

मानव जीवन में खाने में उपयोगी दाल जैसे चने की दाल, उड़द की दाल, मसूर की दाल या मूंग की दाल का नाम तो सबने सुना है, लेकिन क्या इन खाए जाने वाली दालों से गणेशजी की मूर्ति बनाई जा सकती है? तो इसका जवाब है, जी हां बिल्कुल बनाई जा सकती है. और यह कमाल किया है महाराष्ट्र के वाशिम जिले के एक गणेश मंडल ने.
10-12 किस्म की दाल हुईं इस्तेमाल
जिले के कारंजा शहर के भाजी बाजार परिसर का श्री बाल हौसी गणेश मंडल हर वर्ष की तरह इस वर्ष भी पर्यावरण पूरक गणेशजी की मूर्ति बनाई. मूर्ति बेहद सुंदर तो है ही, लेकिन विशेष भी है, इसकी विशेषता यह है कि अनाज के रूप में इस्तेमाल होने वाली दालें. इस मूर्ति में 10 से 12 प्रकार की दालों का इस्तेमाल कर मूर्ति बनाई गई है, वह भी बेहद सुंदर.
इस मूर्ति में जिन दालों का ज्यादा प्रयोग किया गया है उसमें उड़द की दाल, चना दाल और मसूर की दाल. दालों से बनी बाप्पा की यह मूर्ति काफी लुभावनी नजर आती है. गणेशजी के हाथ में थामा लड्डू, हाथों के नाखून, यहां तक कि जो आभूषण मूर्ति पर बनाए गए वह भी दालों से बने है.
8 फीट 100 किलो वजनी मूर्ति
मूर्ति की खूबसूरती इसे बनाने में की गई मेहनत का सबूत दर्शाती है, मूर्ति बनाने वाले अमित करे ने बताया कि, पहले शालू मिट्टी का ढांचा बनाया गया, उसके सभी दालें उस पर चिपकाई गई, मूर्ति को बनाने में 15 दिन का समय लगा है. मूर्ति का वजन 100 किलो से ज्यादा है और ऊंचाई 8 फिट है. मंडल के सदस्य ने बताया कि बाकी मंडलों ने भी डीजे या डेकोरेशन पर लाखों रुपए व्यर्थ खर्च न करते हुए इको फ्रेंडली मूर्ति बनानी चाहिए, क्योंकि पर्यावरण ही हमारा दैवत है, और उसे बचाना हमारा कर्तव्य है.
-ज़ाका खान की रिपोर्ट