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Independence Day: आंध्र प्रदेश के इस बुनकर ने घर बेच कर बनाया देश के लिए तिरंगा, जानिए खूबियां

शुरुआती दौर पर सत्यनारायण को सिर्फ इतना पता था कि लाल किले पर झंडा फहराया जाता है पर वह झंडा कितना बड़ा होता है कितना चौड़ा होता है इसका अंदाजा सत्यनारायण को नहीं था.

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सत्यनारायण आंध्र प्रदेश के गोदावरी डिस्टिक से आते हैं पेशे से एक बुनकर हैं, सत्यनारायण का सपना है कि उनका बनाया हुआ तिरंगा लाल किले पर फहराया जाए. सत्यनारायण ने आज से 7 साल पहले एक फिल्म देखी जिसमे तीन बच्चों ने मिलकर एक तिरंगा बनाया था. वहीं से सत्यनारायण ने सोचा कि वह भी एक बुनकर हैं, जब ये बच्चे तिरंगा बना सकते हैं तो वो क्यों नही, यहीं से सत्यनारायण ने सोचा कि वह ऐसा तिरंगा बनाएंगे जो उनके जैसे कारीगरों की पहचान हो और उस तिरंगे को लाल किले पर फहराया जाएगा.

शुरुआती दौर पर सत्यनारायण को सिर्फ इतना पता था कि लाल किले पर झंडा फहराया जाता है पर वह झंडा कितना बड़ा होता है कितना चौड़ा होता है इसका अंदाजा सत्यनारायण को नहीं था. सत्यनारायण एक बहुत गरीब बुनकर हैं इसलिए उन्होंने शुरुआती दौर में झंडे को बनाने के लिए अपने घर को गिरवी रखा, सत्यनारायण को लगा कि झंडे को बनाने में 70 से 80 हजार का खर्चा आएगा लेकिन जैसे-जैसे वह झंडा बनाते गए तो उन्हें पता चला कि लाल किले पर फैलाने के लिए झंडा 12 / 8 का होना चाहिए इस झंडे को बनाने के लिए सत्यनारायण के पास बड़ी मशीन नहीं थी, इन बड़ी मशीनों को खरीदने के लिए सत्यनारायण को अधिक पैसों की जरूरत थी, जिसके लिए सत्यनारायण ने अपना घर बेच दिया, और अब 6 लाख रुपयों में सत्यनारण ने ये अनोखा झंडा बनाकर तैयार किया है.

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एक धागे से बना है तिरंगा
सत्यनारायण ने अपनी जिंदगी के 7 साल इस झंडे को बुनने में लगा दिए यह झंडा बेहद खास है क्योंकि इस झंडे को बिना किसी काट छाट के, एक धागे से बनाया गया है, अभी तक किसी भी देश में ऐसा तिरंगा नहीं बनाया गया है जो केवल एक धागे से बना हो. तिरंगे के बीच में बना अशोक चक्र भी बेहद खास है इसे भी सत्यनारायण ने हथकरघा से ही बनया है. गुड न्यूज़ टुडे से बात करते हुए सत्यनारायण ने बताया कि अशोक चक्र को बनाने में बहुत सी मुश्किलें आई उनकी मशीन से अशोक चक्र गोल नहीं बन पा रहा था लेकिन वह नहीं चाहते थे कि अशोक चक्र को वह किसी प्रिंटिंग मशीन से बनाएं उन्होंने बार-बार मेहनत की और अपनी हथकरघा  मशीनों से ही पूरे अशोक चक्र को बुना.

लाल किले पर फहराया जाए तिरंगा...
सत्यनारायण का सपना है कि उनका बनाया हुआ तिरंगा एक बार लाल किले पर फहराया जाए लेकिन लाल किले पर जो झंडा फहराया जाता है, वह भी आई एस ब्यूरो ऑफ इंडियन स्टैंडर्ड्स के मानक के हिसाब से बनाया जाता है और अभी तक कर्नाटक के हुबली की एक संस्था लाल किले के लिए तिरंगा बनाती आई है, 15 अगस्त से 1 दिन पहले सत्यनारायण राष्ट्रपति द्रोपती मुर्मू से मिलकर अपनी बात रखना चाहते हैं और प्रधानमंत्री से भी प्रार्थना करना चाहते हैं कि उनकी इस मेहनत को एक बार लाल किले पर फहराया जाए.