि उनकी पहले से तबीयत खराब रहती है और करोड़ों रुपये का नोटिस देखकर वह परेशान हैं. उनका कहना है कि अगर उनका मकान ही 22 करोड़ रुपये का टैक्स चुकाने के लिए रखा जा रहा है तो नगर निगम उनका मकान रख ले और उन्हें पैसे दे दे. वहीं फरहाद ने कहा कि वह इस मामले में अपने वकील से सलाह लेकर कानूनी लड़ाई लड़ेंगे. उन्होंने यह भी कहा कि वह समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ता हैं और इस मामले को पार्टी नेतृत्व के सामने रखेंगे. अब बड़ा सवाल यह है कि आखिर नगर निगम की कर निर्धारण व्यवस्था में इतनी बड़ी रकम कैसे दर्ज हुई और 22 करोड़ रुपये से अधिक का यह टैक्स नोटिस किस आधार पर जारी किया गया,नगर निगम के अधिकारियों का कहना है कि यह गलती से सिस्टम पर चढ़ गया है इसको ठीक कर दिया जाएगा.
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